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आधी रात को नागरिकता संशोधन बिल लोकसभा से हुआ पास


नई दिल्ली-

करीब 14 घंटे बहस के बाद नागरिकता संशोधन बिल लोकसभा से पास हो गया है। इस बिल के पक्ष में 311 वोट पड़े हैं। वहीं विपक्ष में 80 वोट पड़े हैं। लोकसभा में बिल पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने हंगामा किया और केंद्र सरकार के सामने सवाल रखे, जिसका जवाब गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में दिया। नागरिकता संशोधन बिल (Citizenship Amendment Bill) के लोकसभा से पास होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गृह मंत्री अमित शाह की तारीफ की। यह बिल अब राज्यसभा में बुधवार को पेश किया जा सकता है।

नागरिकता संशोधन बिल पर बहस के दौरान अमित शाह ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस देश का विभाजन न करती तो मुझे यह बिल लेकर नहीं आना पड़ता। लोकसभा में शाह ने कहा, मैं चाहता हूं देश में भ्रम की स्थिति न बने। किसी भी तरीके से ये बिल गैर संवैधानिक नहीं है। न ही ये बिल अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है। धर्म के आधार पर ही देश का विभाजन हुआ था। देश का विभाजन धर्म के आधार पर न होता तो अच्छा होता। इसके बाद इस बिल को लेकर आने की जरूरत हुई। 1950 में नेहरू-लियाकत समझौता हुआ था, जो कि धरा का धरा रह गया।

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अमित शाह ने आगे कहा, 1947 में पाकिस्तान में 23 फीसदी हिंदू थे लेकिन वहीं साल 2011 में ये आंकड़ा 3।4 फीसदी रह गया। पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों को देखते हुए भारत मूकदर्शक नहीं बन सकता। वहीं भारत में अल्पसंख्यकों की आबादी बढ़ी है। यहां हिन्दुओं की आबादी के प्रतिशत में कमी आई है जबकि मुस्लिम आबादी के प्रतिशत में बढ़ोतरी हुई है। पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्यचारों पर भारत चुप नहीं रहेगा।

भाषण के दौरान अमित शाह ने कहा, जो वोट बैंक के लिए घुसपैठियों को शरण देना चाहता है, हम उन्हें सफल नहीं होने देंगे। वोट के लिए घुसपैठियों को शरण देने वाले चिंतित हैं। रोहिंग्या को कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा। रोहिंग्या बांग्लादेश के जरिए भारत आते हैं। उन्होंने कहा, किसी भी रिफ्यूजी पॉलिसी को भारत ने स्वीकार नहीं किया है। पारसी भी प्रताड़ित होकर ईरान से भारत आए थे। कांग्रेस ने जिन्ना की टू नेशन थ्योरी क्यों मानी? कांग्रेस ने विभाजन को क्यों नहीं रोका? पीओके हमारा है और वहां के लोग भी हमारे हैं।

क्या है नागरिकता संशोधन बिल-

  1. नागरिकता (संशोधन) विधेयक (Citizenship Amendment Bill) का उद्देश्य छह समुदायों - हिन्दू, ईसाई, सिख, जैन, बौद्ध तथा पारसी - के लोगों को भारतीय नागरिकता प्रदान करना है।
  2. नागरिकता संशोधन बिल के चलते जो विरोध की आवाज उठ रही है उसकी वजह ये है कि इस बिल के प्रावधान के मुताबिक पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले मुसलमानों को भारत की नागरिकता नहीं दी जाएगी। कांग्रेस समेत कई पार्टियां इसी आधार पर बिल का विरोध कर रही हैं।
  3. देश के पूर्वोत्तर राज्यों में इस विधेयक का विरोध किया जा रहा है, और उनकी चिंता है कि पिछले कुछ दशकों में बांग्लादेश से बड़ी तादाद में आए हिन्दुओं को नागरिकता प्रदान की जा सकती है।
  4. BJP की सहयोगी असम गण परिषद (AGP) ने वर्ष 2016 में लोकसभा में पारित किए जाते वक्त बिल का विरोध किया था, और सत्तासीन गठबंधन से अलग भी हो गई थी, लेकिन जब यह विधेयक निष्प्रभावी हो गया, AGP गठबंधन में लौट आई थी।
  5. माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि संसद में नागरिकता (संशोधन) विधेयक पेश किए जाने पर पार्टी इसमें दो संशोधन लाएगी क्योंकि वह विधेयक के मौजूदा स्वरूप का विरोध करती है। येचुरी ने कहा कि पार्टी दो संशोधन ला कर उन सभी शर्तों को हटाने की मांग करेगी, जो धर्म को नागरिकता प्रदान करने का आधार बनाते हैं।
  6. असम में नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) के खिलाफ विभिन्न प्रकार से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं जिनमें नग्न होकर प्रदर्शन करना और तलवार लेकर प्रदर्शन करना भी शामिल है।
  7. गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस, आईयूएमएल, एआईएमआईएम, तृणमूल कांग्रेस समेत विपक्षी सदस्यों की चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि विधेयक कहीं भी देश के अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है और इसमें संविधान के किसी अनुच्छेद का उल्लंघन नहीं किया गया। 
  8. एनडीए की सहयोगी रही शिवसेना जो अब कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार चला रही है, इस बिल का समर्थन कर रही है। 
  9. कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK), समाजवादी पार्टी (SP), वामदल तथा राष्ट्रीय जनता दल (RJD) इस बिल के विरोध में हैं, लेकिन राज्यसभा में मतदान की नौबत आने पर ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) जैसी पार्टियां सरकार के पक्ष में संतुलन कायम कर सकती हैं। 
Source- News

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