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नई तीन दवाओं की नीति से होगा फाइलेरिया का सफाया

सात नवंबर से दवा सेवन कार्यक्रम की होगी शुरूआत
स्कूल, आंगनबाड़ी व घर-घर जाकर खिलायी जायेगी दवा
कार्यक्रम को सफल बनाने में चार विभाग करेंगे सहयोग 


अरवल/ 11 अक्टूबर: फाइलेरिया मुक्त अभियान की दिशा में भारत के पांच चयनित जिलों में बिहार का अरवल जिला भी शामिल है. अरवल पहला जिला है जहां दो दवाओं की जगह तीन दवाओं से फाइलेरिया का सफाया करने का प्रयास किया जा रहा है. इस बार स्वास्थ्य विभाग के साथ आइसीडीएस, जीविका, शिक्षा विभाग एवं पंचायती राज विभाग भी फाइलेरिया से मुक्ति के लिए सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम में सहयोग करेंगे.  उक्त बातें जिलाधिकारी रविशंकर चौधरी ने शुक्रवार को जिला समाहरणालय के सभागार में जिला समन्वयक समिति की बैठक के दौरान कही.
जिलाधिकारी ने बताया यह अभियान सात नवंबर से आरंभ होगा जो बारह दिनों तक चलेगा. इस दौरान शुरूआत के दो दिन स्कूलों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को दवा खिलायी जायेगी एवं बचे दिनों में घर-घर जाकर लोगों को दवा खिलायी जायेगी. इसके लिए दो आशाओं की एक टीम गठित की जायेगी जो दवा सेवन सुनिश्चित करेंगी. इसके लिए प्रखंड स्तर पर ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर को प्रशिक्षण भी प्रदान कराया जायेगा. उन्होंने संबंधित विभागों को अभियान में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. 
राज्य समन्वयक नेगलेकटेड ट्रॉपिकल डिजीज डब्ल्यूएचओ डॉ राजेश पांडेय ने बताया फाइलेरिया की रोकथाम के लिए पूर्व में  विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अनुशंसित दो दवाओं की नीति अपनाई जाती थी. इसमें डाईइथाईल- कार्बामाजीन(डीईसी) एवं एलबेंडाजोल शामिल था. अब इन दवाओं के साथ एक दवा और शामिल किया गया है. यह दवा है आइवरमेकटिन जिसे दो दवाओं के साथ कॉम्बिनेशन में शामिल किया गया है. इसकी शुरूआत बिहार के अरवल से ही हुई है. पिछले वर्ष भी जिले में दो दवाओं के साथ आइवरमेकटिन को सर्वजन दवा सेवन में शामिल किया गया था. यह प्रयास काफी सफल भी रहा था. इस बार भी सात नवंबर से सर्वजन दवा सेवन राउंड की शुरूआत होगी. 

बेहतर संवाद स्थापित करने से मिलेगी सफलता 

प्रोजेक्ट कर्सन इंटरनेशनल इंडिया की डायरेक्टर प्रोग्राम्स एंड इनोवेशंस राजश्री दास ने बताया फाइलेरिया की तीनों दवाओं का सेवन करना जरूरी है. यह दवाएं निशुल्क उपलब्ध तो करायी जा रही हैं लेकिन यह काफी मंहगी दवाएं हैं. शत प्रतिशत दवा सेवन सुनिश्चित कराने के लिए ड्रग एडमिनिस्ट्रेटरों को आमलोगों से बेहतर संवाद स्थापित करने की जरूरत होगी एवं उन्हें दवा सेवन के फायदों को समझाना होगा. इसके लिए सहयोगी विभागों के सहयोग से पीसीआई द्वारा सभी ड्रग एडमिनिस्ट्रेटरों को इंटर पर्सनल कॉम्यूनिकेशन पर प्रशिक्षण दी जायेगी. 

उंगलियों की होगी मार्किंग 

पोलियो अभियान की तर्ज पर एमडीए सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम के दौरान दवा सेवन करने वालों के बायें हाथ की तर्जनी उंगुली के नाखुन पर मार्किंग की जायेगी. इसके लिए जिले में प्रयाप्त मार्कर की उपलब्धता सुनिश्चित करायी जायेगी. 

यह है फाइलेरिया

फाइलेरिया को हाथीपावं रोग के नाम से भी जाना जाता है. यह एक दर्दनाक रोग है जिसके कारण शरीर के अंगों में सूजन आ जाती है. यह क्यूलेक्स नामक मादा मच्छर के काटने से फैलता है. आमतौर पर बचपन में होने वाला यह संक्रमण लसिका (लिम्फैटिक) प्रणाली को नुकसान पहुँचाता है. फाइलेरिया से जुडी विकलांगता जैसे लिंफोइडिमा( पैरों में सूजन) एवं हाइड्रोसील(अंडकोश की थैली में सूजन) के कारण पीड़ित लोगों की आजीविका व काम करने की क्षमता प्रभावित होती है.

ट्रिपल ड्रग सेवन के फायदे: 

फाइलेरिया के परजीवी को जल्द ख़त्म करने में मदद मिलती है और संक्रमण का स्तर अगले 2 सालों तक कम रहता है 
इसके इस्तेमाल से साइड इफ़ेक्ट में कोई वृद्धि नहीं देखी गयी है
ट्रिपल ड्रग उपचार से कम समय में फाइलेरिया का उन्मूलन संभव है 
आइवरमेकटिन को लेने से खाज-खुजली,हुकवर्म( आंत के कीड़े) जैसे परजीवी के खात्मे में मदद मिलती है.

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