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जीवन की ढल गई साँझ...



रक्सौल से डी.एन.कुशवाहा की रेपोर्ट 

आज समूचा देश शोक के महासागर में डूब गया है। देश का एक महान सपूत चुपके से इस लोक से अलविदा कह गया है। मेडिकल साइंस के सारे प्रयोग असफल हो गए हैं। देह यात्रा जैसे पूरी हो गई है। आत्मा परम धाम की अनंत यात्रा पर निकल चुकी है।उक्त बातें समाजसेवी प्रो.स्वयंभू शलभ ने पत्रकार वार्ता के दौरान गुरुवार की संध्या कही।साथ ही उन्होंने कहा कि उम्र के हिसाब से 93 वर्ष का लंबा जीवन जिया ..किन्तु पिछले लगभग एक दशक से खामोशी में...एक प्रकार की शून्यता में जीते रहे...नियति ने भी ऐसे महान योद्धा के भाग्य में कैसी पीड़ा लिख दी..
क्या कोई शब्द पर्याप्त है इस भाव को व्यक्त करने के लिए...क्या कोई संदेश पूर्ण है इस श्रद्धांजलि  को व्यक्त करने के लिए...
आप हमेशा ही एक एक भारतवासी के दिल में रहेंगे।
आप की पंक्तियां आज बरबस याद आती हैं...


जीवन की ढलने लगी सांझ
उमर घट गई
डगर कट गई
जीवन की ढलने लगी सांझ।
बदले हैं अर्थ
शब्द हुए व्यर्थ
शान्ति बिना खुशियाँ हैं बांझ।
सपनों में मीत
बिखरा संगीत
ठिठक रहे पांव और झिझक रही झांझ।
जीवन की ढलने लगी सांझ।

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