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जिले के एकमा, जलालपुर व मढौरा में सबसे ज्यादा बच्चों का हुआ स्क्रिनिंग


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r: blue;">राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत ढाई लाख से अधिक बच्चों का हुआ स्क्रिनिंग, दिया गया हेल्थ कार्ड
    बच्चों में 38 प्रकार की बीमारियों की निःशुल्क ईलाज की सुविधा
    जनवरी से लेकर जुलाई तक 2.83 लाख बच्चों का हुआ इलाज
जिले के एकमा, जलालपुर व मढौरा में सबसे ज्यादा बच्चों का हुआ स्क्रिनिंग
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छपरा/ 24 सितंबर। बच्चों की बेहतर सेहत को लेकर स्वास्थ्य विभाग काफी सक्रिय है। अब स्वास्थ्य विभाग बुखार जैसे सामान्य बीमारियों से लेकर बच्चों की जन्मजात विकृतियों एवं कई अन्य गंभीर जटिलताओं पर भी ध्यान दे रही है। इसको लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम(आरबीएसके) चलाया जा रहा है। जिसमें जिला स्तर पर गठित आरबीएसके टीम द्वारा सरकारी स्कूलों एवं आँगनबाड़ी केन्द्रों पर बच्चों में स्वास्थ्य जटिलता की जाँच की जा रही है।  इस कार्यक्रम के अंतर्गत जिले में जनवरी 2019 से लेकर जुलाई 2019 तक लगभग 2.83 लाख बच्चों का इलाज किया गया है। साथ हीं साथ इन सभी बच्चों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से हेल्थ कार्ड भी उपलब्ध कराया गया है। साथ ही कार्यक्रम के बेहतर क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिदिन 80 से 100 बच्चों का स्क्रिनिंग किया जाता है।
फोर डी पर आधारित जाँच : राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत शून्य से 18 वर्ष तक के सभी बच्चों के फोर डी पर फोकस किया जाता है, जिसमें डिफेक्ट एट बर्थ, डिफिशिएंसी, डिसीज, डेवलपमेंट डिलेज इन्क्लूडिंग डिसएबिलिटी यानि किसी भी प्रकार का विकार, बीमारी, कमी और विकलांगता है। इसमें 38 बीमारियों को चिन्हित किया गया है। आरबीएसके में शून्य से अठारह वर्ष तक के सभी बच्चों की बीमारियों का समुचित इलाज किया जाता है। शून्य से छह वर्ष तक के बच्चों की स्क्रीनिंग आंगनबाड़ी केंद्रों में होती है, जबकि छह साल से अठारह साल तक के बच्चों की स्क्रीनिंग उनके स्कूलों में जाकर की जाती है। स्क्रीनिंग करते वक्त बच्चों को हेल्थ कार्ड भी उपलब्ध कराया जाता है।

इन प्रखंडों में सबसे ज्यादा बच्चों का इलाज : जिले के तीन प्रखंडों में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत अधिक बच्चों का इलाज किया गया है और हेल्थ कार्ड  का वितरण किया गया है। एकमा, जलालपुर और मढौरा में सबसे अधिक बच्चों का इलाज किया गया है। एकमा में 22176, जलालपुर में 21285 वहीं मढौरा में 23635 बच्चों का इलाज किया गया है। 
38 प्रकार की बीमारियों का समुचित इलाज: आरबीएसके के जिला समन्वयक डॉ. अमरेंद्र कुमार ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत बच्चों के 38 तरह की बीमारियों की जांच कर उसका समुचित इलाज किया जाता है। इन सभी बीमारियों को चार मूल श्रेणियों में बांटकर इसे 4 डी का नाम दिया गया है। जिन तीस बीमारियों का इलाज किया जायेगा, उसमें जाड़ा- बुखार, सर्दी- खांसी, गैस्ट्रिक,पेट दर्द, कान दर्द, दस्त,दांत सड़ना, हकलापन, बहरापन, किसी अंग में सून्नापन, गूंगापन, चर्म रोग, नाक रोग आदि शामिल हैं।
मोबाइल मेडिकल टीम में चार सदस्य : आरबीएसके के तहत जिले में कुल 31 मोबाइल मेडिकल टीम का गठन किया गया है। प्रत्येक टीम में चार स्वास्थ्य कर्मियों को शामिल किया गया है। जिसमें दो आयुष चिकित्सक,एक एएनएम एवं एक फार्मासिस्ट सह डाटा असिस्टेंट शामिल किया जाता है। एक टीम को प्रतिदिन 125 बच्चों की स्क्रीनिंग कर उनका समुचित इलाज करना होता है।

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