पूर्वी चम्पारण (बिहार) : 14 दिनों से रामगढ़वा पोस्ट ऑफिस का लिंक गायब होने से ग्राहकों को परेशानी
*14 दिनों से रामगढ़वा पोस्ट ऑफिस का लिंक गायब*
*10 से 15 लाख रुपये का लेनी-देनी प्रतिदिन हो रहा है प्रभावित*
*प्रखंड के 16 पंचायतों एवं 19 ग्रामीण डाक घरों के जमाकर्ता बेहाल*
डी.एन.कुशवाहा (चम्पारण टुडे) रामगढ़वा से रिपोर्टिंग
रामगढ़वा : सरकार के लाख दावे के बावजूद नहीं सुधर रही है ग्रामीण इलाकों की बैंकिंग का नेटवर्किंग व्यवस्था। भारतीय पोस्टल विभाग में कर्मचारी तो प्रतिदिन उपस्थित होते हैं ,डाक विभाग से जुड़े सभी उपभोक्ता दूर देहात से आकर अपने काम के लिए उसके काउंटर पर कतार लगाकर प्रतिदिन खड़ा होते हैं परंतु उनका काम नहीं होता है । इन सारी समस्याओं से जूझ रहा है भारतीय पोस्ट ऑफिस का रामगढ़वा शाखा। विगत 14 जुलाई 2017 से गायब है रामगढ़वा पोस्ट ऑफिस का लिंग। जो व्यक्ति सिर्फ रामगढ़वा पोस्ट ऑफिस की बैकिंग व्यवस्था पर निर्भर हैं, यह भली-भांति अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनका क्या हाल होगा । पोस्ट ऑफिस के एक अभिकर्ता दीपक कुमार गुप्ता का कहना है कि पहले पोस्ट ऑफिस का काम जब मेनुअल होता था तो प्रतिदिन काम निबट जाता था और कोई भी व्यक्ति खाली हाथ वापस नहीं जाता था। लेकिन फरवरी 2016 में बिना किसी अतिरिक्त छतरी के सिर्फ बीएसनएल के लिंग पर निर्भर होकर आनन-फानन में ऑनलाइन की शुरुआत कर दी गई । जिसका खामियाजा आज जमाकर्ता को भुगतना पड़ रहा है। एक जमाकर्ता और आर्मी के जवान तथा भूमिहार टोला सतीपुरा गांव निवासी बंका पांडे के पुत्र कमलेश पांडे ने बताया कि मैं विगत 12 -13 दिनों से प्रतिदिन अपने एमआईएस की राशि का निकासी कराने के लिए आता हूँ और लिंग के अभाव में वापस चला जाता हूँ। वहीं रामगढ़वा बाजार निवासी नागेश्वर प्रसाद ने बताया कि मैं अपने ग्रामीण डाक जीवन बीमा के रिनुअल की राशि जमा कराने के लिए प्रतिदिन आता हूँ और वापस चला जाता हूँ।जबकि राशि जमा करने का अंतिम तिथि 30 जुलाई ही निर्धारित है ।इस बाबत डाक बाबू चंद्रेश्वर तिवारी एवं ऑफिस सहाय्यक मो. हबीब ने बताया कि विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत लाखों रुपये का फॉर्म भरकर रखा हुआ है लेकिन लिंग के अभाव में रशीद नहीं कट रहा है। साथ ही दोनों पदाधिकारियों ने बताया कि हमलोगों ने इस संबंध में दूरसंचार विभाग के एसडीओ एवं वरीय पदाधिकारी को बहुत पहले ही इसकी सूचना दे दी है। लेकिन आज तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। यदि समय रहते लिंग की अतिरिक्त व्यवस्था नहीं की गई तो पोस्टल विभाग को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा।
*10 से 15 लाख रुपये का लेनी-देनी प्रतिदिन हो रहा है प्रभावित*
*प्रखंड के 16 पंचायतों एवं 19 ग्रामीण डाक घरों के जमाकर्ता बेहाल*
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| रामगढ़वा पोस्ट ऑफिस के बाहर अपना पैसा जमा कराने के लिए लाइन में खड़े उपभोक्ता |
रामगढ़वा : सरकार के लाख दावे के बावजूद नहीं सुधर रही है ग्रामीण इलाकों की बैंकिंग का नेटवर्किंग व्यवस्था। भारतीय पोस्टल विभाग में कर्मचारी तो प्रतिदिन उपस्थित होते हैं ,डाक विभाग से जुड़े सभी उपभोक्ता दूर देहात से आकर अपने काम के लिए उसके काउंटर पर कतार लगाकर प्रतिदिन खड़ा होते हैं परंतु उनका काम नहीं होता है । इन सारी समस्याओं से जूझ रहा है भारतीय पोस्ट ऑफिस का रामगढ़वा शाखा। विगत 14 जुलाई 2017 से गायब है रामगढ़वा पोस्ट ऑफिस का लिंग। जो व्यक्ति सिर्फ रामगढ़वा पोस्ट ऑफिस की बैकिंग व्यवस्था पर निर्भर हैं, यह भली-भांति अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनका क्या हाल होगा । पोस्ट ऑफिस के एक अभिकर्ता दीपक कुमार गुप्ता का कहना है कि पहले पोस्ट ऑफिस का काम जब मेनुअल होता था तो प्रतिदिन काम निबट जाता था और कोई भी व्यक्ति खाली हाथ वापस नहीं जाता था। लेकिन फरवरी 2016 में बिना किसी अतिरिक्त छतरी के सिर्फ बीएसनएल के लिंग पर निर्भर होकर आनन-फानन में ऑनलाइन की शुरुआत कर दी गई । जिसका खामियाजा आज जमाकर्ता को भुगतना पड़ रहा है। एक जमाकर्ता और आर्मी के जवान तथा भूमिहार टोला सतीपुरा गांव निवासी बंका पांडे के पुत्र कमलेश पांडे ने बताया कि मैं विगत 12 -13 दिनों से प्रतिदिन अपने एमआईएस की राशि का निकासी कराने के लिए आता हूँ और लिंग के अभाव में वापस चला जाता हूँ। वहीं रामगढ़वा बाजार निवासी नागेश्वर प्रसाद ने बताया कि मैं अपने ग्रामीण डाक जीवन बीमा के रिनुअल की राशि जमा कराने के लिए प्रतिदिन आता हूँ और वापस चला जाता हूँ।जबकि राशि जमा करने का अंतिम तिथि 30 जुलाई ही निर्धारित है ।इस बाबत डाक बाबू चंद्रेश्वर तिवारी एवं ऑफिस सहाय्यक मो. हबीब ने बताया कि विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत लाखों रुपये का फॉर्म भरकर रखा हुआ है लेकिन लिंग के अभाव में रशीद नहीं कट रहा है। साथ ही दोनों पदाधिकारियों ने बताया कि हमलोगों ने इस संबंध में दूरसंचार विभाग के एसडीओ एवं वरीय पदाधिकारी को बहुत पहले ही इसकी सूचना दे दी है। लेकिन आज तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। यदि समय रहते लिंग की अतिरिक्त व्यवस्था नहीं की गई तो पोस्टल विभाग को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा।

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