हड़ताल करने वाले कभी डरते नहीं, जो डरते हैं वो लड़ते नहीं: राहुल सिंह
घोड़ासहन, पूर्वी चंपारण।
शनिवार को हड़ताल के 27 वे दिन बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति पूर्वी चंपारण के संयोजक डॉ रामधारी प्रसाद यादव एवं समन्वयक जयनारायण सिंह ने कहा कि हम लेकर रहेंगे पूर्ण वेतनमान, सरकार हड़ताल से डरकर अपना लाज बचाने के लिए और हड़ताल को कमजोर करने के लिए जो हथकंडा अपना रही है उसमें सरकार सफल नही होगी, सरकार की उल्टी गिनती चालू है।
शनिवार को हड़ताल के 27 वे दिन बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति पूर्वी चंपारण के संयोजक डॉ रामधारी प्रसाद यादव एवं समन्वयक जयनारायण सिंह ने कहा कि हम लेकर रहेंगे पूर्ण वेतनमान, सरकार हड़ताल से डरकर अपना लाज बचाने के लिए और हड़ताल को कमजोर करने के लिए जो हथकंडा अपना रही है उसमें सरकार सफल नही होगी, सरकार की उल्टी गिनती चालू है।
वही पूर्वी चंपारण अध्यक्ष मंडल सदस्य सह जिलाध्यक्ष शिक्षक न्याय मोर्चा राहुल सिंह ने कहा कि माँगो के समर्थन में नियमित शिक्षको के समान वेतनमान, सेवा शर्त, सहायक शिक्षक और राज्यकर्मी का दर्जा से कम कुछ भी मंजूर नही, बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति का आंदोलन हड़ताल जारी रहेगा। सरकार को इस बार कोरोना भी नही बचा सकता, साथियो सरकार हड़ताल से है परेशान और न ले हाइकोर्ट संज्ञान इसलिए राज्य सरकार ने 31 मार्च तक बंद किया सभी विद्यालय। हड़ताल से डरकर सरकार नेे अवकाश की घोषणा कर दी हैै हमारी हड़ताल जारी है और जारी रहेगा , जबतक सरकार हमारी मांगो को नही मानती।
जिला सचिव मंडल संतोष सिंह ने कहा कि शिक्षको के आंदोलन एवम हड़ताल के समय प्रकृति भी नीतीश सरकार का विरोध करती है, जैसे 2015 में भूकंप और 2020 में कोरोना वायरस, उसके बाद उन्होंने कहा कि हाय रे नीतीश तूने कैसा किया विकास, होली के दिन भी शिक्षक बैठे अपने घर उदास, हड़ताल जरूरी है।
वही प्रखंड अध्यक्ष मुकेश सिंह ने कहा कि 17 फरवरी के बाद स्कूल खुला कब था की जिसे 31 मार्च तक बंद कर दिया गया। मौके पर संयोजक डॉ रामधारी प्रसाद यादव, समन्वयक जयनारायण सिंह, अध्यक्ष मंडल पूर्वी चंपारण सदस्य राहुल सिंह, गोलू सिंह,
प्रियरंजन सिंह, अरविंद सिंह, अशोक चौधरी, सतीश सिंह, नवलकिशोर सिंह, उपेन्द्र दुबे, मनीष कुमार, पिंकू कुमार, उपेन्द्र दुबे, अबुल कमर, सुनील रॉय, सहित संतोष सिंह, मुकेश सिंह, ओमप्रकाश सिंह, बलिंद्र सिंह, मनु जी, राजेश जी, फ़ैसल जी, नबी रसूल, दाऊद जी, मुनिफ आलम, नुरुल होदा ,सहित सभी शिक्षक मौजूद थे।



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