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बनकटवा (पूर्वी चम्पारण) :- शहीदों के मजार पर नही जलते दिये

शहीदों के मजार पर नही जलते दिये.
जगिरहा गांव स्थित शाहिद स्मारक
चम्पारण टुडे बनकटवा से नीरज प्रभाकर 
बनकटवा (पूर्वी चम्पारण) :- शहीदों के मजार पर नही जलते दिये. जो भरा नही है भावो से बहती जिसमे रसधार नही
वह हृदय नही है पत्थर है जिसमे स्वदेश का प्यार नही.
पत्थर की मूरतों में समझा है तू खुदा हैं
खाक- ए-वतन का मेरा हर जर्रा देवता है.
उक्त पंक्तिया बनकटवा प्रखंड के बीजबनी दक्षिणी पंचायत अंतर्गत जगीरहा गाँव मे अरुणा नदी के पावन तट पर स्थित शहीद स्मारक पर पूरी तरह सटीक बैठती है जो रखरखाव के अभाव और उपेक्षा का दंश झेलकर पूरी तरह से जीर्ण शीर्ण व धवस्त हो चुका है जिसकी सुधि लेने वाला कोई नही है.
हम जिन देशभक्तो व स्वतंत्रता सेनानियों के कारण स्वतंत्रता की 70वा वसंत पार कर चुके है लेकिन आज सेनानियों को उनके ही देश मे बेगाना कर दिया गया है.
भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले  स्वतंत्रता सेनानी वासुदेव प्रसाद चम्पारनी के पुत्र सह ज्ञान ज्योति विद्यालय के निदेशक प्रेम चंद्र प्रसाद के साथ स्वतंत्रता सेनानी कमलेश्वर प्रसाद आर्य व कैलाश देवी आर्य के पुत्र सह अधिवक्ता विश्वप्रकाश आर्य उर्फ मनी जी ने बताया कि आंदोलन के वक़्त हाथों में तिरंगा थामे जाबांज सेनानी जब घोड़ासहन स्टेशन की ओर बढ़ रहे थे तभी रक्सौल की ओर से आने वाली गाड़ी से उतरने वाले अंग्रेज अफसर के आदेश पर फायरिंग सुरु कर दी गई. चारो ओर भगदड़ मच गई लोग जख्मी हो कर निचे गिरने लगे उस समय वासुदेव प्रसाद चम्पारनी, कमलेश्वर प्रसाद आर्य, उनकी पत्नी कैलाश देवी आर्य, मटुक सिंह, और डोमेन राम मौजूद थे. जिसमे श्री आर्य दंपति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. उक्त गोली कांड में पाँच जवान शाहिद हुए थे जिसमें लक्ष्मण दास साधू (रेगानीया मठ) बसंत राम(आजाद हिन्द फौज) लखन राम बसंतपुर राम भगत सिंह भंगहा व तुला राम शामिल थे. बसंत राम गोली लगने के बावजूद जीवित थे जिन्हें रेलवे पुल के नीचे हथौड़ा से मारा गया. इन पांचो के खुन पत्थरों पर गिर पड़े थे उन्हीं पत्थरों को सुरक्षित रख शाहिद स्मारक बनवाया गया.
यँहा बता दे की निर्माण के कुछ ही साल के बाद स्मारक पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका था. लेकिन स्वतंत्रता सेनानी वैज नाथ(यजु नाथ) प्रसाद ने इसका जीर्णोद्धार करा कर पांच पिण्ड बनवाये थे,और शहीदों के नाम अंकित करवाये थे.बाद में वहां पूजा अर्चना भी की जाने लगी.लेकिन अब पिण्ड भी पूरी तरह से टूट चुके हैं,और चबूतरा भी पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है.स्थानीय सांसद व विधायक के दावे अब तक जमीं पर नही उतर सके.भेलवा में आयोजित होने वाले  चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह  व भेलवा को  गाँधी सर्किट से जोड़ने की कवायद में शायद शहीदों के इस मजार पर भी दीया जलाने की एक छोटी सी कोशिश हो जाये.

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