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स्वच्छता के बिना शिक्षा का कोई महत्व नहीं :- डीएम,रमण कुमार

स्वच्छता के बिना शिक्षा का कोई महत्व नहीं: डीएम रमण कुमार 
🚩30 मार्च तक जिले के साथ-साथ सिकरहना अनुमंडल भी होगा खुले मे शौच मुक्त🚩
🚩अपने साथ अपने परिवेश व अन्य लोगो को स्वच्छ रखना ही स्वच्छता के मायने है🚩
🚩शिक्षक ही है जो देश की तकदीर बदलने वालो की तकदीर बनाते है🚩
बैठक को सम्बोधित करते डीएम रमण कुमार
पवन कुमार मिश्रा, ढाका
सिकरहना:स्वच्छता शिक्षा का ही एक भाग है,  लेकिन स्वच्छता के बिना शिक्षा का कोई लाभ नहीं।
उक्त बाते ढाका उच्चय विद्यालय के सभागार में  "चम्पारण का रण" के तहत आयोजित कार्यक्रम मे शिक्षा और स्वच्छता के प्रति कही। इस कार्यक्रम मे जिलाधिकारी रमन कुमार ने कहा कि अपने आपको स्वच्छ रख लेने से ही समाज स्वच्छ नही हो सकता, उसके लिए जरुरी है कि हम उन लोगो को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक करे जो अबतक इससे दूर है। स्वच्छता किसी व्यक्ति विशेष का मसला नही है यह पुरे समाज
बैठक में उपस्थित शिक्षक कर्मचारी
के लिए आवश्यक है। क्योंकि जब समाज की कोई नन्ही बच्ची खुले मे शौच के लिए जाती है और कोई वासना का दरिंदा उसके साथ दुर्व्यवहार करता है तब ऐसे मे वह समाज का मसला बन जाता है। जब कोई बच्चा सड़क किनारे शौच करते किसी वाहन की चपेट मे आ जाता है तब यह समाज का मुद्दा बन जाता है, तो क्यों ना इन सभी मसलो को एक ही बार मे हल करले यानी स्वच्छता के प्रति जागरूक हो जाए। वही डीएम ने इस कार्यक्रम मे आए सिकरहना अनुमंडल के सभी शिक्षको से शिक्षा के गिरते स्तर को रोकने की अपील की।उन्होंने कहा कि आजसे 20 वर्ष पूर्व विद्यालयो मे संसाधन की कमी थी किसी किसी स्कूल मे  दो से तीन शिक्षक ही सभी विषयो को पढाते थे और रिजल्ट भी 70 प्रतिशत आता था। आज सकूलो मे शिक्षक की संख्या उस समय की तूलना मे अधिक है, संसाधन भी बेहतर है और सभी विषयो के लिए अलग अलग शिक्षक है तब भी अगर बच्चा निजी शिक्षण संस्थान मे न जाए तो रिजल्ट 20 प्रतिशत भी नही आएगा यह काफी अफसोस की बात है। उन्होंन कहा कि शिक्षक आज भी योग्य है लेकिन कुछ शिक्षक  अपने कर्तव्य का निर्वाहन ईमानदारी से नही करते और ईमानदार शिक्षक भी उनके रवैये की चपेट मे है। आज भी ऐसे गुरुओ की तादाद काफी है जो देश के भविष्य बदलने वालो के भविष्य को सुनहरा बनाने का बेहतर हुनर रखते है लेकिन आवश्यकता है कि वैसे योग्य गुरु अपनी गरिमा अपने कर्तव्य के प्रति निष्ठापूर्वक हो जाए तो शिक्षा का रुप आज भी खुबसुरत हो जाएगा।


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