तीन दिवसीय सीतामढ़ी महोत्सव का समापन, मसहूर गायिका डिम्पल के अलावे डीएम ने भी सजाई महफ़िल
विक्की कुमार सिंह, सीतामढ़ी।
तीन दिवसीय सीतामढी महोत्सव के तीसरे दिन भी ख़ूब चढ़ा रंग पहले सांस्कृतिक कार्यक्रम मे मशहूर सिंगर डिंपल समेत स्थानीय कलाकारों ने अपना रंग बिखेरा तो एक बार फिर डीएम साहब के गाने की फ़रमाइश लोगों ने की। डीएम साहब मान भी गये और और फिर जमकर गाया गाना और बटोरी तालियाँ।
वही इसके बाद देश के कोने कोने से आये कवियों ने कवि सम्मेलन का रंग जमा दिया और लोगों को लोटपोट कर दिया ,अब बारी थी बेसुरा संघ की जिसका गठन डीएम साहब ने पदाधिकारियों की गाने की ललक देख कर कर दिया। जिसमें डीडीसी एसडीएम समेत सभी पदाधिकारी शामिल हुये और जब गाना शुरू हुआ तो लोटपोट हो गये लोग।
एक से एक बेसुरा की महफ़िल जमी जिसको जो आया वही गाना शुरू कर दिया और उनकी मासूम भाव भंगिमा लोगों के हँसी का करण बनी। महोत्सव का रंग इस क़दर जमा कि कब सुबह हो गई पता ही नही चला। अंत मे आयोजन मे सहयोग के लिये सबो को सम्मानित किया गया और डीएम साहब ने भग्न गाकर महोत्सव का समापन किया।
तीन दिवसीय सीतामढी महोत्सव के तीसरे दिन भी ख़ूब चढ़ा रंग पहले सांस्कृतिक कार्यक्रम मे मशहूर सिंगर डिंपल समेत स्थानीय कलाकारों ने अपना रंग बिखेरा तो एक बार फिर डीएम साहब के गाने की फ़रमाइश लोगों ने की। डीएम साहब मान भी गये और और फिर जमकर गाया गाना और बटोरी तालियाँ।
वही इसके बाद देश के कोने कोने से आये कवियों ने कवि सम्मेलन का रंग जमा दिया और लोगों को लोटपोट कर दिया ,अब बारी थी बेसुरा संघ की जिसका गठन डीएम साहब ने पदाधिकारियों की गाने की ललक देख कर कर दिया। जिसमें डीडीसी एसडीएम समेत सभी पदाधिकारी शामिल हुये और जब गाना शुरू हुआ तो लोटपोट हो गये लोग।
एक से एक बेसुरा की महफ़िल जमी जिसको जो आया वही गाना शुरू कर दिया और उनकी मासूम भाव भंगिमा लोगों के हँसी का करण बनी। महोत्सव का रंग इस क़दर जमा कि कब सुबह हो गई पता ही नही चला। अंत मे आयोजन मे सहयोग के लिये सबो को सम्मानित किया गया और डीएम साहब ने भग्न गाकर महोत्सव का समापन किया।

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