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प्रा.स्वा.केन्द्र रामगढ़वा में कार्यरत संविदा कर्मचारी व चिकित्सकों ने किया मुख्यमंत्री का पुतला दहन

प्रा.स्वा.केन्द्र रामगढ़वा में कार्यरत संविदा कर्मचारी व चिकित्सकों ने किया मुख्यमंत्री का पुतला दहन 
डी.एन.कुशवाहा, रामगढ़वा
रामगढ़वा-हड़ताल पर बैठे स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों ने शनिवार को किया मुख्यमंत्री नीतिश कुमार का पुतला दहन।ज्ञात हो कि स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति बिहार सरकार के उदासीन नीति की वजह से बिहार राज्य स्वास्थ्य संविदा कर्मचारी संघ के आह्वान पर स्थानीय प्रा.स्वा.केंद्र में कार्यरत संविदा कर्मचारी व चिकित्सकों ने अपनी सात सूत्री मांगों के समर्थन में शनिवार को दिल्ली-काठमांडू मुख्य फथ के रामगढ़वा महावीर मंदिर चौक पर हड़ताल के पाँचवें दिन मुख्यमंत्री नीतिश कुमार का पुतला दहन किया। इस अवसर पर
पुतला दहन करते हड़ताल कर्मी
उपस्थित चिकित्सकाकर्मियों एवं गणमान्य लोगों को संबोधित करते हुए संघ के प्रवक्ता सुशान्त कुमार ने बताया कि सभी कर्मचारियों का नियमितीकरण , 65 वर्ष की आयु तक स्थायी सेवा, सामान काम-सामान वेतन, संजीवनी डाटा ऑपरेटर का जिला स्वास्थ्य समिति में बिना शर्त समायोजन तथा आशा -ममता कार्यकर्ता के मानदेय का निर्धारण आदि की मांगे पुरी नहीं करने के कारण आज मजबूरन सभी स्वास्थ्यकर्मियों ने मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया। साथ ही उन्होंने कहा कि जब तक सरकार द्वारा हमारी माँगे पुरी नहीं कर देती है, तब तक यह हड़ताल व आंदोलन
धरना पर बैठे हड़ताल कर्मी
जारी रहेगा। इस पुतला दहन कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ. प्रहस्त कुमार, अशोक कुमार पोद्दार, प्रवीण कुमार पांडेय, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक आयुषी वर्मा, प्रमोद कुमार बैठा, गौतम पांडेय, मो. इरशाद अंसारी, डॉ. बशरूद्दीन साबिर, डॉ.राहुल, डॉ. अजीमुर्ररहमान , डॉ. चंद्रभूषण सिंह, रूबी देवी, गीता देवी, तृप्ति कुमारी, मीना कुमारी, प्रेमलता कुमारी, शुशीला देवी , पूनम देवी, किरण देवी, रामसखी देवी, रीना देवी, प्रियंका देवी सहित सभी प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधन ईकाई के कर्मी, अनुबंधित चिकित्सक, आयुष चिकित्सक, आर.बी.एस.के. चिकित्सक,कर्मी तथा आशा-ममता कार्यकर्ता आदि शामिल थे। गौरतलब हो कि                                                         चिकित्साकर्मियों के हड़ताल पर चले जाने से प्रखंड के लगभग साढ़े तीन लाख की आबादी वाला रामगढ़वा प्राथमिक स्वास्थ्य प्रभावित हो गया है,और यहाँ की स्थिति बिलकुल चरमरा गई । विदित हो कि स्वास्थ्य कर्मियों के हड़ताल पर चले जाने की वजह से प्रखंड क्षेत्र के मरीज  निजी चिकित्सकों से अपना उपचार कराने तथा बाहरी दवा दुकानों से दवा खरीदने को विवश हैं। ज्ञात हो कि पैसे वाले लोगों को तो ज्यादा परेशानी नहीं हो रही है लेकिन गरीब ,लाचार व मजबूर मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है ।

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