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सारण : नवीन गर्भ-निरोधक साधनों के प्रति लोगों में महिलाओं में बढ़ी रुचि, अंतरा और छाया रख रही परिवार का ख़्याल

नवीन गर्भ-निरोधक साधनों के प्रति लोगों में महिलाओं में बढ़ी रुचि
अंतरा और छाया रख रही परिवार का ख़्याल   
सारण में 4938 महिलाओं ने अंतरा का इंजेक्शन लगवाया 
4227 महिलाओं ने किया छाया टेबलेट का इस्तेमाल
जिला से लेकर प्रखण्ड स्तर तक उपलब्ध है सुविधा
 प्रोत्साहन राशि का भी किया गया है प्रावधान 


छपरा। 
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अब जिले की महिलाएं परिवार नियोजन के अस्थायी साधनों के प्रति भी रुचि दिखा रही है। यह बदलाव परिवार नियोजन के बेहतर परिणामों की ओर इंगित करता है।  जिले में मिशन परिवार विकास की शुरुआत के साथ ही नवीन गर्भ-निरोधक साधन की भी शुरुआत की गयी है । बच्चों के जन्म में अंतर रखने के उद्देशय से अंतरा और छाया के नाम से इसे वर्ष अक्टूबर 2017 में ही लॉंच किया गया था। यह नवीन साधन अब राज्य के सभी जिलों में उपलब्ध है। 

साधनों के प्रति बढ़ी रुचि:


 जिला सिविल सर्जन मधेश्वर झा ने बताया जिले में 4938 महिलाओं ने अंतरा इंजेक्शन लगवाया है। जिसमें 2584 महिलाओं ने पहला डोज, 1279 महिलाओं ने दूसरा डोज, 688 महिलाओं ने तीसरा डोज एवं 387 महिलाओं ने चौथा डोज लिया है। जबकि जिले में 4227 महिलाओं ने छाया टेबलेट का इस्तेमाल किया है। धीरे-धीरे लोगों में अंतरा एवं छाया के प्रति रुझान बढ़ रहा है। 


3 लाख से अधिक महिलाओं ने अपनाया साधन:

परिवार नियोजन के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी   डॉ॰ मोहम्मद सज्जाद अहमद ने बताया   स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस वित्तीय वर्ष की अप्रैल माह से लेकर अगस्त माह तक राज्य में 3 लाख से अधिक महिलाओं ने अंतरा और छाया जैसे नवीन गर्भनिरोधक साधन को अपनाया है। जिसमें 1.64 लाख महिलाओं ने अंतरा इंजेक्शन एवं 1.54 लाख महिलाओं ने छाया गर्भ-निरोधक गोली का इस्तेमाल किया है। अंतरा इंजेक्शन के तहत कुल चार डोज़ एक साल में दिये जाने का प्रावधान है। जिसमें 85236 महिलाओं ने अंतरा का पहला डोज़, 43541 महिलाओं ने दूसरा डोज़, 22866 महिलाओं ने तीसरा एवं 12993 महिलाओं ने चौथा डोज़ लिया है। आम लोगों को अंतरा एवं छाया के संबंध में जागरूक करने के लिए आशा एवं एएनएम स्थानीय स्तर पर सराहनीय कार्य कर रही हैं। 


अंतरा एवं छाया से मिशन परिवार विकास के लक्ष्यों में आसानी:


 सैंपल रेजिस्ट्रेसन सर्वे-2019 के आंकड़ो के अनुसार बिहार की कुल प्रजनन दर 3.2 है। जिसका अर्थ है बिहार में एक महिला अपने प्रजनन काल में 3.2 बच्चों को जन्म देती है। मिशन परिवार विकास के तहत वर्ष 2025 तक बिहार के प्रजनन दर को 2.2 तक लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिसमें नवीन गर्भ-निरोधक साधन अंतरा एवं छाया के इस्तेमाल पर विशेष बल भी दिया जा रहा है। 


लाभार्थी एवं प्रेरक दोनों को प्रोत्साहन राशि :


 बच्चों में अंतराल एवं अनचाहे गर्भ से बचाव के लिए दो नवीन गर्भ निरोधक- ‘अंतरा’ एवं ‘छाया’ की शुरुआत की गयी है। ‘अंतरा’ एक गर्भ निरोधक  इंजेक्शन है, जिसे एक या दो बच्चों के बाद गर्भ में अंतर रखने के लिए दिया जाता है। इस तरह साल में चार इंजेक्शन दिया जाता है। ‘छाया’ गर्भ निरोधक एक साप्ताहिक टेबलेट है जिसका सेवन सप्ताह में एक बार करना होता है। साथ ही जब तक गर्भधारण नहीं करना हो तब तक इसका सेवन किया जा सकता है। साथ ही सरकार द्वारा अंतरा इंजेक्शन लगवाने पर प्रति डोज या सूई लाभार्थी को 100 रूपये एवं उत्प्रेरक को भी 100 रूपये दिए जाने का प्रावधान है।

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