रक्सौल को गांधी सर्किट से जोड़ने तथा नेपाल सीमा के मुख्य द्वार पर एक भव्य गाँधी स्मृति द्वार बनाने की उठी माँग
रक्सौल को गांधी सर्किट से जोड़ने तथा नेपाल सीमा के मुख्य द्वार पर एक भव्य गाँधी स्मृति द्वार बनाने की उठी माँग
रामगढ़वा से डी.एन.कुशवाहा की रिपोर्ट-
रामगढ़वा-चंपारण जिला "सत्याग्रह शताब्दी वर्ष समारोह" आयोजन समिति के अध्यक्ष चंद्र भूषण पांडेय व उपाध्यक्ष अर्जुन भारतीय ने गुरुवार को एक संयुक्त प्रेस बयान में केंद्र तथा राज्य सरकार से गांधी की रक्सौल -यात्रा को यादगार बनाने हेतु रक्सौल को गाँधी सर्किट से जोड़ने तथा नेपाल सीमा के मुख्य द्वार पर एक भव्य "गाँधी -स्मृति -द्वार" के निर्माण कराने की मांग की है। दोनों लोगों ने बताया कि चंपारण सत्याग्रह के समय गाँधी ने 9 दिसंबर 1920 को पहली बार तथा 24 जनवरी 1927 को दूसरी बार रक्सौल -यात्रा की थी ।अपनी यात्रा में गाँधी ने दोनों बार सभाएं की और रक्सौल में "राष्ट्रीय विद्यालय" स्थापित कराई।उस वक्त यह विद्यालय आजादी की लड़ाई के सिपाहियों के ठहरने का मुख्य केन्द्र था, जिसमें बड़ी संख्या में नेपाल के नागरिक भी शरीक होते थे। इस विद्यालय में उस वक्त आंदोलन की रुपरेखा तैयार की जाती थी और रणनीति बनाई जाती थी।उक्त "राष्ट्रीय गाँधी विद्यालय" आज भी राज्य सरकार के शासनाधीन संचालित है। दोनों ने रक्सौल के बगल में मुख्य मार्ग पर नेपाल सरकार द्वारा स्थापित भव्य द्वार "कांचीपुरम शंकराचार्य -स्मृति -द्वार" का उल्लेख करते हुए कहा कि जब कांचीपुरम के शंकराचार्य 1974 में रक्सौल आकर नेपाल गए ,तब नेपाल सरकार ने उक्त भव्य द्वार का निर्माण कराया। उसी तरह का भव्य द्वार चंपारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष की स्मृति में "गाँधी- स्मृति- द्वार" का निर्माण कराया जाए।साथ ही ,रक्सौल की गाँधी -यात्रा -विरासत को यादगार बनाने के मद्देनजर इसे गाँधी सर्किट से भी जोड़ने कि सरकार से माँग की।
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| अर्जुन सिंह भारतीय ,सदस्य, हिंदी सलाहकार समिति ,केंद्रीय कृषि मंत्रालय ,भारत सरकार |
रामगढ़वा-चंपारण जिला "सत्याग्रह शताब्दी वर्ष समारोह" आयोजन समिति के अध्यक्ष चंद्र भूषण पांडेय व उपाध्यक्ष अर्जुन भारतीय ने गुरुवार को एक संयुक्त प्रेस बयान में केंद्र तथा राज्य सरकार से गांधी की रक्सौल -यात्रा को यादगार बनाने हेतु रक्सौल को गाँधी सर्किट से जोड़ने तथा नेपाल सीमा के मुख्य द्वार पर एक भव्य "गाँधी -स्मृति -द्वार" के निर्माण कराने की मांग की है। दोनों लोगों ने बताया कि चंपारण सत्याग्रह के समय गाँधी ने 9 दिसंबर 1920 को पहली बार तथा 24 जनवरी 1927 को दूसरी बार रक्सौल -यात्रा की थी ।अपनी यात्रा में गाँधी ने दोनों बार सभाएं की और रक्सौल में "राष्ट्रीय विद्यालय" स्थापित कराई।उस वक्त यह विद्यालय आजादी की लड़ाई के सिपाहियों के ठहरने का मुख्य केन्द्र था, जिसमें बड़ी संख्या में नेपाल के नागरिक भी शरीक होते थे। इस विद्यालय में उस वक्त आंदोलन की रुपरेखा तैयार की जाती थी और रणनीति बनाई जाती थी।उक्त "राष्ट्रीय गाँधी विद्यालय" आज भी राज्य सरकार के शासनाधीन संचालित है। दोनों ने रक्सौल के बगल में मुख्य मार्ग पर नेपाल सरकार द्वारा स्थापित भव्य द्वार "कांचीपुरम शंकराचार्य -स्मृति -द्वार" का उल्लेख करते हुए कहा कि जब कांचीपुरम के शंकराचार्य 1974 में रक्सौल आकर नेपाल गए ,तब नेपाल सरकार ने उक्त भव्य द्वार का निर्माण कराया। उसी तरह का भव्य द्वार चंपारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष की स्मृति में "गाँधी- स्मृति- द्वार" का निर्माण कराया जाए।साथ ही ,रक्सौल की गाँधी -यात्रा -विरासत को यादगार बनाने के मद्देनजर इसे गाँधी सर्किट से भी जोड़ने कि सरकार से माँग की।

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