महिलाओं को हज पर अकेले जाना सही नही :- मुफ्ती ज्याउल हक
महिलाओं को हज पर अकेले जाना सही नही :- मुफ्ती ज्याउल हक
चंपारण टुडे से डी.एन.कुशवाहा की रिपोर्ट-
रामगढ़वा-महिलाओं को हज पर अकेले जाना सही नही है। उक्त बातें जमीयत उलेमा ए हिन्द रक्सौल इकाई के सचिव व चाढ़वा गाँव निवासी शिक्षक मुफ्ती ज्याउल हक ने गुरुवार को रामगढ़वा मदरसा में कही। हज यात्रा पर जाने को लेकर जो नई हज नीति बनाई गई है। उस पर नाराजगी जताते हुए मुफ्ती ज्याउल हक काश्मी ने कहा कि महिलाओं को बिना महरम के हज करना गैर शरई फैसला है। इस फैसला को लेने से पहले उसके बारे में जानना जरूरी है। इस्लाम मे हज एक इबादत है। जो अल्लाह और रसूल के बताए हुए तरीके पर ही किया जाएगा। जिन लोगों ने ऐसी सिफारिश की है कि चालीस से ज्यादा साल की महिलाएं बगैर महरम के हज पर जा सकतीं हैं। वह हज जैसी पवित्र इबादत को टूर समझते हैं या उनको हज के बारे में कोई जानकारी नही है। मुसलमान सरकार के इस फैसले को कभी भी कबूल नही करेंगे। इस तरीके के फैसले बिल्कुल शरीयत में दखल है। जमीयत उलेमा ए हिन्द इसकी मुखालफत करती है। और सरकार इस बात का मुतालबा करती है कि इस तरह के फैसले जम्हूरी मुल्क के लिए सही नही है।
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| मुफ्ती ज्याउल हक |
रामगढ़वा-महिलाओं को हज पर अकेले जाना सही नही है। उक्त बातें जमीयत उलेमा ए हिन्द रक्सौल इकाई के सचिव व चाढ़वा गाँव निवासी शिक्षक मुफ्ती ज्याउल हक ने गुरुवार को रामगढ़वा मदरसा में कही। हज यात्रा पर जाने को लेकर जो नई हज नीति बनाई गई है। उस पर नाराजगी जताते हुए मुफ्ती ज्याउल हक काश्मी ने कहा कि महिलाओं को बिना महरम के हज करना गैर शरई फैसला है। इस फैसला को लेने से पहले उसके बारे में जानना जरूरी है। इस्लाम मे हज एक इबादत है। जो अल्लाह और रसूल के बताए हुए तरीके पर ही किया जाएगा। जिन लोगों ने ऐसी सिफारिश की है कि चालीस से ज्यादा साल की महिलाएं बगैर महरम के हज पर जा सकतीं हैं। वह हज जैसी पवित्र इबादत को टूर समझते हैं या उनको हज के बारे में कोई जानकारी नही है। मुसलमान सरकार के इस फैसले को कभी भी कबूल नही करेंगे। इस तरीके के फैसले बिल्कुल शरीयत में दखल है। जमीयत उलेमा ए हिन्द इसकी मुखालफत करती है। और सरकार इस बात का मुतालबा करती है कि इस तरह के फैसले जम्हूरी मुल्क के लिए सही नही है।

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