मोतिहारी के घोड़ासहन में चर्चित सैंड आर्टिस्ट मधुरेन्द्र ने अपनी अंदाज में पूर्व प्रधान-मंत्री अटल को दिया श्रंद्धांजलि।
घोड़ासहन (पूर्वी चम्पारण) : पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन दिल्ली के एम्स में हुई। उक्त अवसर पर पूर्वी चम्पारण के धरती पर घोड़ासहन में श्याम सुन्दर मेमोरियल डेंटल क्लिनिक परिसर में शनिवार को देश के पूर्व प्रधान मंत्री व भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को बालू के रेत पर प्रसिद्ध भरतीय रेत कलाकार मधुरेन्द्र ने विशालकाय प्रतिमा बनाकर श्रंद्धांजलि दी हैं। बता दे कि देश उनकी सलामती की दुआएं कर रहा है। तीन बार प्रधानमंत्री रहे, हरदिल अजीज राजनेता अटल जी की एक लोकप्रिय राजनेता, ओजस्वी कवि, सम्मानित समाजसेवी और नरम हिंदूत्ववादी के रूप में कई छवियां रही हैं। आरएसएस में शामिल होने से पहले वह साम्यवाद से प्रभावित थे, पर बाद में बाबासाहेब आप्टे से प्रभावित होकर साल 1939 में आरएसएस से जुड़ गए। उनके स्वभाव और व्यक्तित्व का ऐसा जादू रहा है कि अपनी पार्टी के लोगों के साथ-साथ विपक्ष भी उनकी बहुत प्रशंसा और सम्मान करता है। इन्हें भारत सरकार की ओर से पद्म विभुषण और भारत रत्न का सम्मान मिल चुका है। गौरतलब हो को सैंड आर्टिस्ट मधुरेन्द्र जब देश में अप्रिय घटना होती हैं तो वे तुरंत अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। हालही में तमिलनाडू के पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि को रेतकला के जरिय श्रंद्धांजलि दिया था। मौके पर डॉ मुरारी गुप्ता, डॉ वेद प्रकाश गुप्ता, आप नेता ललन कुमार सिन्हा, गीरधारी कुमार, राजेन्द्र दास, प्रेमानंद आर्य, मदन प्रसाद,मनोज कुमार, गौतम कुमार समेत सैकड़ों लोगों ने ब्राह्मण परिवार में जन्मे और आजीवन अविवाहित रहे अटल जी को श्रंद्धांजलि दी।


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