अपने जन्मदिन पर याद किए गए गुदरी के लाल व पूर्व मुख्यमंत्री जननायक स्व. कर्पूरी ठाकुर
अपने जन्मदिन पर याद किए गए गुदरी के लाल व पूर्व मुख्यमंत्री जननायक स्व. कर्पूरी ठाकुर
रामगढ़वा से डी.एन.कुशवाहा की रिपोर्ट-
रामगढ़वा : प्रखंड क्षेत्र के बरवा गाँव निवासी सह सदस्य, हिंदी सलाहकार समिति, केंद्रीय कृषि मंत्रालय अर्जुन भारतीय के नेतृत्व में बुधवार को मनाया गया बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जननायक कर्पूरी ठाकुर का जन्म दिवस।इस अवसर पर श्री भारतीय के कहा कि स्व. ठाकुर 1988 में एक अनजान वैद्य के साजिशाना इलाज में मौत के शिकार बने और हमारे बीच से चले गए ।आजादी के बाद पहले चुनाव 1952 से विधायक रहे तथा मरने के दिन तक सत्ता मैं रहे। वे विधायक, सांसद ,दो बार उप -मुख्यमंत्री, दो बार मुख्यमंत्री तथा दो बार विपक्ष के नेता रहे।फिर भी कभी उनके पास अपनी साइकिल तथा मोटरसाइकिल नहीं रही । चार चक्के वाली गाड़ी को कौन कहे ?वह गरीबी में जन्मे थे और गरीबी में ही दुनिया से चले गए। फक्कड़ जिंदगी थी उनकी और फक्कड़पन में ही चली गई। वे सादगी के साक्षात देवता थे ।52 साल की सियासी जिंदगी में 36 साल सत्ता में रहने पर भी उनकी गरीबी दूर नहीं हुई ।1988 में मरने के बाद उनके गांव पितौजिया (समस्तीपुर) में श्राद्ध -कार्य हुआ ,जहाँ उनके पिता स्व.गोकुल ठाकुर के द्वारा बनवाया हुआ भीत का टूटा फूटा घर था। श्राद्ध -कार्य में शरीक होने आए हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय देवीलाल जी घर देखकर भौचक हो गए। कर्पूरी जी के शरीर पर कभी कीमती अथवा सुंदर कपड़ा नहीं दिखा। हमेशा उनके शरीर पर साधारण कपड़ा मजदूर जैसा रहता था ,वह भी बिना "कलफ" के। जाड़े के लिए एक जलसा जूता था ,जिसे चिप्पी लगाकर दो -3 साल वे पहन लेते थे।जाड़े में सदरी की हालत भी वैसी ही होती थी ।जिसे 10 -12 साल तक चिप्पी लगाकर उसे पहना करते थे जो बिलकुल ढीला-ढाला रहता था। क्या तपस्वी व फकीरी जिंदगी थी उनकी ? नई पीढ़ी को सहसा विश्वास न होगा कि कर्पूरी ठाकुर नामक एक शख्स ऐसी फटेहाली की जिंदगी जीता रहा? कुल मिलाकर कर्पूरी जी ने पूरी जिंदगी वेदना में ही गुजार दी।दूर-दूर तक वैभव से तनिक भी संबंध नहीं बनाया।ऐसे थे जननायक कर्पूरी ठाकुर ।ऐसी थी उनकी फटेहाल जिंदगी । अगर हम उनकी फकीरी- सादगी से कुछ सीख पाए ,जी सके, तब ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उनके जन्मदिन पर उन्हें हमारा नमन !बहुत-बहुत श्रद्धांजलि!!( खंड -1) मौके पर ईश्वर सिंह, प्रेम चन्द्र सिंह ,उदयभान तिवारी ,आचार्य सत्येंद्र कुमार मिश्र ,मंटू सिंह, सुनील सिंह ,ब्रजेश सिंह तथा सुमन सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
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| गुदरी के लाल व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. जननायक कर्पूरी ठाकुर |
रामगढ़वा : प्रखंड क्षेत्र के बरवा गाँव निवासी सह सदस्य, हिंदी सलाहकार समिति, केंद्रीय कृषि मंत्रालय अर्जुन भारतीय के नेतृत्व में बुधवार को मनाया गया बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जननायक कर्पूरी ठाकुर का जन्म दिवस।इस अवसर पर श्री भारतीय के कहा कि स्व. ठाकुर 1988 में एक अनजान वैद्य के साजिशाना इलाज में मौत के शिकार बने और हमारे बीच से चले गए ।आजादी के बाद पहले चुनाव 1952 से विधायक रहे तथा मरने के दिन तक सत्ता मैं रहे। वे विधायक, सांसद ,दो बार उप -मुख्यमंत्री, दो बार मुख्यमंत्री तथा दो बार विपक्ष के नेता रहे।फिर भी कभी उनके पास अपनी साइकिल तथा मोटरसाइकिल नहीं रही । चार चक्के वाली गाड़ी को कौन कहे ?वह गरीबी में जन्मे थे और गरीबी में ही दुनिया से चले गए। फक्कड़ जिंदगी थी उनकी और फक्कड़पन में ही चली गई। वे सादगी के साक्षात देवता थे ।52 साल की सियासी जिंदगी में 36 साल सत्ता में रहने पर भी उनकी गरीबी दूर नहीं हुई ।1988 में मरने के बाद उनके गांव पितौजिया (समस्तीपुर) में श्राद्ध -कार्य हुआ ,जहाँ उनके पिता स्व.गोकुल ठाकुर के द्वारा बनवाया हुआ भीत का टूटा फूटा घर था। श्राद्ध -कार्य में शरीक होने आए हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय देवीलाल जी घर देखकर भौचक हो गए। कर्पूरी जी के शरीर पर कभी कीमती अथवा सुंदर कपड़ा नहीं दिखा। हमेशा उनके शरीर पर साधारण कपड़ा मजदूर जैसा रहता था ,वह भी बिना "कलफ" के। जाड़े के लिए एक जलसा जूता था ,जिसे चिप्पी लगाकर दो -3 साल वे पहन लेते थे।जाड़े में सदरी की हालत भी वैसी ही होती थी ।जिसे 10 -12 साल तक चिप्पी लगाकर उसे पहना करते थे जो बिलकुल ढीला-ढाला रहता था। क्या तपस्वी व फकीरी जिंदगी थी उनकी ? नई पीढ़ी को सहसा विश्वास न होगा कि कर्पूरी ठाकुर नामक एक शख्स ऐसी फटेहाली की जिंदगी जीता रहा? कुल मिलाकर कर्पूरी जी ने पूरी जिंदगी वेदना में ही गुजार दी।दूर-दूर तक वैभव से तनिक भी संबंध नहीं बनाया।ऐसे थे जननायक कर्पूरी ठाकुर ।ऐसी थी उनकी फटेहाल जिंदगी । अगर हम उनकी फकीरी- सादगी से कुछ सीख पाए ,जी सके, तब ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उनके जन्मदिन पर उन्हें हमारा नमन !बहुत-बहुत श्रद्धांजलि!!( खंड -1) मौके पर ईश्वर सिंह, प्रेम चन्द्र सिंह ,उदयभान तिवारी ,आचार्य सत्येंद्र कुमार मिश्र ,मंटू सिंह, सुनील सिंह ,ब्रजेश सिंह तथा सुमन सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

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