मानव योनि में जन्म लेने के बाद मिलने वाले प्रत्येक अधिकार को मानवाधिकार करते हैं:-पूर्व मुखिया बालकिशोर प्रसाद
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| मौके पर उपस्थित एम.के.मिशन हाई स्कूल रामगढ़वा के शिक्षक एवं बच्चे |
डी.एन.कुशवाहा, रामगढ़वा
रामगढ़वा-मानव अधिकार दिवस पर अगर हम मानव अधिकारों की श्रेणी की बात करें तो- मनुष्य योनि में जन्म लेने के साथ मिलने वाला प्रत्येक अधिकार ‘मानवाधिकार’ का श्रेणी में आता है। उक्त बातें कांग्रेस महासचिव पूर्वी चंपारण सह रामगढ़वा के पूर्व मुखिया बाल किशोर प्रसाद ने रामगढ़वा के एक निजी विद्यालय के बच्चों को संबोधित करते हुए 10 दिसंबर को मनाए जाने वाले मानवाधिकार दिवस की पूर्व संध्या के अवसर पर शनिवार को कही। साथ ही उन्होंने कहा की संविधान में बनाये गये अधिकारों
से कहीं बढ़कर महत्व ‘मानवाधिकारों’का माना जा सकता है। कारण यह कि ये ऐसे अधिकार है जो सीधे सीधे प्रकृति से संबंध रखते है। मसलन जीने का अधिकार, कोई कानून सम्मत अधिकार नहीं, वरन समाज के हर वर्ग को प्रकृति द्वारा समान रूप से प्रदान किया गया है। दूसरे रूप में हम यह भी कह सकते है कि प्रकृति के अलावा मनुष्यों द्वारा बनाये गये विधि सम्मत कानून का भी यही कर्तव्य है कि वह
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| स्कूल में बच्चों को संबोधित करते हुए कांग्रेस महासचिव पूर्वी चंपारण सह रामगढ़वा के पूर्व मुखिया बाल किशोर प्रसाद |
‘मानवाधिकारों’की रक्षा करें। हम यह देख रहे है कि हमारे इसी मानवीय समाज में ‘मानवाधिकारों’ का भय आम लोगों पर विशेष रूप से दिखाई नहीं पड़ रही है। प्रत्यक्ष उदाहरण के तौर पर हम आये दिन होने वाले महिला प्रताड़ना मामलों को ले सकते है। हमारे सांस्कृतिक सभ्यता वाले महान देश में प्रतिदिन हजारों कन्या भ्रूण हत्या की घटनाएं हमारी संस्कृति को तार-तार कर रही है। इतना ही नहीं इस मानवीय समाज को रचने वाली नारियां भी लाखों की संख्या में दहेज की बलिवेदी पर चढ़ायी जा रही है। महिलाओं के यौन शोषण मामलों में वृद्धि के साथ ही साथ कम उम्र की बालिकाओं को समय से पूर्व अवैध मातृत्व के कारण आत्महत्या के लिए विवश होना पड़ रहा है। इतना कुछ होने के बाद भी हम ‘मानवाधिकार’ कानून की दुहाई देते नहीं थक रहे है। सच्चाई यह है की धरातल पर खड़े हम ऐसे ही अपराधों पर नियंत्रण के लिए ‘मानवाधिकार’ के रक्षकों से केवल गुहार ही लगा पा रहे है।
10 दिसंबर सन् 1948 को संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा द्वारा अस्तित्व में लाये गये ‘मानवाधिकार’ ने अब तक 70 वर्ष की यात्रा पूरी कर ली है। इन अधिकारों के जन्म लेने के साथ ही
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| मौके पर उपस्थित एम.के.मिशन हाई स्कूल रामगढ़वा के शिक्षक एवं बच्चे |
इसमें शामिल सदस्यों का यह कर्तव्य बन गया है कि वे‘मानवाधिकारों’ का संरक्षण और उनकी देखभाल करें। वास्तव में देखा जाये तो मानवीय जीवन और अधिकार की रक्षा उस देश के ‘मानवाधिकार’ कानूनों के लिए गौरवान्वित करने वाली बात होती है। वर्तमान में हमारे देश में ‘मानवाधिकारों’ की स्थिति वास्तव में जटिलता में देखी जा रही है। ‘मानवाधिकारों’की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसका हनन राजनैतिक कारणों के अतिरिक्त धार्मिक मुद्दों पर भी किया जा रहा है। धर्म एक ऐसा मार्ग है जो प्रत्येक जाति वर्ग को प्रेम और स्नेह से रहना सिखाता है। आज उसी धर्म के नाम पर कट्टरता का प्रचार प्रसार करते हुए हिंसा के कारण लोग बेवजह मारे जा रहे है। ‘मानवाधिकारों’ से भारतवर्ष का नाता बहुत पुराना है। हम‘वसुधैव कुटुम्बकम’ को अपना सूत्र वाक्य मानते है। संपूर्ण विश्व में भारतवर्ष ही एक ऐसा देश है जिसने दुनिया को ‘जीयो और जीने दो’ का आदर्श वाक्य देते हुए आपसी प्रेम स्नेह का संचार करने में बड़ी भूमिका का निर्वहन किया है।
अंत में उन्होंने कहा कि‘मानवाधिकार’ और वर्तमान में उनकी दशा पर इतनी व्यापक चर्चा किये जाने के बाद भी यह विषय अधूरा ही रह गया है। सूखा,बाढ़, गरीबी, अकाल, सुनामी, भूकंप, युद्ध या दुर्घटनाओं के चलते जो लोग शिकार हो रहे है, पीड़ित या परेशान चल रहे हैं उनके ‘मानवाधिकारों’ का ध्यान रखा जाना अपेक्षित जान पड़ रहा है। इन सारे मामलों में कानून को भी सक्रिय भूमिका का निर्वहन करना होगा।मौके पर उक्त विद्यालय के निदेशक ध्रुव नारायण कुशवाहा, शिक्षक उमा शंकर प्रसाद ,ओम प्रकाश साह, अवनिश चौबे, विश्व केतु सिंह ,विजय श्रीवास्तव, विशाल क्षेत्री,प्रतीक्षा क्षेत्री,चंदा गुप्ता ,रितिका कुमारी ,दीपा वर्मा, मनीषा कुमारी, अरमान राज विनोद कुमार सिंह सहित सभी शिक्षक,शिक्षिका तथा विद्यालय के बच्चे उपस्थित थे।
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