रामगढ़वा:एनएच 28 ए की जर्जर स्थिति के कारण ट्रक पलटा ,उप चालक घायल
एनएच 28 ए की जर्जर स्थिति के कारण ट्रक पलटा ,उप चालक घायल
रामगढ़वा से डी.एन.कुशवाहा की रिपोर्ट-
रामगढ़वा-स्थानीय थाना क्षेत्र के मझरिया लाइन होटल के पास शुक्रवार को अपराहन 2 बजे साबुन बनाने वाला पाउडर लदा हुआ 22 चक्का वाला एक ट्रक एनएच 28 ए पर पलट गया। जिसमें चालक तो बाल-बाल बच गया। लेकिन उप चालक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे अगल-बगल के लोगों ने उपचार हेतु अस्पताल पहुंचाया। यह तो गनीमत था कि ट्रक के आसपास कोई छोटी गाड़ी या आम यात्री नहीं थे ।वरना कितनों की जान चली जाती। रामगढ़वा की तरफ से रक्सौल जा रही उक्त दुर्घटनाग्रस्त ट्रक का नंबर आर जे 09 जी बी-9800 है। गौरतलब है कि तातिया कंपनी की लापरवाही से 3 वर्ष में जिस एनएच 28 ए का निर्माण फाइनल हो जाना था। वह 7 वर्ष पूर्ण होने के बाद भी अभी तक फाइनल नहीं हुआ। इस बीच सैकड़ों गाड़ियां दुर्घटनाग्रस्त हो चुकी हैं और दर्जनों लोगों की जानें भी जा चुकी हैं। वहीं निर्माणाधीन सड़क पर उड़ रही धूल-कण की वजह से दिन में ही सड़क पर अंधेरा छा जाता है। जिसकी वजह से भी आए दिन दुर्घटनाएँ होती रहती हैं। सड़क निर्माण कंपनी के द्वारा धूल कण से बचाव के लिए पानी का छिड़काव भी नहीं किया जाता है।
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| एनएच 28 ए पर आर जे 09 9800 नंबर की दुर्घटनाग्रस्त ट्रक |
रामगढ़वा-स्थानीय थाना क्षेत्र के मझरिया लाइन होटल के पास शुक्रवार को अपराहन 2 बजे साबुन बनाने वाला पाउडर लदा हुआ 22 चक्का वाला एक ट्रक एनएच 28 ए पर पलट गया। जिसमें चालक तो बाल-बाल बच गया। लेकिन उप चालक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे अगल-बगल के लोगों ने उपचार हेतु अस्पताल पहुंचाया। यह तो गनीमत था कि ट्रक के आसपास कोई छोटी गाड़ी या आम यात्री नहीं थे ।वरना कितनों की जान चली जाती। रामगढ़वा की तरफ से रक्सौल जा रही उक्त दुर्घटनाग्रस्त ट्रक का नंबर आर जे 09 जी बी-9800 है। गौरतलब है कि तातिया कंपनी की लापरवाही से 3 वर्ष में जिस एनएच 28 ए का निर्माण फाइनल हो जाना था। वह 7 वर्ष पूर्ण होने के बाद भी अभी तक फाइनल नहीं हुआ। इस बीच सैकड़ों गाड़ियां दुर्घटनाग्रस्त हो चुकी हैं और दर्जनों लोगों की जानें भी जा चुकी हैं। वहीं निर्माणाधीन सड़क पर उड़ रही धूल-कण की वजह से दिन में ही सड़क पर अंधेरा छा जाता है। जिसकी वजह से भी आए दिन दुर्घटनाएँ होती रहती हैं। सड़क निर्माण कंपनी के द्वारा धूल कण से बचाव के लिए पानी का छिड़काव भी नहीं किया जाता है।

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