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शर्मिंदगी का विषय बना भारत नेपाल का 'मैत्री पुल'


  • पीएमओ और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के निर्देश के बावजूद एनएचएआई और नेशनल हाईवे विंग के बीच फंसा रहा पेंच
  • प्रधान मंत्री, विदेश मंत्री, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री, मुख्य मंत्री एवं उप मुख्यमंत्री से ट्वीट और मेल के जरिये की रिनोवेशन की माँग


डी.एन.कुशवाहा रामगढ़वा

राष्ट्रीय राजमार्ग पर रक्सौल स्थित भारत और नेपाल को जोड़ने वाले 'मैत्री पुल' की बदहाली शर्मिंदगी का विषय बन गई है। इसकी तत्काल मरम्मत के लिए डा. स्वयंभू शलभ ने प्रधान मंत्री, विदेश मंत्री, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री, मुख्य मंत्री एवं उप मुख्यमंत्री से ट्वीट एवं मेल एवं जरिये अपील की है।
बदहाल पुल की तस्वीरों के साथ भेजे गए मेल में बताया है कि पुल के रेलिंग का अधिकांश हिस्सा टूट चुका है। स्लैब का कंक्रीट पूरी तरह उखड़ चुका है। तालाबनुमा गड्ढे बन गए हैं। पैदल चलना भी मुश्किल है। साइकिल, मोटर साइकिल समेत टांगा, रिक्शा भी पुल की सड़क छोड़कर पुल के फुटपाथ पर चल रहे हैं। आये दिन दुर्घटना हो रही है।
देश विदेश के पर्यटक हर रोज इस पुल से गुजरते हैं। नेपाल के रास्ते भारत आनेवाले पर्यटक पहली बार यहीं भारत दर्शन करते हैं। इस पुल के साथ देश की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है।
विदित है कि इस पुल के रिनोवेशन एवं मेंटेनेंस के मामले में गत 17 मई को डा. शलभ द्वारा दर्ज परिवाद सं PMOPG/E/2018/0226930 के आलोक में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के डीजी के हवाले से असिस्टेंट इंजीनियर संतोष प्रकाश ने एनएचएआई के रीजनल ऑफिस, पटना और नेशनल हाईवे विंग के चीफ इंजीनियर, पटना को उपयुक्त जवाब देने का निर्देश दिया।
इस अपील में डा. शलभ ने इस कार्य को किसी अन्य एजेंसी को सौंप दिए जाने की मांग की थी ताकि बर jiसात के पूर्व इसका जीर्णोद्धार कार्य आरंभ हो सके लेकिन बरसात शुरू होने के बाद भी इस पुल की सुध नहीं ली गई। 
इससे पूर्व इस मामले में पीएमओ के निर्देश पर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा गत 19 जनवरी 2018 को भी नेशनल हाईवे, पटना के चीफ इंजीनियर एवं एनएचएआई, पटना के रीजनल ऑफिस को पत्र देते हुए इस मामले में उपयुक्त जवाब दिए जाने का निर्देश दिया गया था।
वहीं गत 20 जुलाई 2017 को परिवाद सं PMOPG/E/2017/0392515 के आलोक में
पीएमओ द्वारा एनएचएआई से सूचना मांगी गई जिसके जवाब में एनएचएआई ने 14 अगस्त 2017 को बताया था कि यह पुल उसके क्षेत्राधिकार में नहीं आता।
दूसरी ओर माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी इस मामले में गत 15 जनवरी 2018 को पथ निर्माण विभाग के सचिव को मेल भेजा था परंतु अभी तक किसी विभाग ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली।


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