सरिसवा नदी के दूषित जल से प्रभावित हो रहे हैं रामगढ़वा प्रखंड क्षेत्र के लोग
*जीवनदायिनी सरिसवा नदी की पीड़ा जुड़ी पतितपावनी गंगा की पीड़ा के साथ*
*सरिसवा नदी के दूषित जल से प्रभावित हो रहे हैं रामगढ़वा प्रखंड क्षेत्र के लोग*
*सरिसवा नदी के जल को प्रदूषण मुक्त बनाने हेतु गोलबंद होने लगे रामगढ़वा प्रखंड क्षेत्र के लोग*
चंपारण टुडे से डी.एन.कुशवाहा की रिपोर्ट-
रामगढ़वा-भारत नेपाल सीमा के रक्सौल व रामगढ़वा से गुजरने वाली सरिसवा नदी के प्रदूषित जल से रक्सौल तथा रामगढ़वा प्रखंड क्षेत्र के बैरिया , जोगवलिया , डुमरी , खुगुनी, सेखौना, चंपापुर , मुसहरी तथा इनरवा आदि दर्जनों गांव के लोग काफी प्रभावित हैं । उस नदी में पैर रखते ही खुजली शुरू हो जाती है । सबसे ज्यादा कष्ट तो छठ पर्व के अवसर पर होता है जब महिलाएं नदी के पानी में खड़ा होकर सूर्य भगवान को अरक देती हैं । वहां से आने के बाद बिना दवा का उनके पैर का खुजली ठीक नहीं होता है । गौरतलब है कि यह वहीं सरिसवा नदी है जिसके पानी से असाध्य बीमारी भी ठीक हो जाती थी,क्योंकि जंगल-झाड़ी होती हुई व तरह-तरह की जड़ी बूटियों को क्रॉस करके उक्त नदी का पानी इस क्षेत्र में प्रवेश करता था, जो जीवनदायिनी था । लेकिन आज वहीं पानी प्रदूषित होकर आमलोगों के जीवन का दुश्मन बन गया है। उक्त नदी अपनी बदहाली पर आँसू इसलिए बहा रहा है कि नेपाल के अनेकों कल कारखाने तथा चमड़ा उद्योग के प्रदूषित जल को उक्त नदी में छोड़ दिया जाता है जिसकी वजह से पूरे नदी का जल प्रदूषित होकर जमाने से बह रहा है। हालांकि उक्त नदी के प्रदूषित जल से मुक्ति दिलाने हेतु तथा कल-कारखानों के जल को उक्त नदी में छोड़ने पर प्रतिबंध लगाने हेतु रक्सौल के डॉ.स्वयंभू शलभ , डॉ. अनिल कुमार सिन्हा तथा दर्जनों स्थानीय लोग वर्षों से लड़ाई लड़ते आ रहे हैं । बावजूद इसके न प्रदूषित जल का उस नदी में छोड़ना बंद हुआ और नहीं क्षेत्र के लोगों को उक्त नदी का स्वच्छ जल नसीब हुआ ।इधर मिली जानकारी के अनुसार इस मामले को केंद्र सरकार ने नए सिरे से जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय के साथ जोड़ दिया है।और जीवनदायिनी सरिसवा नदी की पीड़ा अब पतितपावनी गंगा नदी की पीड़ा के साथ जुड़ गई है।साथ ही पीएमओ ने इस मामले में संयुक्त सचिव, केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, नई दिल्ली एवं मुख्य सचिव, बिहार सरकार को आगे की कार्रवाई के लिए निर्देशित किया है।
यह कदम पर्यावरणविद् डा. स्वयंभू शलभ द्वारा इस मामले में दर्ज की गई एडिशनल अपील पर संज्ञान लेते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा उठाया गया है।
यह जानकारी पीएमओ ने मेल के जरिये दी ।इस अपील में बताया गया था कि सरिसवा नदी का बढ़ता प्रदूषण बंगरी, सिकरहना आदि नदियों के रास्ते गंगा तक पहुंच कर केंद्र की 'नमामि गंगे' योजना को प्रभावित कर रहा है।
दशकों से काले पानी का दंश झेल रहे इस सीमाई क्षेत्र के लोगों को इस संकट से मुक्ति दिलाने और कभी जीवनदायिनी कहलाने वाली इस नदी के जीवन को बचाने के लिए ठोस कदम उठाये जाने की मांग की गई थी।
विदित है कि हाल ही में माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने भी इस मामले में पर्यावरण एवं वन विभाग, बिहार को पत्र दिया था।
विदित हो कि उक्त नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के अभियान में अब रक्सौल की जनता के साथ रामगढ़वा के लोग भी कदम से कदम मिलाकर चलने को तैयार हो गए हैं । इस बाबत रामगढ़वा के पूर्व मुखिया सह सचिव कांग्रेस जिला कमेटी पूर्वी चंपारण के बाल किशोर प्रसाद, सामाजिक कार्यकर्ता ब्रजेश गुप्ता, मुखिया चंद्रिका प्रसाद ,मंगलपुर पटनी के मुखिया मुन्ना सिंह उर्फ मनजीत कुमार सिंह ,पैक्स अध्यक्ष गुड्डू सिंह , आचार्य मुकेश पांडे, डुमरी गांव निवासी विनोद कुमार सिंह तथा शिक्षक उमेश यादव सहित दर्जनों लोगों ने कहा है कि यदि भारत और नेपाल सरकार के द्वारा अभिलंब उक्त प्रदूषित जल का स्थायी निदान नहीं निकाला गया तो रामगढ़वा प्रखंड क्षेत्र के लोग भी इसके विरोध में आंदोलन करने के लिए विवश होंगे।
*सरिसवा नदी के दूषित जल से प्रभावित हो रहे हैं रामगढ़वा प्रखंड क्षेत्र के लोग*
*सरिसवा नदी के जल को प्रदूषण मुक्त बनाने हेतु गोलबंद होने लगे रामगढ़वा प्रखंड क्षेत्र के लोग*
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| कभी जीवनदायिनी रही सरिसवा नदी में प्रवाहित हो रहे प्रदूषित जल का तस्वीर |
रामगढ़वा-भारत नेपाल सीमा के रक्सौल व रामगढ़वा से गुजरने वाली सरिसवा नदी के प्रदूषित जल से रक्सौल तथा रामगढ़वा प्रखंड क्षेत्र के बैरिया , जोगवलिया , डुमरी , खुगुनी, सेखौना, चंपापुर , मुसहरी तथा इनरवा आदि दर्जनों गांव के लोग काफी प्रभावित हैं । उस नदी में पैर रखते ही खुजली शुरू हो जाती है । सबसे ज्यादा कष्ट तो छठ पर्व के अवसर पर होता है जब महिलाएं नदी के पानी में खड़ा होकर सूर्य भगवान को अरक देती हैं । वहां से आने के बाद बिना दवा का उनके पैर का खुजली ठीक नहीं होता है । गौरतलब है कि यह वहीं सरिसवा नदी है जिसके पानी से असाध्य बीमारी भी ठीक हो जाती थी,क्योंकि जंगल-झाड़ी होती हुई व तरह-तरह की जड़ी बूटियों को क्रॉस करके उक्त नदी का पानी इस क्षेत्र में प्रवेश करता था, जो जीवनदायिनी था । लेकिन आज वहीं पानी प्रदूषित होकर आमलोगों के जीवन का दुश्मन बन गया है। उक्त नदी अपनी बदहाली पर आँसू इसलिए बहा रहा है कि नेपाल के अनेकों कल कारखाने तथा चमड़ा उद्योग के प्रदूषित जल को उक्त नदी में छोड़ दिया जाता है जिसकी वजह से पूरे नदी का जल प्रदूषित होकर जमाने से बह रहा है। हालांकि उक्त नदी के प्रदूषित जल से मुक्ति दिलाने हेतु तथा कल-कारखानों के जल को उक्त नदी में छोड़ने पर प्रतिबंध लगाने हेतु रक्सौल के डॉ.स्वयंभू शलभ , डॉ. अनिल कुमार सिन्हा तथा दर्जनों स्थानीय लोग वर्षों से लड़ाई लड़ते आ रहे हैं । बावजूद इसके न प्रदूषित जल का उस नदी में छोड़ना बंद हुआ और नहीं क्षेत्र के लोगों को उक्त नदी का स्वच्छ जल नसीब हुआ ।इधर मिली जानकारी के अनुसार इस मामले को केंद्र सरकार ने नए सिरे से जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय के साथ जोड़ दिया है।और जीवनदायिनी सरिसवा नदी की पीड़ा अब पतितपावनी गंगा नदी की पीड़ा के साथ जुड़ गई है।साथ ही पीएमओ ने इस मामले में संयुक्त सचिव, केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, नई दिल्ली एवं मुख्य सचिव, बिहार सरकार को आगे की कार्रवाई के लिए निर्देशित किया है।
यह कदम पर्यावरणविद् डा. स्वयंभू शलभ द्वारा इस मामले में दर्ज की गई एडिशनल अपील पर संज्ञान लेते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा उठाया गया है।
यह जानकारी पीएमओ ने मेल के जरिये दी ।इस अपील में बताया गया था कि सरिसवा नदी का बढ़ता प्रदूषण बंगरी, सिकरहना आदि नदियों के रास्ते गंगा तक पहुंच कर केंद्र की 'नमामि गंगे' योजना को प्रभावित कर रहा है।
दशकों से काले पानी का दंश झेल रहे इस सीमाई क्षेत्र के लोगों को इस संकट से मुक्ति दिलाने और कभी जीवनदायिनी कहलाने वाली इस नदी के जीवन को बचाने के लिए ठोस कदम उठाये जाने की मांग की गई थी।
विदित है कि हाल ही में माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने भी इस मामले में पर्यावरण एवं वन विभाग, बिहार को पत्र दिया था।
विदित हो कि उक्त नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के अभियान में अब रक्सौल की जनता के साथ रामगढ़वा के लोग भी कदम से कदम मिलाकर चलने को तैयार हो गए हैं । इस बाबत रामगढ़वा के पूर्व मुखिया सह सचिव कांग्रेस जिला कमेटी पूर्वी चंपारण के बाल किशोर प्रसाद, सामाजिक कार्यकर्ता ब्रजेश गुप्ता, मुखिया चंद्रिका प्रसाद ,मंगलपुर पटनी के मुखिया मुन्ना सिंह उर्फ मनजीत कुमार सिंह ,पैक्स अध्यक्ष गुड्डू सिंह , आचार्य मुकेश पांडे, डुमरी गांव निवासी विनोद कुमार सिंह तथा शिक्षक उमेश यादव सहित दर्जनों लोगों ने कहा है कि यदि भारत और नेपाल सरकार के द्वारा अभिलंब उक्त प्रदूषित जल का स्थायी निदान नहीं निकाला गया तो रामगढ़वा प्रखंड क्षेत्र के लोग भी इसके विरोध में आंदोलन करने के लिए विवश होंगे।

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