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घोड़ासहन:चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह के अवसर पर भेलवा कोठी में दो दिवसीय समारोह का हुआ आगाज

चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह के अवसर पर भेलवा कोठी में दो दिवसीय समारोह का हुआ आगाज
दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन करते कुमार प्रशांत, अन्ना मलाई,ब्रजकिशोर सिंह व अन्य
चम्पारण टुडे घोड़ासहन से राहुल कुमार
घोड़ासहन:चम्पारण शताब्दी समारोह के अवसर पर गांधी ग्राम सेवा समिति के तत्वाधान में भेलवा कोठी में दो दिवसीय समारोह का आयोजन किया गया.स्थानीय गांधी उच्च विद्यालय परिसर में आयोजित के पहले दिन नील का दर्द और चम्पारण सत्याग्रह विषयक गोष्ठी का उद्घाटन राष्ट्रीय गांधी शांति प्रतिष्ठान नई दिल्ली के अध्यक्ष कुमार प्रशांत व राष्ट्रीय
समारोह को संबोधित करते पूर्व मंत्री ब्रजकिशोर सिंह
गांधी संग्रहालय नई दिल्ली के निदेशक अन्ना मलाई ने दीप जला कर किया.संबोधित करते गांधी संग्रहालय मोतिहारी के सचिव ब्रजकिशोर सिंह ने कहा कि निल कोई पौधा नही बल्कि अंग्रेजों के द्वारा भारतीयों के शोषण का प्रतीक है. गांधी विचारक अमरेन्द्र कुमार सिंह ने नील का दर्द पर प्रकाश डालते कहा कि अंग्रेजों ने प्रति बीघा तीन व पांच कट्ठा नील की जबरन खेती करने के लिए चम्पारण के किसानों को मजबूर किया.नील की खेती के बाद खेत अक्सर बंजर हो
समारोह में अंग्रेजों द्वारा की गई अत्याचार की कहानी सुनाते स्वतंत्रता सेनानी युगल किशोर सिंह
जाते थे.रामपुकार सिन्हा ने कहा कि यदि राजनेताओं को वास्तव में गांधी में आस्था है तो उन्हें अपना चरित्र व चिंतन बदलना होगा.जिस चम्पारण ने नील का दर्द झेला है वहां के कृषि को भी उन्नत किये जाने की जरूरत है.जिले के एकमात्र जीवित बचे स्वतंत्रता सेनानी हरसिद्धि के पूर्व विधायक युगल किशोर सिंह ने नीलहे अंग्रेजों द्वारा चम्पारण के किसानों पर ढाये गए जुल्म व गांधी के आगमन का लम्बा वर्णन
समारोह में उपस्थित लोगों की भीड़
किया.आलोक कुमार ने आश्चर्य व्यक्त किया कि गांधी से जुड़े महत्वपूर्ण स्थल भेलवा कोठी को पहचान पाने में सौ साल लग गए.इज़के पूर्व आगत अतिथियों व स्वतंत्रता सेनानियों के उत्तराधिकारियो को अंगवस्त्र देकर समान्नित किया गया.समारोह की अध्यक्षता अवकाश प्राप्त प्राचार्य प्रो.मुरलीधर उपाध्याय ने की तथा मंच संचालन आरडीएस कॉलेज मुजफ्फरपुर के सेवानिवृत्त डॉ के.के.झा ने की.
समारोह को संबोधित करते कुमार प्रशांत
गांधी की ऊंचाई को मापा नही जा सकता :- कुमार प्रशांत
घोड़ासहन:गांधी की कहानी 1917 से नही बल्कि तब शुरू हुई थी जब युवा बैरिस्टर के रूप में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका की धरती पर कदम रखा था.गांधी की ऊंचाई को मापा नही जा सकता .राष्ट्रीय गांधी प्रतिष्ठान के अध्यक्ष कुमार प्रशांत ने भेलवा कोठी में शनिवार को आयोजित समारोह को सम्बोधित करते उक्त विचार व्यक्त किये.उन्होंने कहा कि गांधी दक्षिण अफ्रीका में तो नौकर की प्रत्यशा में गये थे.लेकिन इस पुर्णतः बेगाने देश मे हुई एक घटना ने युवा गांधी को बैरिस्टर से
समारोह को संबोधित करते अन्ना मलाई
महात्मा गांधी बना दिया.1906 में गांधी जी ने फौज में भर्ती होकर युद्ध के दौरान घायल फौजियों की सेवा की.तब से 1948 तक वे मानव मात्र की प्रतिष्ठा के लिये संघर्ष करते रहे.श्री कुमार ने कहा कि गांधी ने भारत मे नागरिकों के लिए एक अलग भूमिका की कल्पना की थी.उन्होंने ने कहा कि देश आज एक खतरनाक मोड़ पर खड़ा है.देश को गांधी से अलग ले जाने की कोशिश ने हमे ऐसे दोराहे पर खड़ा कर दिया है जिसके आगे कुछ नही सूझ रहा है.उन्होंने ने कहा कि दुनिया को यदि बचना हो तो गांधी की राह पकड़नी होगी.वर्तमान में
कुमार प्रशांत को समान्नित करते प्रो.प्रेमचंद्र प्रसाद
इस राह को दिखाने का काम चम्पारण को ही करना होगा.
समारोह को सम्बोधित करते गांधी संग्रहालय नई दिल्ली के निदेशक अन्ना मलाई ने कहा कि वे चम्पारण में कुछ कहने नही बल्कि यहां से प्रेरणा लेने आये है.उन्होंने गांधी सत्याग्रह समारोह को राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित करने की भी बात कही.

छात्रों द्वारा प्रस्तुत एकांकी की तस्वीर
ज्ञान ज्योति विद्यालय के छात्रों द्वारा सात शहीदों की एकांकी रहा आकर्षक
घोड़ासहन:भेलवा में आयोजित चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह में घोड़ासहन के ज्ञान ज्योति विद्यालय के छात्र-छात्राओ के द्वारा प्रख्यात सात शहीदों की एकांकी के रूप में आकर्षक प्रस्तुति दी गयी.सात शहीदों के द्वारा अंग्रेजों के यूनियन जैक को उतारकर तिरंगा फहराने की कोशिश में अंग्रेजों की गोली खाकर शहीद होने वाले सेनानियों व अंततः तिरंगा फहराने में सफल होने की जीवंत प्रस्तुति समारोह में बैठे लोगों को एकबारगी स्तब्ध कर दिया समारोह में काफी देर तक सन्नाटा पसरा रहा.

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