रक्सौल की कोमल ने चार्टर्ड एकाउंटेंट बन धनोठिया परिवार सहित क्षेत्र का नाम किया रौशन
बेटो से कम नही है बेटियां :रक्सौल की कोमल ने चार्टर्ड एकाउंटेंट बन धनोठिया परिवार सहित क्षेत्र का नाम किया रौशन
डी.एन.कुशवाहा (चम्पारण टुडे)
रक्सौल (पूर्वी चम्पारण) : कहते है कि कडी मेहनत,सच्ची लगन व कुछ कर गुजरने की तमन्ना का परिणाम अक्सर सुखद ही होता है।कामयाबी कदम चूमती है।रक्सौल की कोमल धनोठिया ने इस उक्ति को चरितार्थ किया है।उसने साबित कर दिखाया है कि लड़कियों को मौका मिले,तो,वह भी सफलता के झंडे गाड़ सकती है। शहर के प्रमुख व्यवसायी गोपी राम धानोठीया एवं पार्वती देवी धानोठीया की पौत्री कोमल धनोठिया ने सीए की परीक्षा की तैयारी की।फिर,प्रयासों के बीच परीक्षा में बाजी मार कर मुकाम को हासिल कर दिखाया।कड़ी मेहनत से उसने चार्टर्ड एकाउंटेंट बनने का गौरव हासिल किया है।वह भी पहले प्रयास में।उसने कोलकाता में रहकर तैयारी की और वहीं परीक्षा दे कर यह सफलता हासिल की।कोमल इसका श्रेय अपने पिता गणेश धनोठिया व माता सुशीला धानोठिया समेत गुरुजनो को देती हैं।लायन्स गणेश धनोठिया कहते है कि यह लक्ष्य खुद कोमल ने ही तय किया।सफलता भी पाई।उसने सीपीटी,आईपीसीसी की सभी प्रतियोगिता परीक्षा को प्रथम प्रयास में ही पास किया।फिर,फ़ाइनल परीक्षा भी उतीर्ण कर ली।वे कहते है कि हमने बेटा बेटी में कोई फर्क नही समझा।आज बेटी ने हमें गौरान्वित किया है।बेटीयां किसी से कम नही होती।
![]() |
| कोमल धनोठिया की फाइल फोटो |
रक्सौल (पूर्वी चम्पारण) : कहते है कि कडी मेहनत,सच्ची लगन व कुछ कर गुजरने की तमन्ना का परिणाम अक्सर सुखद ही होता है।कामयाबी कदम चूमती है।रक्सौल की कोमल धनोठिया ने इस उक्ति को चरितार्थ किया है।उसने साबित कर दिखाया है कि लड़कियों को मौका मिले,तो,वह भी सफलता के झंडे गाड़ सकती है। शहर के प्रमुख व्यवसायी गोपी राम धानोठीया एवं पार्वती देवी धानोठीया की पौत्री कोमल धनोठिया ने सीए की परीक्षा की तैयारी की।फिर,प्रयासों के बीच परीक्षा में बाजी मार कर मुकाम को हासिल कर दिखाया।कड़ी मेहनत से उसने चार्टर्ड एकाउंटेंट बनने का गौरव हासिल किया है।वह भी पहले प्रयास में।उसने कोलकाता में रहकर तैयारी की और वहीं परीक्षा दे कर यह सफलता हासिल की।कोमल इसका श्रेय अपने पिता गणेश धनोठिया व माता सुशीला धानोठिया समेत गुरुजनो को देती हैं।लायन्स गणेश धनोठिया कहते है कि यह लक्ष्य खुद कोमल ने ही तय किया।सफलता भी पाई।उसने सीपीटी,आईपीसीसी की सभी प्रतियोगिता परीक्षा को प्रथम प्रयास में ही पास किया।फिर,फ़ाइनल परीक्षा भी उतीर्ण कर ली।वे कहते है कि हमने बेटा बेटी में कोई फर्क नही समझा।आज बेटी ने हमें गौरान्वित किया है।बेटीयां किसी से कम नही होती।

कोई टिप्पणी नहीं
Thanks for your valuable feedback.