क्लिंकर को रक्सौल से स्थानांतरित कर रामगढ़वा में उतारने का सरकार का निर्णय सीधे मानवाधिकार का उल्लंघन है:- डा. स्वयंभू शलभ
क्लिंकर को रक्सौल से स्थानांतरित कर रामगढ़वा में उतारने का सरकार का निर्णय सीधे मानवाधिकार का उल्लंघन है:- डा. स्वयंभू शलभ
डी.एन.कुशवाहा रामगढ़वा
रामगढ़वा-रेल विभाग द्वारा मौत के मसाला रूपी क्लिंकर को रक्सौल से स्थानांतरित कर रामगढ़वा में उतारने का निर्णय सीधे मानवाधिकार का उल्लंघन है। उक्त बातें डॉ. प्रोफेसर स्वयंभू शलभ ने मानवाधिकार दिवस 10 दिसंबर को रामगढ़वा के दैनिक भास्कर सह चंपारण टुडे संवाददाता डी.एन.कुशवाहा एवं रामगढ़वा के गणमान्य लोगों को संबोधित करते हुए रविवार को कही। उन्होंने कहां की नेपाल के कतिपय व्यवसाइयों के हित की रक्षा के लिए रक्सौल के हजारों लोगों के जीवन का परवाह किए बगैर सरकार के द्वारा वर्षों से रक्सौल टुमरिया टोला गांव के समीप अवस्थी माल गोदाम पर क्लिंकर उतारा जा रहा है। जिसकी वजह से रक्सौल माल गोदाम के अगल- बगल में जीवन बसर करने वाले हजारों लोग श्वांस रोग से पीड़ित होकर तड़प रहे हैं। जो विगत दिनों हुई मेडिकल जांच में प्रमाणित भी हो चुका है। रक्सौल स्टेशन पर क्लिंकर की उतराई बंद कर मालगाड़ी को सीधे सिर्सिया (नेपाल) भेजे जाने के मामले में शिक्षाविद् डा. स्वयंभू शलभ द्वारा एक एडिशनल अपील पीएमओ में दाखिल किया गया, जिसे पीएमओ के अवर लोक सचिव श्री अंबुज शर्मा ने
रजिस्टर किया।
इस अपील में किसी भी बुकिंग प्वाइंट से क्लिंकर की बुकिंग रक्सौल के लिए बंद कर सीधे सिर्सिया (नेपाल) के लिए बुकिंग ओपन किये जाने की मांग की गई है।विदित है कि इस मामले में 2012 से निरंतर प्रयासरत डा. शलभ द्वारा दर्ज परिवाद सं PMOPG/E/2016/0367008 के आलोक में रेल मंत्रालय द्वारा रक्सौल में क्लिंकर उतराई मामले का निष्पादन कर दिया गया था। गत 13 अक्टूबर 2016 को पीएमओ ने इस मामले में लेटर ऑफ डिस्पोजल जारी करते हुए लिखा -'श्री स्वयंभू शलभ के द्वारा दिए गए परिवाद की समीक्षा की गई। आपके द्वारा इंटरनेट के माध्यम से परिवाद कर रेल प्रशासन के संज्ञान में लाने के लिए धन्यवाद। आपके द्वारा अंकित परिवाद के सम्बन्ध में सूचित करना है कि क्लिंकर की उतराई रामगढ़वा स्टेशन पर स्थानांतरित किये जाने की प्रक्रिया अपनाई गई है। यह नया गुड्स शेड है। इसके लिए निविदा निकाली गई है।फाइनलाइजेशन प्रक्रियाधीन है।'इस संबंध में मंडल रेल प्रबंधक (वाणिज्य), समस्तीपुर के पत्र को संलग्न करते हुए इसे डीआरएम समस्तीपुर को अग्रसारित किया गया। इसकी प्रतिलिपि सहायक उप महाप्रबंधक, हाजीपुर को भेजी गई। डा. शलभ के इन प्रयासों का लक्ष्य नेपाल के सीमेंट उद्योगों के लिए उपयोग में आने वाले इस डस्ट मेटेरियल को सीधे सिर्सिया (नेपाल) भिजवाने का था जो खुला क्षेत्र है लेकिन रेलवे ने इसे रक्सौल के निकटवर्ती रामगढ़वा में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया जहां स्टेशन के समीप ही श्री गणेश महावीर +2 उच्च माध्यमिक विद्यालय स्थित है जिसमें करीब दो हजार बच्चे पढ़ते हैं। उसी के बगल में एम.के.मिशन हाई स्कूल है, जिसमें करीब 500 बच्चे पढ़ते हैं।
इसके लिए शेड निर्माण की निविदा निकाली गई और अब निर्माण कार्य पूरा होनेवाला है।
स्वाभाविक है कि रामगढ़वा में स्थानांतरित होने के बाद वहां भी स्टेशन के आसपास का इलाका इसके प्रदूषण से प्रभावित होगा और जनजीवन संकट में पड़ेगा।
इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि मालगाड़ी से आये क्लिंकर को रक्सौल मालगोदाम पर उतारकर उसे ट्रक से नेपाल ले जाया जाता है। इससे यह स्पष्ट है कि यह मेटेरियल नेपाल में प्रतिबंधित नहीं है। फिर उसी मेटेरियल को उसी मालगाड़ी से सीधे नेपाल भेजे जाने में प्रतिबंध का क्या औचित्य है जबकि सिर्सिया (नेपाल) तक रेल लाइन चालू है और इस लाइन पर मालगाड़ियों का बाकायदा परिचालन हो रहा है।
सरकार द्वारा इस मामले की जमीनी सच्चाई को भी संज्ञान में लिए जाने की मांग की गई है।
क्लिंकर के कारण वर्षों से रक्सौल के लोगों का जीना दुश्वार बना हुआ है। इसका बढ़ता प्रदूषण पूरे शहर को अपनी गिरफ्त में ले चुका है। इसके जहरीले धूलकण की वजह से सैकड़ों लोग सांस और फेफड़ों की बीमारी का शिकार हो चुके हैं। दर्जनों जानें जा चुकी हैं। इस मुद्दे को लेकर यहां आमरण अनशन तक हो चुका है।इसे मानवाधिकार उल्लंघन से जोड़ते हुए इस संवेदनशील मामले में केंद्र सरकार एवं रेल मंत्रालय द्वारा त्वरित कार्रवाई किये जाने की मांग की गई है। वहीं रामगढ़वा के बुद्धिजीवियों एवं उक्त दोनों विद्यालय परिवार के शिक्षकों ने सरकार को चेतावनी दिया है कि यदि रामगढ़वा में यदि क्लिंकर उतारा गया तो हमलोग अपने विद्यार्थियों के साथ आमरण अनशन पर बैठेंगे।
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| रामगढ़वा का निर्माणाधीन रेल ट्रैक जहां क्लिंकर उतारने की योजना है |
रामगढ़वा-रेल विभाग द्वारा मौत के मसाला रूपी क्लिंकर को रक्सौल से स्थानांतरित कर रामगढ़वा में उतारने का निर्णय सीधे मानवाधिकार का उल्लंघन है। उक्त बातें डॉ. प्रोफेसर स्वयंभू शलभ ने मानवाधिकार दिवस 10 दिसंबर को रामगढ़वा के दैनिक भास्कर सह चंपारण टुडे संवाददाता डी.एन.कुशवाहा एवं रामगढ़वा के गणमान्य लोगों को संबोधित करते हुए रविवार को कही। उन्होंने कहां की नेपाल के कतिपय व्यवसाइयों के हित की रक्षा के लिए रक्सौल के हजारों लोगों के जीवन का परवाह किए बगैर सरकार के द्वारा वर्षों से रक्सौल टुमरिया टोला गांव के समीप अवस्थी माल गोदाम पर क्लिंकर उतारा जा रहा है। जिसकी वजह से रक्सौल माल गोदाम के अगल- बगल में जीवन बसर करने वाले हजारों लोग श्वांस रोग से पीड़ित होकर तड़प रहे हैं। जो विगत दिनों हुई मेडिकल जांच में प्रमाणित भी हो चुका है। रक्सौल स्टेशन पर क्लिंकर की उतराई बंद कर मालगाड़ी को सीधे सिर्सिया (नेपाल) भेजे जाने के मामले में शिक्षाविद् डा. स्वयंभू शलभ द्वारा एक एडिशनल अपील पीएमओ में दाखिल किया गया, जिसे पीएमओ के अवर लोक सचिव श्री अंबुज शर्मा ने
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| यह है समस्तीपुर रेल प्रबंधक का पत्र है जिसमें उक्त क्लिंकर को रक्सौल से स्थानांतरित कर रामगढ़वा में उतारने की योजना है |
इस अपील में किसी भी बुकिंग प्वाइंट से क्लिंकर की बुकिंग रक्सौल के लिए बंद कर सीधे सिर्सिया (नेपाल) के लिए बुकिंग ओपन किये जाने की मांग की गई है।विदित है कि इस मामले में 2012 से निरंतर प्रयासरत डा. शलभ द्वारा दर्ज परिवाद सं PMOPG/E/2016/0367008 के आलोक में रेल मंत्रालय द्वारा रक्सौल में क्लिंकर उतराई मामले का निष्पादन कर दिया गया था। गत 13 अक्टूबर 2016 को पीएमओ ने इस मामले में लेटर ऑफ डिस्पोजल जारी करते हुए लिखा -'श्री स्वयंभू शलभ के द्वारा दिए गए परिवाद की समीक्षा की गई। आपके द्वारा इंटरनेट के माध्यम से परिवाद कर रेल प्रशासन के संज्ञान में लाने के लिए धन्यवाद। आपके द्वारा अंकित परिवाद के सम्बन्ध में सूचित करना है कि क्लिंकर की उतराई रामगढ़वा स्टेशन पर स्थानांतरित किये जाने की प्रक्रिया अपनाई गई है। यह नया गुड्स शेड है। इसके लिए निविदा निकाली गई है।फाइनलाइजेशन प्रक्रियाधीन है।'इस संबंध में मंडल रेल प्रबंधक (वाणिज्य), समस्तीपुर के पत्र को संलग्न करते हुए इसे डीआरएम समस्तीपुर को अग्रसारित किया गया। इसकी प्रतिलिपि सहायक उप महाप्रबंधक, हाजीपुर को भेजी गई। डा. शलभ के इन प्रयासों का लक्ष्य नेपाल के सीमेंट उद्योगों के लिए उपयोग में आने वाले इस डस्ट मेटेरियल को सीधे सिर्सिया (नेपाल) भिजवाने का था जो खुला क्षेत्र है लेकिन रेलवे ने इसे रक्सौल के निकटवर्ती रामगढ़वा में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया जहां स्टेशन के समीप ही श्री गणेश महावीर +2 उच्च माध्यमिक विद्यालय स्थित है जिसमें करीब दो हजार बच्चे पढ़ते हैं। उसी के बगल में एम.के.मिशन हाई स्कूल है, जिसमें करीब 500 बच्चे पढ़ते हैं।
इसके लिए शेड निर्माण की निविदा निकाली गई और अब निर्माण कार्य पूरा होनेवाला है।
स्वाभाविक है कि रामगढ़वा में स्थानांतरित होने के बाद वहां भी स्टेशन के आसपास का इलाका इसके प्रदूषण से प्रभावित होगा और जनजीवन संकट में पड़ेगा।
इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि मालगाड़ी से आये क्लिंकर को रक्सौल मालगोदाम पर उतारकर उसे ट्रक से नेपाल ले जाया जाता है। इससे यह स्पष्ट है कि यह मेटेरियल नेपाल में प्रतिबंधित नहीं है। फिर उसी मेटेरियल को उसी मालगाड़ी से सीधे नेपाल भेजे जाने में प्रतिबंध का क्या औचित्य है जबकि सिर्सिया (नेपाल) तक रेल लाइन चालू है और इस लाइन पर मालगाड़ियों का बाकायदा परिचालन हो रहा है।
सरकार द्वारा इस मामले की जमीनी सच्चाई को भी संज्ञान में लिए जाने की मांग की गई है।
क्लिंकर के कारण वर्षों से रक्सौल के लोगों का जीना दुश्वार बना हुआ है। इसका बढ़ता प्रदूषण पूरे शहर को अपनी गिरफ्त में ले चुका है। इसके जहरीले धूलकण की वजह से सैकड़ों लोग सांस और फेफड़ों की बीमारी का शिकार हो चुके हैं। दर्जनों जानें जा चुकी हैं। इस मुद्दे को लेकर यहां आमरण अनशन तक हो चुका है।इसे मानवाधिकार उल्लंघन से जोड़ते हुए इस संवेदनशील मामले में केंद्र सरकार एवं रेल मंत्रालय द्वारा त्वरित कार्रवाई किये जाने की मांग की गई है। वहीं रामगढ़वा के बुद्धिजीवियों एवं उक्त दोनों विद्यालय परिवार के शिक्षकों ने सरकार को चेतावनी दिया है कि यदि रामगढ़वा में यदि क्लिंकर उतारा गया तो हमलोग अपने विद्यार्थियों के साथ आमरण अनशन पर बैठेंगे।


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