संस्कृत दिवस पर हुई विद्वत संगोष्ठी
संस्कृत दिवस पर हुई विद्वत संगोष्ठी
चंपारण टुडे से डी.एन.कुशवाहा की रिपोर्ट-
रामगढ़वा-सावन के पावन अवसर पर संस्कृत दिवस के 1 दिन पूर्व सतपिपरा भूमिहारी टोला गांव निवासी पूर्व डाकपाल भैरव चौबे के दरवाजे पर अनुमंडलीय विद्वत संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें सभी विद्वानों ने संस्कृत एवं रक्षाबंधन पर अपना-अपना विचार दिया। जो निम्नलिखित है संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है ,जो संस्कार की गई भाषा है। इस भाषा का पठन तथा अनुकरण सर्वोत्तम संस्कार प्राप्ति का मार्ग है । इसी भाषा में ही शब्द उत्पत्ति, व्याकरण ,नीति, साहित्य,
व्यवहारिक ज्ञान तथा चिकित्सा ज्ञान इत्यादि अनेकानेक संविधान प्राप्ति का मार्ग, दर्पण जैसा काव्य- महाकाव्य में दर्शाया गया है । रक्षाबंधन सावन के पावन अवसर पर सनातन धर्म के अनुसार सावन मास अर्थात शिव मास का शुभाशीष शिवकल्याण द्वारा रक्षासूत्र ब्राह्मण एवं अपने-अपने शिष्य एवं भाई को अकल्याण से रक्षित करते हुए कल्याण रुपी रक्षा पूर्ण कामना के साथ पूर्ण तिथि पूर्णिमा को भाद्रा नहीं रहने पर बांधते हैं । इस अवसर पर विचार व्यक्त करने वाले विद्वानों में आचार्य उमेश पाठक, आचार्य मुकेश पांडे अरविंद नगर भटिया, आचार्य गौरीशंकर ओझा, अक्षय कुमार चौबे,शिव पूजन पांडे,प्रवक्ता ब्रज राज पांडे, रवींद्र चौबे,संजय पांडे पंटोका,पैक्स अध्यक्ष मुकेश ओझा,राजकुमार चौबे, कोषाध्यक्ष हजारी तिवारी, प्रदीप चौबे,श्याम बिहारी तिवारी ,ओम प्रकाश ओझा,मुखिया संजय पांडेय,लोहा पांडे,उदय तिवारी,मुक्ति ओझा,प्रदीप चौबे तथा राम एकबाल मिश्र सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
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| संगोष्ठी की तस्वीर |
रामगढ़वा-सावन के पावन अवसर पर संस्कृत दिवस के 1 दिन पूर्व सतपिपरा भूमिहारी टोला गांव निवासी पूर्व डाकपाल भैरव चौबे के दरवाजे पर अनुमंडलीय विद्वत संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें सभी विद्वानों ने संस्कृत एवं रक्षाबंधन पर अपना-अपना विचार दिया। जो निम्नलिखित है संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है ,जो संस्कार की गई भाषा है। इस भाषा का पठन तथा अनुकरण सर्वोत्तम संस्कार प्राप्ति का मार्ग है । इसी भाषा में ही शब्द उत्पत्ति, व्याकरण ,नीति, साहित्य,


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