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चम्पारण का लाल ने एक बार फिर बालू पर आकृति उकेर विश्व को दिया जनसंख्या नियंत्रण का सन्देश

डॉक्टर कृष्णा मुरारी कुमार ने बालू पर चित्रकारी करने वाले कलाकार मधुरेन्द्र को किया सम्मानित
चम्पारण टुडे, न्यूज़ डेस्क।
घोड़ासहन : विश्व जनसंख्या दिवस पर घोड़ासहन थाना क्षेत्र के स्थानीय गुरु गोविन्द सिंह चौक के समीप श्याम सुन्दर मेमोरियल डेंटल क्लिनिक परिसर में बुधवार की शाम सैंड आर्ट के विश्वविख्यात कलाकार मधुरेन्द्र कुमार ने जनसंख्या नियंत्रण के लिए बालू पर स्टॉप पाॅपुलेशन की आकृति बनाकर खूब वाहवाही लूटी। यह कलाकृति आकर्षण  का केंद्र बनी रही। अपनी अनूठी कला के द्वारा मधुरेन्द्र ने छोटा परिवार व सुखी परिवार का चित्रण को दरसाया साथ ही जनसख्या नियंत्रण का सन्देश दिया है।उन्होंने बताया की हमारे देश की जनसंख्या 2001-2011 के दशक में 17.6 प्रतिशत की दर से बढ़कर 1 अरब 25 करोड़ से ज्यादा हो गयी हैं। विकराल होती जनसंख्या के कारण बुनियादी आवश्यकताओं का घोर अभाव होता जा रहा हैं। आज भी 2 करोड़ से अधिक लोग खुले आसमान के निचे अपना जीवन यापन करने को विवश हैं। जबकी 35-40 करोड़ लोगों को दो जून की रोटी मयस्सर नहीं हो पाती। यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार 60 करोड़ लोग खुलें में शौच करने को विवश हैं। गौरतलब हो की समय समय पर मधुरेन्द्र के द्वारा बिहार सहित भारत के विविन्न राज्यों के अलावा नेपाल में भी अपनी अनोखी कलाकृति के माध्यम से अपनी अनूठी छाप छोड़ी हैं।
मौकें पर युवा कलाकर मधुरेन्द्र  को डेंटल डॉ कृष्णा मुरारी गुप्ता ने स्मृति चिन्ह भेट की। विशाल युवा वाहिनी पूर्वी चम्पारण के जिला प्रभारी प्रेमनन्द आर्य, उपेन्द्र प्रसाद कुशवाहा ने अंग वस्त्र से सम्मानित किया।  वहीं डॉ वेद प्रकाश गुप्ता, सन्तोष कुमार, संजीव कुमार, डॉ शत्रुघ्न प्रसाद, राजेन्द्र दास, जय नारायण उर्फ अजय साह, गीरधारी कुमार, मनोज कुमार शम्भु प्रासाद, बबलू गिरि, सहित सैकड़ों बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों व गणमान्य लोगों ने कलाकृति की प्रशंसा करते कहा की बच्चों को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, वातावरण सहित अन्य आवश्यक सुविधाएँ भविष्य में देने के लिए छोटे परिवार की महती आवश्यकता निरन्तर बढ़ती जा रही है। प्राकृतिक संसाधनों का समुचित दोहन कर मानव समाज को सर्वश्रेष्ठ बनाए रखने और हर इंसान के भीतर इन्सानियत को बरकरार रखने के लिए यह बहुत ज़रूरी हो गया है कि 'विश्व जनसंख्या दिवस' की महत्ता को समझा जाए।

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