रक्सौल प्रखंड परिसर बना तालाब, आंख मूंदकर देख रहे हैं सभी पदाधिकारी एवं जनप्रतिनिधि
रक्सौल प्रखंड परिसर बना तालाब, आंख मूंदकर देख रहे हैं सभी पदाधिकारी एवं जनप्रतिनिधि
चंपारण टुडे से डी.एन.कुशवाहा की रिपोर्ट-
रक्सौल-स्थानीय अनुमंडल कार्यालय के नाक के नीचे अवस्थित रक्सौल प्रखंड कार्यालय इन दिनों तालाब में तब्दील हो गया है। इसी रास्ते से अनुमंडल पदाधिकारी, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, बीडीयो तथा सीओ सहित तमाम अन्य पदाधिकारी अपने कार्यालय में जाते हैं । लेकिन किसी भी पदाधिकारी का नजर इस परिसर की तरफ नहीं है । जहां रात दिन वकीलों एवं मुखतारों को बैठकर अपना कार्य संपन्न करना होता है। प्रखंड, अनुमंडल के पदाधिकारियों की कलम से लाखों रुपए की निकासी होती है और क्षेत्र का विकास होता है। लेकिन रक्सौल प्रखंड परिसर वर्षों से गड्ढेनुमा बना हुआ है ।फिर भी कोई भी पदाधिकारी इसमें मिट्टी या राबिस भरवाने की जरूरत महसूस नहीं कर रहे हैं। जिसका खामियाजा आम पब्लिक को भुगतना पड़ रहा है । किसी को गाड़ी लगाने की बात तो दूर पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। इतना ही नहीं पदाधिकारियों के अलावा जनप्रतिनिधि भी प्रतिदिन इस नजारे को देख रहे हैं। उनके आंख पर भी पट्टा लगा हुआ है। वह भी इसे भरवाने की जरूरत महसूश नहीं करते। लगता है इसके लिए जिले या राज्य के कोई पदाधिकारी आएंगे तभी मिट्टी या राबिस भरवाने का काम होगा और आम लोगों की समस्या दूर होगी।
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| प्रखंड परिसर में जल जमाव की तस्वीर |
रक्सौल-स्थानीय अनुमंडल कार्यालय के नाक के नीचे अवस्थित रक्सौल प्रखंड कार्यालय इन दिनों तालाब में तब्दील हो गया है। इसी रास्ते से अनुमंडल पदाधिकारी, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, बीडीयो तथा सीओ सहित तमाम अन्य पदाधिकारी अपने कार्यालय में जाते हैं । लेकिन किसी भी पदाधिकारी का नजर इस परिसर की तरफ नहीं है । जहां रात दिन वकीलों एवं मुखतारों को बैठकर अपना कार्य संपन्न करना होता है। प्रखंड, अनुमंडल के पदाधिकारियों की कलम से लाखों रुपए की निकासी होती है और क्षेत्र का विकास होता है। लेकिन रक्सौल प्रखंड परिसर वर्षों से गड्ढेनुमा बना हुआ है ।फिर भी कोई भी पदाधिकारी इसमें मिट्टी या राबिस भरवाने की जरूरत महसूस नहीं कर रहे हैं। जिसका खामियाजा आम पब्लिक को भुगतना पड़ रहा है । किसी को गाड़ी लगाने की बात तो दूर पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। इतना ही नहीं पदाधिकारियों के अलावा जनप्रतिनिधि भी प्रतिदिन इस नजारे को देख रहे हैं। उनके आंख पर भी पट्टा लगा हुआ है। वह भी इसे भरवाने की जरूरत महसूश नहीं करते। लगता है इसके लिए जिले या राज्य के कोई पदाधिकारी आएंगे तभी मिट्टी या राबिस भरवाने का काम होगा और आम लोगों की समस्या दूर होगी।

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