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किसानों की जीवन- रेखा (नहरों) को जीवित बनाने के लिए सरकार को उठाना चाहिए ठोस कदम:- अर्जुन भारतीय

*सुखी नहरें ,मुरझाए किसान*
*जीवन व मौत से जूझ रहे किसानों की जीवन- रेखा (नहरों) को जीवित बनाने के लिए सरकार को उठाना चाहिए ठोस कदम:- अर्जुन भारतीय*
अर्जुन सिंह भारतीय ,सदस्य, हिंदी सलाहकार समिति एवं किसान कल्याण मंत्रालय भारत सरकार
रामगढ़वा से डी.एन.कुशवाहा की रिपोर्ट-
रामगढ़वा-क्षेत्र के गंडक योजना की नहरें दिनोंदिन सूखती जा रही हैं । किसानों के चेहरे दिन प्रतिदिन मुरझाते जा रहे हैं। एक तो बाढ़ की त्रासदी का मार झेल चुके किसानों की हालत पहले से ही तंगी में है। दूसरी तरफ सरकार कि अनदेखी की वजह से क्षेत्र की नहरों ने भी दगा दे दिया है।जिससे क्षेत्र के किसान जिंदगी व मौत के बीच  जूझ रहे  है। आजादी के बाद 1950 के दशक की शुरुआत में किसानों के जिंदगी में चार चांद लगाने हेतु गंडक योजना के तहत नहरों के निर्माण की योजना बनी । तब बाल्मीकि नगर में गंडक नदी से दो मुख्य नहरें --पूर्वी तथा पश्चिमी नहर निकाली गई।पश्चिमी नहर यूपी क्षेत्र के किसानों के लिए तथा पूर्वी नहर चंपारण होते हुए वैशाली ,मुजफ्फरपुर तथा समस्तीपुर के किसानों के लिए । शुरू में गंडक योजना का कुल लागत खर्च 34 करोड़ रुपए का था। उस समय चंपारण में नहरों का जाल बिछा व सिंचाई का उत्तम प्रबंध हुआ करता था।जिससे किसानों के चेहरे पर मुस्कान आई आ गई और किसान संकट से उबर रहे थे। दो दशकों तक नहरों से सिंचाई का कार्य सुचारु रुप से चलाता रहा।कालांतर में जब-जब नहरों के आधुनिकरण तथा बड़े सुधार का कार्य आरंभ हुआ। तब-तब नहरों की हालत बिगड़ती चली गई और सिंचाई का फैलाव सिकुड़ता गया।आज वे नहरें लगभग मृतप्राय हो गई हैं, और नहरों का लागत खर्च 34 करोड रुपए से क्रमशः 2-400 करोड़ ,फिर  बढ़ते -बढ़ते हजार -दो हजार करोड़ हो गई। वर्तमान में  वह खर्च 10 से 20 हजार करोड़ रुपए पर पहुँच गया है। उक्त योजना के तहत पिछले दशकों में सैकड़ों अभियंताओं तथा ठेकेदारों ने लाखों- लाख की कमाई की ।और उस कमाई से राजधानी पटना ,रांची, सहित अन्य शहरों में जमीन खरीदी व आलीशान कोठियां बनवाई।जिससे उनके चेहरे तो चमक गए,लेकिन किसानों के चेहरे मुरझाए गए।यूपी के लिए निकाली गई पश्चिमी मुख्य नहर सिंचाई देने में बहुत हद तक तो कामयाब है।लेकिन पूर्वी मुख्य नहर वैशाली,मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर को कौन कहे ,संयुक्त चंपारण में ही सिंचाई मुहैया कराने में विफल हो साबित हो गई है । चंपारण में गंडक नहरों से अब सिर्फ 20 - 25% क्षेत्र में ही किसी तरह से सिंचाई हो पा रही है । पहले से सिंचित होने वाले क्षेत्रफल का आज के दिन में 75% क्षेत्र सिंचाई से वंचित हो गया है। इस बाबत अर्जुन भारतीय ,सदस्य हिंदी सलाहकार समिति एवं किसान कल्याण मंत्रालय भारत सरकार ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से शनिवार को कहा है कि पहले से ही जीवन व मौत से जूझ रहे किसानों की इस जीवन- रेखा (नहरों) को जीवित बनाने के लिए सरकार को सार्थक एवं ठोस  कदम उठाना चाहिए।

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