रक्सौल की क्लिंकर समस्या को लेकर रेलवे पॉलीसी एण्ड रेगुलेटरी के तहत दर्ज हुई मामला
रक्सौल की क्लिंकर समस्या को लेकर रेलवे पॉलीसी एण्ड रेगुलेटरी के तहत दर्ज हुई मामला
डी.एन.कुशवाहा ,रामगढ़वा
रक्सौल :- रक्सौल रेलवे स्टेशन पर क्लिंकर की उतराई बंद कर मालगाड़ी को सीधे सिरिसिया (नेपाल) भेजे जाने और रामगढ़वा में शिफ्टिंग रोकने को लेकर शिक्षाविद् प्रो. डा. स्वयंभू शलभ द्वारा गत 13 दिसंबर को रेल मंत्रालय में रेलवे पॉलिसी एण्ड रेगुलेटरी के तहत मामला दर्ज कराया गया था। जिस पर तत्काल संज्ञान लेते हुए पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के उप महाप्रबंधक श्री ए. के. झा से इस मामले में रिपोर्ट मांगी गई है।
इस याचिका में किसी भी बुकिंग प्वाइंट से क्लिंकर की बुकिंग रक्सौल के लिए बंद करने, रामगढ़वा में शिफ्टिंग के निर्णय को निरस्त करने और सीधे सिरिसिया (नेपाल) के लिए बुकिंग ओपन किये जाने की माँग की गई है।
वहीं डा. शलभ ने क्लिंकर मामले के कारण पैदा हो रही विकट परिस्थितियों से मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार एवं उप मुख्यमंत्री श्री सुशील मोदी को भी मेल के जरिये अवगत कराया है।
विदित है कि इस मामले में गत 9 दिसंबर को डा. शलभ द्वारा पीएमओ में एक एडिशनल अपील दाखिल की गई थी , जिसे पीएमओ के अवर लोक सचिव श्री अंबुज शर्मा ने रजिस्टर किया था।डा. शलभ द्वारा 2012 में दर्ज सार्वजनिक परिवाद के आलोक में रक्सौल में क्लिंकर उतराई मामले का निष्पादन करते हुए गत 13 अक्टूबर 2016 को पीएमओ एवं रेल मंत्रालय द्वारा क्लिंकर को रक्सौल से रामगढ़वा शिफ्ट किये जाने के निर्णय के साथ लेटर ऑफ डिस्पोजल जारी कर दिया गया था। जबकि डा. शलभ के इन प्रयासों का लक्ष्य नेपाल के सीमेंट उद्योगों के लिए उपयोग में आने वाले इस डस्ट मेटेरियल को सीधे सिरिसिया ड्राईपोर्ट (नेपाल) के खुले क्षेत्र में भेजवाने की योजना थी। इस बीच रामगढ़वा में द्वारा शेड निर्माण की निविदा निकाली गई ।जिसके तहत वहां निर्माण कार्य चल रहा है।
रामगढ़वा स्टेशन के समीप ही श्री गणेश महावीर +2 उच्च माध्यमिक विद्यालय एवं एम. के. मिशन हाई स्कूल स्थित हैं। जहाँ दो हजार से अधिक बच्चे पढ़ते हैं। रक्सौल से रामगढ़वा में स्थानांतरित होने के बाद वहां भी स्टेशन के आसपास का इलाका क्लिंकर के प्रदूषण से बुरी तरह प्रभावित होगा और जनजीवन संकट में पड़ जाएगा।
इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि मालगाड़ी से आये क्लिंकर को रक्सौल मालगोदाम पर उतारकर उसे ट्रक से नेपाल ले जाया जाता है। जाहिर है कि यह मेटेरियल नेपाल में प्रतिबंधित नहीं है। फिर उसी मेटेरियल को उसी मालगाड़ी से सीधे नेपाल भेजे जाने में पाबंदी का क्या औचित्य है ।जबकि सिरिसिया (नेपाल) तक रेल लाइन चालू है और इस लाइन पर मालगाड़ियों का बाकायदा परिचालन भी हो रहा है।
सरकार द्वारा इस मामले की जमीनी सच्चाई को भी संज्ञान में लिए जाने की अपील की गई है।
क्लिंकर वर्षों से इस सीमाई क्षेत्र के लोगों के लिए अभिशाप बना हुआ है। इसके जहरीले प्रदूषण पूरे शहर को अपनी चपेट में ले चुका है । जिसकी वजह से सैकड़ों लोग सांस और फेफड़ों की बीमारी का शिकार हो चुके हैं। दर्जनों लोग अपनी जान गवां चुके हैं। इस मुद्दे को लेकर यहां आमरण अनशन तक हो चुका है।
इस संवेदनशील मामले को मानवाधिकार उल्लंघन से जोड़ते हुए रेल मंत्रालय द्वारा त्वरित कार्रवाई किये जाने की मांग की गई है।
डी.एन.कुशवाहा ,रामगढ़वा
रक्सौल :- रक्सौल रेलवे स्टेशन पर क्लिंकर की उतराई बंद कर मालगाड़ी को सीधे सिरिसिया (नेपाल) भेजे जाने और रामगढ़वा में शिफ्टिंग रोकने को लेकर शिक्षाविद् प्रो. डा. स्वयंभू शलभ द्वारा गत 13 दिसंबर को रेल मंत्रालय में रेलवे पॉलिसी एण्ड रेगुलेटरी के तहत मामला दर्ज कराया गया था। जिस पर तत्काल संज्ञान लेते हुए पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के उप महाप्रबंधक श्री ए. के. झा से इस मामले में रिपोर्ट मांगी गई है।
इस याचिका में किसी भी बुकिंग प्वाइंट से क्लिंकर की बुकिंग रक्सौल के लिए बंद करने, रामगढ़वा में शिफ्टिंग के निर्णय को निरस्त करने और सीधे सिरिसिया (नेपाल) के लिए बुकिंग ओपन किये जाने की माँग की गई है।
वहीं डा. शलभ ने क्लिंकर मामले के कारण पैदा हो रही विकट परिस्थितियों से मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार एवं उप मुख्यमंत्री श्री सुशील मोदी को भी मेल के जरिये अवगत कराया है।
विदित है कि इस मामले में गत 9 दिसंबर को डा. शलभ द्वारा पीएमओ में एक एडिशनल अपील दाखिल की गई थी , जिसे पीएमओ के अवर लोक सचिव श्री अंबुज शर्मा ने रजिस्टर किया था।डा. शलभ द्वारा 2012 में दर्ज सार्वजनिक परिवाद के आलोक में रक्सौल में क्लिंकर उतराई मामले का निष्पादन करते हुए गत 13 अक्टूबर 2016 को पीएमओ एवं रेल मंत्रालय द्वारा क्लिंकर को रक्सौल से रामगढ़वा शिफ्ट किये जाने के निर्णय के साथ लेटर ऑफ डिस्पोजल जारी कर दिया गया था। जबकि डा. शलभ के इन प्रयासों का लक्ष्य नेपाल के सीमेंट उद्योगों के लिए उपयोग में आने वाले इस डस्ट मेटेरियल को सीधे सिरिसिया ड्राईपोर्ट (नेपाल) के खुले क्षेत्र में भेजवाने की योजना थी। इस बीच रामगढ़वा में द्वारा शेड निर्माण की निविदा निकाली गई ।जिसके तहत वहां निर्माण कार्य चल रहा है।
रामगढ़वा स्टेशन के समीप ही श्री गणेश महावीर +2 उच्च माध्यमिक विद्यालय एवं एम. के. मिशन हाई स्कूल स्थित हैं। जहाँ दो हजार से अधिक बच्चे पढ़ते हैं। रक्सौल से रामगढ़वा में स्थानांतरित होने के बाद वहां भी स्टेशन के आसपास का इलाका क्लिंकर के प्रदूषण से बुरी तरह प्रभावित होगा और जनजीवन संकट में पड़ जाएगा।
इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि मालगाड़ी से आये क्लिंकर को रक्सौल मालगोदाम पर उतारकर उसे ट्रक से नेपाल ले जाया जाता है। जाहिर है कि यह मेटेरियल नेपाल में प्रतिबंधित नहीं है। फिर उसी मेटेरियल को उसी मालगाड़ी से सीधे नेपाल भेजे जाने में पाबंदी का क्या औचित्य है ।जबकि सिरिसिया (नेपाल) तक रेल लाइन चालू है और इस लाइन पर मालगाड़ियों का बाकायदा परिचालन भी हो रहा है।
सरकार द्वारा इस मामले की जमीनी सच्चाई को भी संज्ञान में लिए जाने की अपील की गई है।
क्लिंकर वर्षों से इस सीमाई क्षेत्र के लोगों के लिए अभिशाप बना हुआ है। इसके जहरीले प्रदूषण पूरे शहर को अपनी चपेट में ले चुका है । जिसकी वजह से सैकड़ों लोग सांस और फेफड़ों की बीमारी का शिकार हो चुके हैं। दर्जनों लोग अपनी जान गवां चुके हैं। इस मुद्दे को लेकर यहां आमरण अनशन तक हो चुका है।
इस संवेदनशील मामले को मानवाधिकार उल्लंघन से जोड़ते हुए रेल मंत्रालय द्वारा त्वरित कार्रवाई किये जाने की मांग की गई है।

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