Breaking News

सारण : सामुदायिक बैठक में संस्थागत प्रसव के प्रति लोगों को किया गया जागरूक

सामुदायिक बैठक में संस्थागत प्रसव के प्रति लोगों को किया गया जागरूक 

गांव-गांव में जाकर स्वास्थ्य विभाग की टीम कर रही है काम
स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सहयोग से चल रहा है अभियान
मुखिया व वार्ड सदस्य घर-घर जाकर करते है जागरूक

छपरा। 
-
जिले में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से कई स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं. इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा गांव-गांव  में जाकर सामुदायिक बैठक की जा रही है। जिले के ऐसे क्षेत्रों को भी चिन्हित किया गया है, जहां पर संस्थागत प्रसव कम होता है। उस क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। गड़खा प्रखंड के गलिमापुर, टहलटोला समेत अन्य गांवों में केयर इंडिया के सहयोग से सामुदायिक बैठक की गयी। जिसमें गांव की महिलाओं को संस्थागत प्रसव कराने के लिए जागरूक किया गया। साथ ही संस्थागत प्रसव कराने के फायदे व घर में प्रसव कराने के नुकसान के बारे जानकारी दी गई। वहीं महिलाओं को अस्पताल के बजाए घर में प्रसव कराने की वजह की भी समीक्षा की गई। 

जिला सिविल सर्जन मधेश्वर झा ने बताया संस्थागत प्रसव में बढ़ोतरी के लिए सामुदायिक स्तर पर होने वाली बैठकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. आशा, एएनएम एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता इन बैठकों के जरिए महिलाओं को जागरूक कर रही है. धीरे-धीरे लोगों में संस्थागत प्रसव को लेकर जागरूकता आ रही है. प्राप्त आंकड़ों के अनुसार संस्थागत प्रसव के लिए चिन्हित सभी स्वास्थ्य केन्द्रों में संस्थागत प्रसव की संख्या में निरंतर बढ़ोतरी भी दर्ज हो रही है.  

संस्थागत प्रसव के प्रति महिलाओं में बढ़ी रूचि:


जिला स्तर से लेकर सामुदायिक स्तर पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा संस्थागत प्रसव को लेकर  चलाए जा रहे कार्यक्रमों एवं जागरूकता अभियान का असर दिखने लगा है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 के अनुसार जिले में कुल 62 प्रतिशत संस्थागत प्रसव होता है. लेकिन पिछले कुछ सालों में संस्थागत प्रसव पर जागरूकता काफ़ी बढ़ी है, यह बदलाव राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 में दिखाई भी देंगे. संस्थागत प्रसव के प्रति रुचि बढ़ने का मुख्य कारण जननी एवं बाल सुरक्षा योजना है। साथ ही गांव के स्तर पर नि:शुल्क सरकारी एम्बुलेंस की उपलब्धता भी एक प्रमुख कारण रहा है। पिछले कुछ वर्षों में संस्थागत प्रसव का प्रचलन तेजी से बढ़ा है।

आशा व स्थानीय मुखिया जनप्रतिनिधियों का महत्वपूर्ण भूमिका:


संस्थागत प्रसव को बढ़ाना देने में स्थानीय मुखिया, वार्ड सदस्य, विकास मित्र व आशा की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। आशा के माध्यम से गर्भवती माताओं की ट्रैकिंग कराती है। फिर प्रसव होने तथा उसके बाद दो वर्ष तक उसका फालोअप कराया जाता है। मदर चाईल्ड ट्रेकिंग सिस्टम के तहत यह सब किया जाता है। इसी प्रणाली के तहत आशा गर्भवती माताओं को स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण तथा संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित करती है।
इस अवसर पंचायत के मुखिया उपेंद्र कुमार, वार्ड सदस्य, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सरबजीत कुमार, केयर इंडिया के बीएम प्रशांत कुमार सिंह समेत अन्य  लोग मौजूद थे।

कोई टिप्पणी नहीं

Thanks for your valuable feedback.