होली आने से पहले होने लगा षराब का स्टॉक
घोड़ासहन, पूर्वी चम्पारण ।
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| काल्पनिक |
जितना पुलिस ने सोमवार की रात्री गष्ती के दौरान जमुनी पुल के निकट से 3084 बोतल षराब जप्त किया है। वहीं मौके से एक तस्कर को भी गिरफतार किया गया है। थानाध्यक्ष राजीव कुमार ने बताया कि गष्ती के दौरान जमुनी पुल के पास बोलेरो संख्या बीआर05पी8577 को रोका गया। तलाषी के दौरान गाड़ी में 25 बोरा नेपाल निर्मित बसंती सौफी षराब पाया गया। जिसे जप्त कर अग्रतर कार्रवाई करते हुए तस्कर को हिरासत में भेज दिया गया है।
यहां बताते चले कि होली आने वाली है। जिसको लेकर तस्कर व माफिया षराब का स्टॉक करने में लग जाते हैं। इसके लिए वे अलग-अलग समय व अलग-अलग रास्तों का इस्तेमाल भी करते रहें है। चुकी पूर्वी चम्पारण का घोड़ासहन व बनकटवा प्रखंड नेपाल सीमा से सटा हुआ है। जहां से षराब की खेप धड़ल्ले से भारतीय सीमा में लाई जाती है।
ऐसे तो होली के आते ही मांस व दारू के दामों में बेतहाषा वृद्धि हो जाती है। जिसके कारण पहले से स्टॉक किए गए षराब को तस्कर तीन गुने किमतों पर ग्राहकों को मुहैया कराते हैं। ऐसे तस्करों को पकड़ने के लिए पुलिस समय-समय पर पैंतरा लगाती है। परन्तु छापेमारी से पूर्व इनके अपनों के द्वारा ही सूचनाएं लीक हो जाती है। जिसके कारण छापेमारी से पूर्व ही तस्करों द्वारा समानों को ठीकाने लगा दिया जाता है।
हालाकि इसको लेकर होली से पहले व समय-समय पर विषेश अभियान भी चलाया जाता है। परन्तु नेपाल से सटे सीमा क्षेत्रों में पुलिस की जांच भगवान भरोसे ही चलती है। जिसके कारण आसानी से रात के अंधेरे में कौन कहे दिन के उजाले में भी चार पहिया, बाईक व यहां तक कि माथे पर रख आसानी से भारतीय सीमा क्षेत्र में प्रवेष कर जाते हैं। जानकार बताते हैं कि इसमें सीमा क्षेत्र में तैनात सरकारी तंत्र भी इनका सहयोग करने में कोई कसर नही छोड़ते हैं।
बिहार में षराब बंदी के बाद से ही तस्कर नए-नए हथकंडे अपना रहें हैं। किसी को षक न हो इसके लिए बजाप्ता होम डिलिवरी का व्यवस्था भी इनके द्वारा किया जाता है। यदि स्थानीय स्तर पर देखा जाए तो होम डिलिवरी के लिए तस्कर खासकर युवा व बच्चों का इस्तेमाल करते हैं। जिसके एवज में तस्कर बच्चों को षराब व रूपया दोनो ही मुहैया कराते हैं। ऐसे तो युवा वर्ग के लोगों को इस बात की जानकारी होती है कि यह धंध अवैध है। फिर भी मोटी रकम के लालच में वे इस धंधे को अंजाम देने से नही हिचकते हैं।
बनकटवा प्रखंड के अगरवा, रेगनिया, बलुआ, बड़ैला, सठौरा, बिजवनी आदि तथा घोड़ासहन प्रखंड के अमवा, पीठवा, कोरैया, बालापुर आदि गांव व घोड़ाहसन बाजार के विरता चौक, कुषमारी, आदर्ष नगर, गांधीनगर, उच्च विद्यालय मुहल्ला आदि सहित कई गांव व स्थानों में ये खेल देखने को मिल सकता है। हालाकि इसकी जानकारी पुलिस को भी है।

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