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जिला पदाधिकारी के सख्त निर्देश के बाद भी नही रूक रही कालाबाजारी,थोक और फुटकर दुकानदार वसूल रहे मनमानी कीमत


जनवितरण प्रणाली में भी भ्रसटाचार की खबर, मार्च माह का अनाज  कालाबाजारी में बेच देने का आरोप


नरेंद्र झा की विशेष रिपोर्ट। कोरोना के भय से घरों में कैद लोगों को आवश्यक सामग्री सुगमता से उपलब्ध कराने के प्रशासनिक दावों की जमाखोरों एवं खाद्यान्न माफियाओं ने गला घोंट दिया है। एक तरफ डीएम मोतिहारी डोर टू डोर सब्जी सहित अन्य खाद्य सामग्री पहुंचाने की व्यवस्था में लगे हैं तो दूसरी तरफ कालाबाजारी करने वाले गिरोह  मजबूरी में घिरे लोगों से मनमानी कीमत देने को विवश कर रहे हैं। 
सांकेतिक तस्वीर
बताते हैं कि थोक मंडियों में खाद्यान्न की कोई कमी नहीं है। सब्जी बाजार में भी सब्जियों का आवक कम नही है फिर भी ये लोग फुटकर दुकानदार से अधिक कीमत ले रहे हैं। फुटकर दुकानदार ने भी मनमाने ढंग से कीमत बढ़ा दें रहें हैं। शासन की ओर से न तो दुकानों की विजिट हो रही है और न रेट पर अंकुश लगाने का कोई कारगर उपाय। 


हालांकि कि जिला प्रशासन की ओर से खाद्यान्न एवं सब्जियों की कीमत निर्धारित की गई है लेकिन धरातल पर लागू नही है। मोतिहारी के बलुआ,राजाबाजार, मीना बाजार,जानपुल ,छतौनी चौक के अनेक फुटकर दुकानदार ने बताया कि ट्रांसपोर्टिंग एवं खर्चा में बढ़ोतरी बताकर थोक व्यापारी ही ऊंची कीमत ले रहे हैं तो फिर फुटकर दुकानदार को तो महंगी दामों पर बेचना मजबूरी है। इन दुकानदारों का मानना है कि प्रशासन को थोक एवं खुदरा विक्रेताओं से एक साथ बैठक कर समाधान के उपाय बनाने की कोशिश करनी चाहिए। सबसे आश्चर्यजनक बात तो यह है कि गुटखा एवं पान मसाले की बिक्री पहले से ही प्रतिबंधित है लेकिन बेधड़क बेची जा रही थी लेकिन तब कीमत इतनी ऊंची नहीं थी। लाक डाउन के बाद गुटखा की कीमतों में अप्रत्याशित रूप से बढ़ोतरी की गई है। कीमत ऊंची हो या नीची यह तो बाद का विषय है लेकिन प्रतिबंध के बावजूद बेधड़क बेचा जाना सवाल खड़ा करता है।


प्रशासन के लिए एक और मुंह चिढ़ाने वाली बात है जनवितरण प्रणाली में व्याप्त भ्रसटाचार।कोरोना से परेशान उपभोक्ताओं की समस्याओं को लेकर डीएम शीर्षत कपिल अशोक काफी गंभीर और संवेदनशील है।मुनाफाखोरों,कालाबाजारियों एवं कोटेदारों को हिदायत दे रहे हैं कि कोई भी गलत न करें लेकिन विभागीय उदासीनता या यूं कहें कि स्थानीय आपूर्ति विभाग की मिलीभगत से गरीबों का हक मारकर खाद्यान्न की कालाबाजारी की जा रही है।


सिकरहना अनुमंडल के घोड़ासहन इसका ताजा उदाहरण है। कोरोना के भय से घरों में बंद लोगों को बाहर आकर प्रर्दशन करना पड़ा, स्थानीय आपूर्ति पदाधिकारी को घेरकर बैठाना पड़ा तब जाकर अपर अनुमंडल पदाधिकारी घोड़ासहन आए। दुकानों की जांच हुई तो पता चला कि मार्च माह का राशन उठाकर बेच दी गई। जनता के दबाव में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी ने घोड़ासहन थाना में आधा दर्जन कोटेदारों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई  है। 


इधर राजद के पूर्व विधायक लक्ष्मी नारायण यादव ने कहा है कि जिस प्रखंड में जनवितरण प्रणाली के तहत कालाबाजारी पकड़ी जाती है वहां के एम ओ पर भी प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए क्योंकि उनकी सहमति से ही खाद्यान्न माफिया कालाबाजारी के लिए खाद्यान्न खरीदता है। उन्होंने एसडीएम पर भी जिम्मेदारी तय कर विभागीय कार्रवाई करने की मांग सरकार से की है।श्री यादव का मानना है कि पूरे मार्च महीने का खाद्यान्न की कालाबाजारी की गई है इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।

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