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बिहार सियासत में उठा बवंडर व आया भूचाल :-अर्जुन भारतीय

डी.एन.कुशवाहा, रामगढ़वा।
रामगढ़वा-प्रखंड क्षेत्र के बंधु बरवा गांव निवासी  व  वरीय भाजपा नेता  अर्जुन भारतीय ने प्रेस वार्ता के दौरान गुरुवार को  बताया कि बिहार के सियासी क्षेत्र में नीतीश कुमार  के लालू यादव को फोन करके हालचाल जानने के बाद  बिहार के सियासी क्षेत्र में  विगत दो दिनों से हलचल आ गया है।यह हलचल सिर्फ बिहार में ही नहीं, बिहार से बाहर नई दिल्ली तक भी दिखाई दे रहा है। ऐसा लगता है ,जैसे भाजपा- जदयू गठबंधन में "तलाक" होने वाला है। यह कयास सिर्फ विरोधियों में ही नहीं लगाया जा रहा है। यह कयास मीडिया से लेकर राजनीतिक पर्यवेक्षकों तक समाया हुआ है। सच कहा जाए तो इस कयास के पीछे कुछ तार्किक पहलू भी हैं। यह हालात अब इसलिए गंभीर दिखने लगा है ,क्योंकि विगत समय में कुछ ऐसे प्रसंग प्रकट हुए जो आज कयास लगाने के कारक बन गए हैं। कयास लगाने के कारक पिछले 2 महीने में ही उजागर हुए हैं। इस अवधि में कयास लगाने की शुरुआत तब शुरू हुई जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक लंबे अंतराल के बाद जोर-शोर से बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग उठाई। उनकी मांग उठाने पर उसके पीछे पूरा जदयू ने उस मांग को दोहराने का सिलसिला शुरु किया। जब "योग दिवस" देश तथा दुनिया के 170 देशों में धूमधाम से मनाया जा रहा था ,तब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तथा उनका जदयू इससे बिल्कुल अलग-थलग था। अभी दो दिनों पहले राजधानी में आयोजित एक समारोह में उन्होंने देश के हालात पर चिंता जाहिर करते हुए जात -मजहब तथा उन्मादी माहौल पर अपने अंदाज में प्रहार किया। इस अवधि में एक-दो ऐसी घटनाएं घटी ,जिसमें जदयू का झुकाव विपक्ष के साथ नजर आया। इसमें  दिल्ली के मुख्यमंत्री  अरविंद केजरीवाल  का प्रसंग भी शामिल है ।मीडिया तथा राजनीतिक क्षेत्रों में इस पर तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे। विगत दो दिनों से इस प्रसंग पर कुछ ज्यादा ही शोर मचा हुआ है। हालांकि दोनों घटक दलों से इस प्रसंग में कोई दम नहीं होने का दावा किया जाता रहा है।
     
अर्जुन भारतीय सदस्य हिन्दी सलाहकार समिति कृषि कल्याण मंत्रालय भारत सरकार
गजब तो यह है कि लालू यादव से फोन पर नीतीश कुमार ने उनके स्वास्थ्य का हाल पूछा तभी से मीडिया तथा राजनीतिक क्षेत्रों में इसको लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे। आज भी इस प्रसंग में कयास लगाने के शोर कायम है। कोई "सीट शेयरिंग" का मामला बता रहा है, तो कोई इसे "नई सियासी राह" तलाशने का आधार। कोई दलील यह दे रहा है कि जब धुआं निकल रहा है ,तो भीतर जरूर कुछ ना कुछ आग है? सच्चाई चाहे जो हो ,लेकिन उठे इस सियासी बवंडर से भाजपा -जदयू के बजाय, बहुत बेचैनी "राजद" के भीतर दिखाई दे रही है। प्रतिपक्ष के नेता एवं राजद के "युवराज" तेजस्वी यादव ने पहले तो टेलीफोन से लालू यादव से समाचार लेने के नीतीश कुमार के सवाल पर यह कहा कि "उक्त वार्ता" सिर्फ शिष्टाचारवश थी। इसी के साथ उन्होंने बोलते -बोलते यहां तक कह दिया कि नीतीश कुमार के लिए महागठबंधन का दरवाजा बिल्कुल बंद है।वे इतने पर ही नहीं रुके। आगे कहा कि कांग्रेस ने उन्हें थामने की कोशिश की, तो राजद कांग्रेस को कबूल नहीं कर सकेगा। तेजस्वी के  इस उद्गगार में उनके भीतर की बेचैनी छलकती दिखती है। यानी, भाजपा-जदयू  की कथित भीतरी उठापटक की बेचैनी हो अथवा नहीं। लेकिन ,इस प्रसंग को लेकर राजद के भीतर बहुत बेचैनी जरूर है। सियासी खेल जो ऊपर से दिखता है ,उसका भीतरी परिणाम अलग ही होता है। इसीलिए कहा जाता है कि सियासी क्षेत्र में कुछ भी हो सकता है। यहां क्या हो सकता है? यह आने वाला वक्त बतलायेगा। तत्काल राजद के भीतर की बेचैनी बाहर जरूर हो गई है।

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