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घोड़ासहन रेलवे ट्रैक बम कांड में तीन गिरफ्तार,आईएसआई का हाथ

कानपुर रेल हादसा और घोड़ासहन रेलवे ट्रैक बम कांड के पीछे आइएसआइ का हाथ
गिरफ्तार अपराधियो के साथ एसपी जितेन्द्र राणा
आकाश जयसवाल/रवि गुप्ता      
मोतिहारी : बीते कुछ दिनों कानपुर में अजमेर - सियालदह एक्प्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी उक्त दुर्घटना आतंकी कार्रवाई थी जिसके तार डी कंपनी से जुड़ते दिख रहे है घोड़ासहन रेल ट्रैक बम कांड की तफ्शीश के दौरान इसका खुलासा हुआ है इसकी जानकारी देते हुए मोतिहारी पुलिस अधीक्षक जितेंद्र राणा ने बताय घोड़ासहन ट्रैक बम कांड के सिलसिले में गिरफ्तार मोती पासवान व तीन अन्य ने पूछताछ में पुलिस को बताया है कि उन्होंने ही कानपुर में भी रेल हादसा को अंजाम दिया था इसके लिए उसे नेपाल के माध्यम से दुबई के कारोबारी शमशुल होदा ने पैसे दिए थे शमशुल के आईएसआई एवं दाऊद से लिंक जुड़ा हुआ है                       मोतिहारी पुलिस ने किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुए रेल हादसों व पूर्वी चंपा।रण के घोड़ासहन स्टेशन के पास इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आइईडी) लगाने की साजिश के पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ थी। बीते दिन मोतिहारी पुलिस के हत्थे चढ़े तीन शातिर अपराधियों ने यह स्वीकर किया।वही फरार दो अपराधी गजेंद्र शर्मा एवं राकेश यादव की गिरफ़्तारी के लिए छापेमारी जारी है जो पूर्वी चंपारण जिले में ही कही छिपे हुए है।
घोड़ासहन में बरामद बम की फाइल फोटो

बताते चलें कि इंदौर से पटना जा रही ट्रेन इंदौर-राजेन्द्र नगर एक्सप्रेस पिछले साल 20 नवंबर में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इसमें 142 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद कानपुर में ही रूरा के पास अजमेर-सियालदह एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी।

*नेपाली आप्रवासी ने दुबई से रची थी साजिश, आइएसआइ का था हाथ*

गिरफ्तार अपराधियों में शामिल मोती पासवान ने बताया कि दुबई के अप्रवासी नेपाली कारोबारी शमशुल होदा ने उसे ट्रेन को दुर्घटनाग्रस्त करने की जिम्मेवारी सौंपी थी। घोड़ासहन में 01 अक्तूबर को ट्रेन दुर्घटना के टल जाने पर के बाद उसने कानपुर में इंदौर-पटना तथा अजमेर-सियालदह एक्सप्रेस को उड़ाने की जिम्मेवारी दी थी। मोती के अनुसार शमशुल आइएसआइ के लिए काम करता है। उसके नेटवर्क में कई बड़े आतंकवादी भी हैं।
कानपुर रेल हादसे की फाइल फोटो

मोती पासवान ने बताया कि कानपुर में 20 नवंबर 2016 को हुए रेल हादसे की साजिश आइएसआइ ने रची थी। उसे अंजाम देने में उसके साथ ऑर भी लोग थे। उनमें से दो जुबैर व जियायुल दिल्ली में पकड़े जा चुके हैं। पूर्वी चंपारण के एसपी जितेन्द्र राणा के समक्ष उसने दोनों की तस्वीर देखकर पहचान की।

*इसके पहले नाकाम हुई थी घोड़ासहन बम ब्लास्ट की घटना*

मोती ने बताया कि कानपुर से पहले पूर्वी चंपारण जिले के घोड़ासहन स्टेशन के पास रेल ट्रैक व चलती ट्रेन को उड़ाने की साजिश भी आइएसआइ ने रची थी। इसके लिए नेपाल में गिरफ्तार ब्रजकिशोर गिरी ने आदापुर निवासी अरुण व दीपक राम को तीन लाख रुपये दिए थे।

मोती के अनुसार अरुण व दीपक राम ने आइईडी लगाने के बाद भी रिमोट का बटन नहीं दबाया। इस कारण विस्फोट नहीं हो सका और विध्वंसात्मक कार्रवाई की साजिश नाकाम हो गई थी। मोती ने साफ किया कि घटना को अंजाम नहीं देने के कारण नेपाल बुलाकर ब्रजकिशोर ने अरुण व दीपक की हत्या कर शव को फेंक दिया था।

*दाउद की भी संलिप्तता से इंकार नही*

पूर्वी चंपारण के एसपी जितेंद्र राणा ने पकड़े गए मोती पासवान, उमाशंकर प्रसाद पटेल व मुकेश यादव के बारे में बताया कि उनके आइएसआइ से लिंक के प्रमाण मिले हैं। इंटेलिजेंस ब्यूरो की टीम सभी से पूछताछ कर चुकी है। रॉ व एनआइए को इस आशय की सूचना भेजी गई है। एसपी ने इस साजिश के पीछे दाउद इब्राहिम का हाथ होने की आशंका से भी इंकार नहीं किया।*
नेपाल से तीन गिरफ्तार
एसपी ने बताया कि इस सिलसिले में तीन लोग नेपाल में भी गिरफ्तार किए गए हैं। उनमें नेपाल के कलेया निवासी ब्रजकिशोर गिरी, शंभू उर्फ लड्डू और मोजाहिर अंसारी शामिल हैं। नेपाल पुलिस से जो जानकारी आई है, उसमें बताया गया है कि आइएसआइ ने बिहार में विध्वंसात्मक कार्रवाई का जिम्मा ब्रजकिशोर गिरी को दे रखा था और उसे इसके लिए 30 लाख रुपये भी दिए गए थे।




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