खाद्यान्न माफियाओं की मिलीभगत से मार्च महीने के खाद्यान्न की कालाबाजारी का आरोप, एसडीएम और एम ओ पर भी उठी उंगलियां
नरेंद्र झा,मोतिहारी, वरीय संवाददाता। सिकरहना अनुमंडल के घोड़ासहन प्रखंड में पीडीएस दुकानों की हुई जांच के कालाबाजारी का मामला पकड़ में आया है। इस मामले में आधा दर्जन कोटेदारों पर स्थानीय थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। लेकिन इस मामले के बाद आपूर्ति विभाग से जुड़े अधिकारियों पर भी आरोप लगने लगा है।राजद के पूर्व विधायक लक्ष्मी नारायण यादव ने दूरभाष पर बताया है कि सिकरहना अनुमंडल के अधीन कथित खाद्यान्न माफियाओं और प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी की मिलीभगत से लगभग सभी पीडीएस के दुकानदारों ने मार्च माह का खाद्यान्न बेच दिया है।
इसमें स्थानीय स्तर पर एसडीएम का भी साथ होता है क्योंकि इस काली कमाई में एक बड़ी रकम उन्हें भी मिलती है।
श्री यादव ने चिरैया प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी पर अनेक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें चिरैया अतिरिक्त प्रभार में दिया गया है जिसके कारण वे यहां अपने कथित दलाल के माध्यम से केवल अवैध उगाही कराते हैं, जनता की परेशानियों से उन्हें कोई लेना देना नहीं है।उनका आरोप है कि एसडीएम के शह पर एम ओ ने डीलरों का भरपूर भयादोहन किया है। झूठा स्पष्टीकरण मांगा गया और उसकी आड़ लाखों रुपए डेरा कर वसूल लिए गए। पूर्व विधायक श्री यादव ने बताया कि जनवरी माह में नया पंजी खोलने व सत्यापन के नाम पर डीलरों से पांच पांच हजार रुपए वसूले गए।
इतना ही नहीं लगभग एक करोड़ रुपए की कालाबाजारी की बात उजागर कर पुनः उसे दबाने के लिए एम ओ और एसडीएम ने चिरैया के उन कथित आरोपी डीलरों से करीब चालिस लाख रुपए वसूल लिए।पूरे चिरैया क्षेत्र इस बात की चर्चा है और स्थानीय जनता यह सारी बातें बतातीं है। उन्होंने ने घोड़ासहन का मामला बताते हुए कहा कि जब वहां की जनता गोलबंद हुई तब मजबूर होकर जांच की गई और कालाबाजारी उजागर हुई, ऐसे ही चिरैया, ढाका, पताही प्रखंडों में पूरे मार्च महीने का खाद्यान्न कालाबाजारी में बेची गई है और जब मामला उजागर हो रहा है तब उसे किसी तरह मैनेज करने की कोशिश हो रही है। पूर्व विधायक श्री यादव ने डीएम मोतिहारी से एक उच्च स्तरीय जांच टीम से सिकरहना अनुमंडल में व्याप्त खाद्यान्न लूट की जांच कराने की मांग की है।
बताते हैं कि सिकरहना अनुमंडल अंतर्गत कुल 35813.15 क्वींटल खाद्यान्न आवंटित किए गए हैं जिसमें ढाका प्रखंड में 5254.70 क्वींटल गेहूं,7882.05 क्वींटल चावल का उठाव पीडीएस डीलरों द्वारा किया गया।इसी तरह चिरैया में 4277.34 क्वींटल गेहूं ,6416.01 चावल, बनकटवा में 1865.50 गेहूं,2798.25 क्वींटल चावल का आवंटन मिला है। घोड़ासहन के लिए 4391.58 क्वींटल गेहूं तथा 7319.30 क्वींटल चावल पीडीएस के लिए दिया गया।अमुनन सभी पीडीएस दुकानदारों ने खाद्यान्न का उठाव कर लिया है लेकिन कथित खाद्यान्न माफियाओं व विभाग के अधिकारी की सांठगांठ से गरीबों का निवाला कालाबाजारी के लिए चला गया। वैसे तो खाद्यान्न की कालाबाजारी कोई नयी बात नहीं है कि आज जब कोरोना को लेकर लोग घरों में बंद हैं और उनका रोजगार बंद है तब उन्हें सरकारी खाद्यान्न ही उम्मीद है, ऐसे में उनके मुंह का निवाला छिनना चर्चाओं में है।
हालांकि लोगों का यह भी मानना है कि इस जांच से कुछ होना नहीं है, ऐसे आरोप और जांच बराबर होते,लगते रहते हैं ,समय के साथ सब मैनेज हो जाता है। भ्रसटाचार के अनेक मामले जांच के लिए महीनों, सालों से दबी पड़ी है ,देखता कौन है। जिसपर आरोप वहीं जांच कर्ता तो फिर क्या होना है,इस तरह की बातें आम लोग कहते हैं। बहरहाल, इसमें संदेह नहीं कि भ्रसटाचार की जड़ें मजबूत है और कालाबाजारियों के सिंडिकेट का जाल बड़ा है लेकिन पानी में मछली चाहे जितना तैर ले एक न एक दिन जाल में फंस ही जाती है।

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