रामगढ़वा:जयंती पर याद किए गए आजाद हिंद फौज के संस्थापक नेताजी सुभाष चंद्र बोस
जयंती पर याद किए गए आजाद हिंद फौज के संस्थापक नेताजी सुभाष चंद्र बोस
नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारतीय जनमानस के नायक थे:-अर्जुन
रामगढ़वा से डी.एन.कुशवाहा की रिपोर्ट-
रामगढ़वा-देश हित में नेताजी के महान योगदान का वर्णन करते हुए अर्जुन भारतीय ,सदस्य, हिंदी सलाहकार समिति ,केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने मंगलवार को प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि आजादी की लड़ाई में नायक की भूमिका में रहे नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आज 23 जनवरी को जयंती है।उन्होंने स्वाधीनता संग्राम में देश और विदेश में आंदोलन को बुलंदियों पर पहुंचाया था।वे क्रांतिकारी रोल में रहे। उन्होंने विदेश में रहकर "आजाद हिंद फौज "की स्थापना की और क्रांति -रथ को आगे बढ़ाया।वे निजी चलंत रेडियो स्टेशन बनाकर लगातार देश को आंदोलन का संदेश देते रहे।पढ़ाई में मन ना लगाने के पिता के आरोप को चुनौती में लेकर पहले इंग्लैंड द्वारा प्रायोजित आई सी एस की परीक्षा रिकार्ड रूप में पास की। कलेक्टर बनने की उक्त डिग्री को पिता को सौंपकर आजादी की लड़ाई में रम गए। उनका शरीर लोहे का और दिमाग में बिजली की कौधथी। वे जब देश में थे ,तो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस एवं गांधी- नेहरू के साथ थे। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष पद के ,-रामगढ़ में आयोजित अधिवेशन मैं, उम्मीदवार बने और भारी मतों से जीते ।उनके जीतने पर गांधी -नेहरू तथा दूसरे नेताओं ने असंतोष व्यक्त किया और "सीताराम भी पट्टाया "की हार को अपनी हार बताया ।इसके कारण बाद में नेताजी ने कांग्रेस छोड़ दी और फॉरवर्ड ब्लॉक नामक पार्टी का गठन किया ।बाद में घर में नजरबंद नेताजी अंग्रेजों की आंखों में धूल झोंककर गोपनीय ढंग से विदेश रवाना हो गए ।इस तरह वह भारतीय जनमानस के नायक बन गए।नेताजी की कहानी शौर्य ,वीरता एवं तेज से भरी पड़ी है ।आजादी की लड़ाई में उनके महान योगदान एवं कुर्बानी के स्मृति -चरणों में हमारा नमन! उन्हें हमारी श्रद्धांजलि!!
नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारतीय जनमानस के नायक थे:-अर्जुन
रामगढ़वा से डी.एन.कुशवाहा की रिपोर्ट-
रामगढ़वा-देश हित में नेताजी के महान योगदान का वर्णन करते हुए अर्जुन भारतीय ,सदस्य, हिंदी सलाहकार समिति ,केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने मंगलवार को प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि आजादी की लड़ाई में नायक की भूमिका में रहे नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आज 23 जनवरी को जयंती है।उन्होंने स्वाधीनता संग्राम में देश और विदेश में आंदोलन को बुलंदियों पर पहुंचाया था।वे क्रांतिकारी रोल में रहे। उन्होंने विदेश में रहकर "आजाद हिंद फौज "की स्थापना की और क्रांति -रथ को आगे बढ़ाया।वे निजी चलंत रेडियो स्टेशन बनाकर लगातार देश को आंदोलन का संदेश देते रहे।पढ़ाई में मन ना लगाने के पिता के आरोप को चुनौती में लेकर पहले इंग्लैंड द्वारा प्रायोजित आई सी एस की परीक्षा रिकार्ड रूप में पास की। कलेक्टर बनने की उक्त डिग्री को पिता को सौंपकर आजादी की लड़ाई में रम गए। उनका शरीर लोहे का और दिमाग में बिजली की कौधथी। वे जब देश में थे ,तो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस एवं गांधी- नेहरू के साथ थे। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष पद के ,-रामगढ़ में आयोजित अधिवेशन मैं, उम्मीदवार बने और भारी मतों से जीते ।उनके जीतने पर गांधी -नेहरू तथा दूसरे नेताओं ने असंतोष व्यक्त किया और "सीताराम भी पट्टाया "की हार को अपनी हार बताया ।इसके कारण बाद में नेताजी ने कांग्रेस छोड़ दी और फॉरवर्ड ब्लॉक नामक पार्टी का गठन किया ।बाद में घर में नजरबंद नेताजी अंग्रेजों की आंखों में धूल झोंककर गोपनीय ढंग से विदेश रवाना हो गए ।इस तरह वह भारतीय जनमानस के नायक बन गए।नेताजी की कहानी शौर्य ,वीरता एवं तेज से भरी पड़ी है ।आजादी की लड़ाई में उनके महान योगदान एवं कुर्बानी के स्मृति -चरणों में हमारा नमन! उन्हें हमारी श्रद्धांजलि!!

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