हर्षोल्लास के साथ मनाया गया मकर संक्रांति का त्योहार
*हर्षोल्लास के साथ मनाया गया मकर संक्रांति का त्योहार*
*संक्रांति पर भीष्म पितामह ने त्यागी थी देह*
रामगढ़वा से डी.एन.कुशवाहा की रिपोर्ट-
रामगढ़वा-प्रखंड क्षेत्र में सोमवार को हर्षोल्लास, भाईचारा एवं सौहार्द पूर्ण माहौल में मनाया गया मकर संक्रांति का त्योहार। खिचड़ी के दिन चारों तरफ काफी चहल-पहल देखा गया। इस अवसर पर हिंदू भाइयों ने एक दूसरे को बुलाकर खिचड़ी ,तिलवा व गुड़ से बना हुआ लाई इत्यादि खिलाया। मकर संक्रांति के महत्व को बताते हुए प्रखंड क्षेत्र के भलुवहिंया गांव निवासी पंडित संजय तिवारी ने बताया कि
हिंदू समाज में मकर संक्रांति का बहुत बड़ा महत्व है । क्योंकि महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति का ही चयन किया था। मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थीं। इसलिए संक्रांति मनाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस दिन तिल-गुड़ के सेवन का साथ नए जनेऊ भी धारण करना चाहिए ।
*संक्रांति पर भीष्म पितामह ने त्यागी थी देह*
रामगढ़वा से डी.एन.कुशवाहा की रिपोर्ट-
रामगढ़वा-प्रखंड क्षेत्र में सोमवार को हर्षोल्लास, भाईचारा एवं सौहार्द पूर्ण माहौल में मनाया गया मकर संक्रांति का त्योहार। खिचड़ी के दिन चारों तरफ काफी चहल-पहल देखा गया। इस अवसर पर हिंदू भाइयों ने एक दूसरे को बुलाकर खिचड़ी ,तिलवा व गुड़ से बना हुआ लाई इत्यादि खिलाया। मकर संक्रांति के महत्व को बताते हुए प्रखंड क्षेत्र के भलुवहिंया गांव निवासी पंडित संजय तिवारी ने बताया कि
हिंदू समाज में मकर संक्रांति का बहुत बड़ा महत्व है । क्योंकि महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति का ही चयन किया था। मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थीं। इसलिए संक्रांति मनाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस दिन तिल-गुड़ के सेवन का साथ नए जनेऊ भी धारण करना चाहिए ।

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