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पूर्वी चम्पारण: फूल की खेती करने वाले किसान काफी संकट मे


नरेन्द्र झा, मोतिहारी।

एक समय था कि पश्चिम बंगाल से पूर्वी चंपारण में फूल मंगा कर आम लोगों की जरूरत को पूरी की जाती थी,लेकिन बसवरिया गांव के ललन शुक्ल ने अपने छोटे से प्लॉट में फूल की खेती कर एक नई परंपरा की शुरुआत की और जिले में प्रथम फूल कृषक के रूप में उनका नाम दर्ज हुआ । राष्ट्रीय सम्मान से भी वे सम्मानित किये गये  है।
उनके परंपरा पर चलते हुए जिले में आज हजार एकड़ से अधिक जमीन मे  फूल की खेती हो रही है लेकिन  करोना कर्फ्यू के चलते बाजार बंद है। फूल तैयार हो रहे हैं इससे एक बड़ी समस्या खड़ी हो रही है किस बाजार में फूल को खपाया जाए। किसानों का श्रम तथा काफी पूजी खेती में लगी हुई है। 

लॉक डाउन से कृषि  और किसान प्रभावित नहीं होंगे ऐसा निर्देश केन्द्र तथा राज्य सरकार ने घोषणा की है।  घोषणा में कहा गया है कि किसान अपने कृषि कार्य सामाजिक दूरी बनाए रखने के निर्देशो का पालन करते हुए पूर्ववत करेंगे।ऐसे आदेश के पीछे सरकार की यही सोंच है कि किसानों को कम से कम नुकसान हो।इस आदेश से अन्न, दलहन, तेलहन, फल एवं सब्जी उत्पादक किसानों को कुछ राहत तो जरूर मिली है, परन्तु जिले में लीक से हटकर आज से दो दशक पूर्व शुरू किए गए फूल की खेती जो बसवरिया गांव में श्री शुक्ला ने एक एकड़ से शुरू हुई थी आज जिले के करीब एक हज़ार एकड़ में फुल  की खेती हो रही है साथ ही जिला में फुलमंडी भी स्थापित है।
श्री ललन शुक्ला
श्री शुक्ला ने बताया कि शादी व्याह,मंदिर ,मस्जिद एवं सारे आयोजन बंद हैं।इस खेती में पूंजी एवं श्रम काफी लगती है।जिले के छोटे-छोटे किसान इसकी खेती करते हैं।बसवरिया ,मोतिहारी प्रखंड के किसानों के खेतो मे लगे ये फूल अभी पूर्णरूप से खिलने की तैयारी में हैं।

अब प्रश्न है कि  जनता कर्फ्यू के दौरान इन फूलों एवं इनसे जुड़े किसानों तथा  व्यवसायिओं का क्या होगा?किसानो के परिवार का भरण पोषण इसी खेती एवं व्यवसाय से चलता है। श्री शुक्ला ने सरकार से मांग की है कि फुल व्यवसायियों के खर्च को देखते हुए उनका कंपनसेशन भरपूर मात्रा में किया जाए ताकि किसान जी सकें और उन्हें आत्महत्या का मार्ग अपनाना नहीं पड़े।

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