वैशाली महोत्सव में बालू पर चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष का ऐतिहासिक नजारा बना आकर्षण का केंद्र
*वैशाली महोत्सव में बालू पर चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष का ऐतिहासिक नजारा बना आकर्षण का केंद्र*
*सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र ने वैशाली महोत्सव में 1000 रेत पर बनायीं बटी पढ़ाओ बेटी बचाओ तथा चम्पारण सत्याग्रह सताब्दी वर्ष पर आधारित भब्य प्रतिमा*
*सैंड शिल्प व् पेंटिग के लिए देश के राज्यों तथा विदेशों में भी हो चूका हैं पुरस्कृत*
वैशाली : विश्व प्रसिद्ध लोकतंत्र की जननी वैशाली महोत्सव में लगभग एक हजार टन रेत पर बने कलाकृति को देख हर कोई मोहित हो रहा हैं. जिला प्रशाशन वैशाली के द्वारा आमंत्रित पूर्वी चम्पारण के युवा सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र अपनी सैंड आर्ट महोत्सव के मुख्य सांस्कृतिक पंडाल के ठीक सामने बनायीं हैं. पुरे महोत्सव में अलग ही ढंग का आकर्षण बना हैं. उसने केंद्र सरकार की बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम तथा महात्मा गांधी की कर्मभूमि बिहार के चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष पर आधारित कलाकृति बनायीं हैं और विश्व स्तर पर इसके जरिये सैंड आर्ट के क्षेत्र में अपनी पहचान स्थापित किया हैं। पर्यटन विभाग के सांस्कृतिक पंडाल के प्रवेश द्वार के सामने रेत बनी यह भब्य अकलाकृति दिखाई पड़ती हैं. मनमोहक इतना की दर्शक फोटोग्राफी करना व् सेल्फ़ी लेना जरुरी समझ रहे हैं।
वीर कुँवर सिंह विश्वविद्यालय से संबद्ध कला एवं शिल्प महाविद्यालय भोजपुर में वह मूर्तिकला विषय लेकर अध्यनरत हैं। देश-विदेश तथा राज्य और राज्य से बाहर कई मेलों, महोत्सवों व् सरकारी आयोजनों में सैंड आर्ट व् पेंटिंग के नमूनें प्रदर्शित कर चूका हैं। कला के बदौलत उसे कई पुरष्कार भी मिले पर उसकी सबसे बड़ी ट्रेजडी यह हैं कि महोत्सव और मेलों में अपनी कला प्रदर्शित करने के लिए सरकारी स्तर पर कोई वित्तीय मदद नहीं की जाती. उसके समक्ष आर्थिक कठिनाईयां हैं फिर भी अपनी कोशिशों में वह कमजोर नहीं दिखता और पूरी बुलंदी के साथ अपनी साधना में रत हैं. कहता हैं कोशिश करनेवालों की हार नही होती. मंजिल मिलतीं हैं.
सैंड आर्ट के माध्यम से अभी तक वह नशा का दुष्प्रभाव, मानव स्वास्थय, भारतीय नृत्य, देवी- देवताओं की प्रतिमाएं, नारी उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, गरीबी, मजदुर शोषण, पर्यावरण संरक्षण, जनसंख्या नियंत्रण, महत्वपूर्ण तिथियों तथा प्राकृतिक आपदाओं और देश-दुनियाभर की ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित कलाकृतियां बना चुके हैं. उसके खाते में सैकड़ो पुरस्कार हैं. भविष्य में ऊँचाई की सारी संभावनाएं लिए यह कलाकार अपने लक्ष्य की बढ़ता जा रहा हैं।
*सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र ने वैशाली महोत्सव में 1000 रेत पर बनायीं बटी पढ़ाओ बेटी बचाओ तथा चम्पारण सत्याग्रह सताब्दी वर्ष पर आधारित भब्य प्रतिमा*
*सैंड शिल्प व् पेंटिग के लिए देश के राज्यों तथा विदेशों में भी हो चूका हैं पुरस्कृत*
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| वैशाली महोत्सव में अपनी कलाकृति के साथ सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र। |
वीर कुँवर सिंह विश्वविद्यालय से संबद्ध कला एवं शिल्प महाविद्यालय भोजपुर में वह मूर्तिकला विषय लेकर अध्यनरत हैं। देश-विदेश तथा राज्य और राज्य से बाहर कई मेलों, महोत्सवों व् सरकारी आयोजनों में सैंड आर्ट व् पेंटिंग के नमूनें प्रदर्शित कर चूका हैं। कला के बदौलत उसे कई पुरष्कार भी मिले पर उसकी सबसे बड़ी ट्रेजडी यह हैं कि महोत्सव और मेलों में अपनी कला प्रदर्शित करने के लिए सरकारी स्तर पर कोई वित्तीय मदद नहीं की जाती. उसके समक्ष आर्थिक कठिनाईयां हैं फिर भी अपनी कोशिशों में वह कमजोर नहीं दिखता और पूरी बुलंदी के साथ अपनी साधना में रत हैं. कहता हैं कोशिश करनेवालों की हार नही होती. मंजिल मिलतीं हैं.
सैंड आर्ट के माध्यम से अभी तक वह नशा का दुष्प्रभाव, मानव स्वास्थय, भारतीय नृत्य, देवी- देवताओं की प्रतिमाएं, नारी उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, गरीबी, मजदुर शोषण, पर्यावरण संरक्षण, जनसंख्या नियंत्रण, महत्वपूर्ण तिथियों तथा प्राकृतिक आपदाओं और देश-दुनियाभर की ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित कलाकृतियां बना चुके हैं. उसके खाते में सैकड़ो पुरस्कार हैं. भविष्य में ऊँचाई की सारी संभावनाएं लिए यह कलाकार अपने लक्ष्य की बढ़ता जा रहा हैं।

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