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!! घोड़ासहन स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव की मांग !!

 घोड़ासहन, पूर्वी चम्पारण।

घोड़ासहन स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव की मांग फिर एक बार गुंजने लगी है। स्थानीय स्तर पर ही नही बल्कि इसको लेकर ढाका विधायक पवन जायसवाल के द्वारा मंडल रेल प्रबंधक समस्तीपुर को पत्र लिखकर इसकी मांग की गई है। पत्र के माध्यम से यह बताया गया है कि कोरोना काल से पहले घोड़ासहन स्टेशन पर सद्भावना ट्रेन का ठहराव सुनिश्चित था। परन्तु कोरोना काल में लगे लॉक डाउन में ट्रेनों का आवागमन पूर्णरूपेण बंद कर दिया गया। इधर ट्रेनों के परिचालन शुरू होने के बावजूद 4007/4008 सदभावना ट्रेनों का परिचालन आरंभ नही किया गया। जिस से वाराणसी, लखनउ, दिल्ली सहित कुछ अन्य स्थानों पर जाने वाले यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।


 ज्ञात हो आदर्श स्टेशन का दर्जा प्राप्त होने के बावजूद इस स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव नही था। जिसको लेकर रामपुकार सिन्हा के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल रेल प्रबंधक समस्तीपुर को एक ज्ञापन सौंपा था। जिसको लेकर रक्सौल-हावड़ा ट्रेनों के ठहराव की हरी झंडी मिली थी। फिर भी इस रूट से गुजरने वाली अन्य ट्रेनों को यहां के वासी बस अपनी आंखों से देखते रह जाते थे। जिसको लेकर एक समय बांकी अन्य एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव को लेकर एक खास बैनर तले आन्दोलन भी हुआ था। जिसमें कई लोग जेल भी गए। बावजूद इसके ट्रेनों का परिचालन शुरू नही हो पाया। वहीं लोक सभा चुनाव के पहले बेतिया सांसद संजय जायसवाल के पहल पर सद्भावना ट्रेन का ठहराव सुनिश्चित किया गया। परन्तु दुर्भग्यवश कोरोना काल से वह भी बंद है।
 वहीं स्थानीय लोगों की माने तो घोड़ासहन स्टेशन से सीतामढी जाने तथा सीतामढी से वापस आने के लिए जिस तरह ट्रेनों का समन्वय है, यदि उसी तरह घोड़ासहन से रक्सौल की ओर जाने व उधर से वापसी के लिए भी ट्रेनों का समन्वय हो तो अति उतम। फिलहाल रक्सौल की आरे जाने वाले एलआइसी अभिकर्ताओं के साथ साथ अन्य यात्रियों के लिए काफी मुश्किल भरा है। 
 हालाकि ट्रेनों के ठहराव के पहल को लेकर स्थानीय लोगों ने विधायक को धन्यवाद दिया और कहा कि विधायक हो तो ऐसा जो लोगों के बिन कहे दूखदर्द व मनोभाव को समझने में सक्षम हो।

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