गणेश महावीर +2 उच्च विद्यालय रामगढ़वा के प्रधानाध्यापक के विरुद्ध शिक्षकों ने खोला मोर्चा,दर्ज कराई प्राथमिकी
*गणेश महावीर +2 उच्च विद्यालय रामगढ़वा के प्रधानाध्यापक के विरुद्ध शिक्षकों ने खोला मोर्चा,दर्ज कराई प्राथमिकी
*थाना में आवेदन देकर गाली-ग्लौज करने व जातिवाचक वाचक शब्द से संबोधित करने का लगाया आरोप
चम्पारण टुडे से डी.एन.कुशवाहा की रिपोर्ट-
रामगढ़वा-विद्यालय शिक्षा का मंदिर होता है। जहां शिक्षक व प्रधानाध्यापक को पल-पल विद्यालय व अपने शिष्यों के हित की बात सोचनी चाहिए। साथ ही विद्यालय की मर्यादा व छात्र-छात्राओं के भविष्य को सवारने की उनकी पूर्ण जिम्मेदारी होती है। लेकिन गणेश महावीर +2 उच्च विद्यालय में इन दिनों छात्र-छात्राओं के भविष्य को ताक पर रखकर पढ़ाई की जगह शिक्षक आपस में गाली-ग्लौज तथा लड़ाई झगड़ा में लीन है। भला वैसे शिक्षक विद्यालय के करीब दो हजार बच्चों के भविष्य को कैसे संवार सकते हैं? यह वहीं विद्यालय है जो दोनों जिला में पढाई सहित प्रत्येक मामले में अव्वल स्थान रखता था।जहाँ पढने के लिए बिहार के अलावा अन्य प्रदेशों से लड़के आते थे।लेकिन जब से सुरेन्द्र चौधरी ने प्रधानाध्यापक का प्रभार लिया है तब से यह विद्यालय राजनीति का अड्डा बन गया है। इसका ज्वलंत उदाहरण शुक्रवार को सामने आया गया है। उक्त विद्यालय के अंग्रेजी शिक्षक अम्बिका बैठा ने स्थानीय थाना में आवेदन देकर प्रधानाध्यापक के विरुद्ध गाली- गलौज व जाति सूचक शब्द प्रयोग करने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई है। इसकी पुष्टि स्थानीय थानाध्यक्ष राजेश कुमार ने की।
वहीं विद्यालय में कार्यरत 19 शिक्षकों में 17 शिक्षकों -अविनाश कुमार,अनुज कुमार,आशीष कुमार,अरुण राम,रामाकांत पाठक,रणधीर कुमार ,कुशवाहा कांत,मुकेश कुमार,मोहम्मद ताज आदि ने बारी -बारी से अनुसंधान कर्ता सह जमादार रामायण राम को बताया कि वर्तमान प्रभारी प्रधानाध्यापक सुरेंद्र चौधरी शिक्षकों के साथ आये दिन गाली गलौज करते रहते हैं ।और मुस्लिम एवं अनुसूचित जाति के बच्चो के साथ दुर्व्यवहार करते है ।इतना ही नही इन शिक्षकों ने एक सप्ताह पूर्व आरडीडीइ तिरहुत ब्रजेश ओझा के पास शिकायत की थी। शिकायत के बाद मामले की जांच के लिए आरडीडीइ ने मोतिहारी डीईओ को निर्देश दिया था ।डीईओ के जांच के बाद भी मामले को नहीं सुलझाया जा सका ।वहीं प्रधानाध्यापक व शिक्षकों के बीच उत्पन्न विवाद के कारण बच्चो का पठन- पाठन बाधित हो गया है ।गौरतलब हो कि उक्त प्रधानाध्यापक के विरुद्ध एक साल पहले भी बच्चों ने सड़क पर आगजनी कर उनके तबादले की मांग की थी ।लेकिन अलाधिकारियों ने उनकी एक न सुनी।जिसका खामियाजा यहाँ के बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। यदि यथाशीघ्र उनका स्थानांतरण रामगढ़वा से अन्यत्र नहीं हुआ तो यहां के अभिभावक भी उनके विरुद्ध आंदोलन करने की तैयारी में है।
*थाना में आवेदन देकर गाली-ग्लौज करने व जातिवाचक वाचक शब्द से संबोधित करने का लगाया आरोप
चम्पारण टुडे से डी.एन.कुशवाहा की रिपोर्ट-
रामगढ़वा-विद्यालय शिक्षा का मंदिर होता है। जहां शिक्षक व प्रधानाध्यापक को पल-पल विद्यालय व अपने शिष्यों के हित की बात सोचनी चाहिए। साथ ही विद्यालय की मर्यादा व छात्र-छात्राओं के भविष्य को सवारने की उनकी पूर्ण जिम्मेदारी होती है। लेकिन गणेश महावीर +2 उच्च विद्यालय में इन दिनों छात्र-छात्राओं के भविष्य को ताक पर रखकर पढ़ाई की जगह शिक्षक आपस में गाली-ग्लौज तथा लड़ाई झगड़ा में लीन है। भला वैसे शिक्षक विद्यालय के करीब दो हजार बच्चों के भविष्य को कैसे संवार सकते हैं? यह वहीं विद्यालय है जो दोनों जिला में पढाई सहित प्रत्येक मामले में अव्वल स्थान रखता था।जहाँ पढने के लिए बिहार के अलावा अन्य प्रदेशों से लड़के आते थे।लेकिन जब से सुरेन्द्र चौधरी ने प्रधानाध्यापक का प्रभार लिया है तब से यह विद्यालय राजनीति का अड्डा बन गया है। इसका ज्वलंत उदाहरण शुक्रवार को सामने आया गया है। उक्त विद्यालय के अंग्रेजी शिक्षक अम्बिका बैठा ने स्थानीय थाना में आवेदन देकर प्रधानाध्यापक के विरुद्ध गाली- गलौज व जाति सूचक शब्द प्रयोग करने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई है। इसकी पुष्टि स्थानीय थानाध्यक्ष राजेश कुमार ने की।
वहीं विद्यालय में कार्यरत 19 शिक्षकों में 17 शिक्षकों -अविनाश कुमार,अनुज कुमार,आशीष कुमार,अरुण राम,रामाकांत पाठक,रणधीर कुमार ,कुशवाहा कांत,मुकेश कुमार,मोहम्मद ताज आदि ने बारी -बारी से अनुसंधान कर्ता सह जमादार रामायण राम को बताया कि वर्तमान प्रभारी प्रधानाध्यापक सुरेंद्र चौधरी शिक्षकों के साथ आये दिन गाली गलौज करते रहते हैं ।और मुस्लिम एवं अनुसूचित जाति के बच्चो के साथ दुर्व्यवहार करते है ।इतना ही नही इन शिक्षकों ने एक सप्ताह पूर्व आरडीडीइ तिरहुत ब्रजेश ओझा के पास शिकायत की थी। शिकायत के बाद मामले की जांच के लिए आरडीडीइ ने मोतिहारी डीईओ को निर्देश दिया था ।डीईओ के जांच के बाद भी मामले को नहीं सुलझाया जा सका ।वहीं प्रधानाध्यापक व शिक्षकों के बीच उत्पन्न विवाद के कारण बच्चो का पठन- पाठन बाधित हो गया है ।गौरतलब हो कि उक्त प्रधानाध्यापक के विरुद्ध एक साल पहले भी बच्चों ने सड़क पर आगजनी कर उनके तबादले की मांग की थी ।लेकिन अलाधिकारियों ने उनकी एक न सुनी।जिसका खामियाजा यहाँ के बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। यदि यथाशीघ्र उनका स्थानांतरण रामगढ़वा से अन्यत्र नहीं हुआ तो यहां के अभिभावक भी उनके विरुद्ध आंदोलन करने की तैयारी में है।

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