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रिफंड नियम समेत चार प्रमुख विन्दुओं पर रेलवे बोर्ड द्वारा पुनर्विचार किये जाने की मांग

डी.एन.कुशवाहा, रामगढ़वा।
पीएमओ में एक परिवाद दर्ज़ कर रिजर्वेशन के रिफंड नियम समेत चार प्रमुख विन्दुओं पर रेलवे बोर्ड द्वारा पुनर्विचार किये जाने की मांग समाजसेवी डा. स्वयंभू शलभ ने की है। पीएमओ द्वारा इसे अवर सचिव को भेज दिया गया है। विदित है कि इस मामले में डा. शलभ द्वारा पूर्व में दर्ज परिवाद के आलोक में कन्फर्म टिकट के रिफंड नियमों में बदलाव के संबंध में रेल बोर्ड द्वारा बताया गया कि निर्धारित समयसीमा के भीतर टिकट रद्द किया जाता है तो नियमानुसार राशि रिफंड की जाती है। वर्तमान में इस नियम में बदलाव का कोई प्रावधान नहीं है। इस परिवाद में वर्णित अन्य महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर  बोर्ड द्वारा कोई टिप्पणी नहीं की गई जबकि बड़ी संख्या में हर रोज यात्री इन समस्याओं से प्रभावित होते हैं।
उक्त परिवाद में डा. शलभ द्वारा बताया गया कि कन्फर्म टिकट पर सफर नहीं कर पाने या किसी भी कारण ट्रेन छूट जाने की स्थिति में रेलवे कोई रिफंड नहीं करती। आईआरसीटीसी में टीडीआर फाइल करने का भी विकल्प नहीं मिलता। ट्रेन के खुलने के 4 घण्टे पहले ही टीडीआर फाइल करने का आप्शन बंद हो जाता है। पूरे देश में हर रोज सैकड़ों पैसेंजर की ट्रेन किसी न किसी कारण छूटती है जिसके एवज में रेलवे एक पैसा भी रिफंड नहीं देती। जबकि पैसेंजर की गैर मौजूदगी में उस बर्थ को कुछ दूरी के बाद टीटीई द्वारा किसी अन्य पैसेंजर को दे दिया जाता है। यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि ज्यादातर यात्रियों के ट्रेन छूटने का कारण कनेक्टिंग ट्रेन की लेट लतीफी होती है।


  • ट्रेन छूट जाने की स्थिति में रेलवे नहीं देती कोई रिफंड 
  • ट्रेन को अचानक रद्द करने की स्थिति में यात्रियों को नहीं मिलती कोई सुविधा 


रेल बोर्ड से मांग की गई है कि कनेक्टिंग ट्रेन के लेट होने से यदि अगली ट्रेन छूट जाती है तो रेलवे इसका पूरा रिफंड दे।
टीडीआर फाइल करने के समय यात्री को पिछली ट्रेन का डिटेल्स देने का आप्शन रहे ताकि आईआरसीटीसी उस यात्री के पीएनआर से पिछली ट्रेन पहुंचने के समय को वेरीफाई कर सके। यदि कनेक्टिंग ट्रेन की देरी के कारण अगली ट्रेन छूटी हो तो टिकट का पूरा रिफंड मिले। साथ ही उस प्रभावित यात्री को वैकल्पिक ट्रेन में रिजर्वेशन या तत्काल टिकट में सहूलियत देने पर भी रेलवे विचार करे। अन्य किसी अपरिहार्य स्थिति में भी कन्फर्म टिकट पर सफर नहीं कर पाने की स्थिति में 25% से 50% रिफंड मिले।
वहीं रेलवे किसी अपरिहार्य कारण से यदि किसी ट्रेन को अचानक रद्द कर देती है तो प्रभावित यात्रियों को अन्य कोई वैकल्पिक सुविधा नहीं मिल पाती। यह भी एक गंभीर समस्या है। अगले दिन तत्काल में या अन्य वैकल्पिक ट्रेन में रद्द किये गए ट्रेन के पीएनआर के आधार पर प्राथमिकता देने का प्रावधान किया जाना आवश्यक है। भारतीय रेल यात्रियों की सुविधा और सेवा के लिए है। किसी भी प्रकार से यदि यात्री ठगा हुआ महसूस करता है तो उसपर सरकार और रेल मंत्रालय को विचार करना आवश्यक है।
दूसरे विंदु में बताया गया है कि रेलवे काउंटर से रिजर्वेशन के दौरान किसी गंतव्य के लिये अगर एक ट्रेन से अधिक ट्रेन की जरूरत होती है तो टेलिस्कोपिक किराया लगता है साथ ही गंतव्य को जाने वाली हर ट्रेन में उपलब्ध होने पर आरक्षण भी मिलता है।
समाजसेवी प्रो.स्वयंभू शलभ
ऐसी सुविधा रेलवे के आधिकारिक वेबसाईट पर उपलब्ध नहीं है। यहां अलग अलग टिकट बुक करना पड़ता है जिससे यात्री को अधिक किराया चुकाना पड़ता है।
यह सुविधा वेबसाइट पर भी समान रूप से उपलब्ध कराये जाने की मांग की गई है।
तीसरे विंदु में बताया गया है कि एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन के बीच समान दूरी तय करने वाली एक्सप्रेस गाड़ियों का किराया समान होता है पर हर गाड़ी उसी दूरी को तय करने में अलग अलग समय लेती है। इसपर भी गौर किये जाने की आवश्यकता है।
चौथे विंदु में इस पहलू पर ध्यान दिए जाने की मांग की गई है कि स्टेशनों पर एसी और स्लीपर क्लास (द्वितीय श्रेणी) के यात्रियों के लिए अलग अलग वेटिंग रूम की व्यवस्था होती है पर जयपुर जैसे स्टेशन पर थर्ड एसी के यात्री और द्वितीय श्रेणी के यात्रियों के लिए एक ही कॉमन वेटिंग रूम उपलब्ध है।

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