सीतामढ़ी की बेटी लावण्या ने अपनी कला से दर्शकों का मन मोह लिया
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| लावण्या का नृत्य |
सीतामढी महोत्सव का रंग दूसरे दिन भी शानदार रहा,देश के कोने कोने से आये कलाकारों के साथ साथ स्थानीय कलाकारों ने भी अपनी कला से लोगों का मन मोह लिया। वही सीता माता की जन्मभूमि सीतामढ़ी की ही कत्थक बाल नृत्यांगना लावण्या की कला की जन्मभूमि है। अनेक महत्वपूर्ण महोत्सव में अपनी कला की जादू बिखेर चुकी लावण्या बिहार की उभरती कलाकार है।लावण्या के पिता राजेश कुमार पाँच-छः वर्ष पूर्व सीतामढ़ी सदर के अनुमण्डल पदाधिकारी थे। लावण्या ने अपने कला से सभी दर्शकों का मन मोह लिया। जय जय भैरवी असुर भयावनी.....गान ने पूरे कार्यक्रम स्थल में भक्तिमय वातावरण उत्पन्न कर दिया।

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