सारण : हिन्दुस्तान के प्रसिद्ध धार्मिक केन्द्रों मे सुविख्यात है कोठिया-नरांव की प्राचीन भू-खंड पर स्थित सूर्य मंदिर
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उत्तर बिहार के सारण जिले के गडखा प्रखंडअंतर्गत कोठिया-नरांव की प्राचीन भू-खंड पर स्थित सूर्य मंदिर न सीर्फ बिहार मे बल्कि हिन्दुस्तान के प्रसिद्ध धार्मिक केन्द्रों मे सुविख्यात है। यह प्रसिद्ध धाम मनोकामना पूरनी धाम के रूप मे भक्तो के मनोरथ पूर्ण करने के कारण बनता जा रहा है ।यहाॅ वैसे सभीं भक्तो के मनोरथ पूर्ण होते है जो सच्चे मन से यहाॅ आकर छठ व्रत करता है व पूजा करके मन्नत रखता है उसके मनोरथ जरूर पूपूर्ण होते है।मनोरथ पूर्ण हो जाने पर वह यहाॅ आकर छठ व्रत करता है और रात मे यहीं पर कोशी भरता है और रात्री विश्राम करता है। व्रती व उसके परिवार के सदस्य यही रात्री मे भजन किर्तन करते है और भगवान सूर्य को रिझाते है।
स्थानीय थाना क्षेत्र के बैरिया पंचायत के खुगनी गांव के निवासी गुड्डू गिरी को दहेज लेने और पत्नी को धमकाने के जुर्म में गिरफ्तार किया गया हैं। खरना का प्रसाद व अर्घ्य अर्पित करने के लिए यहीं प्रसाद बनाते है। व्रति व उनके परिजन सूर्य मन्दिर परिसर मे रहकर छठ व्रत करते है और भगवान सूर्य के मंदिर मे पूजा अर्चन कर कथा श्रवण करते है। सारण की धरती पर स्थित इस सुविख्यात सूर्यमंदिर धाम पर पधारकर विहंगम दृश्यावलोकन करने की इच्छा सबों के मन मे बनी रहती है पूरी और औरंगा वाद के देव सूर्य मंदिर जैसा यहाॅ छठ पूजा के दिन विहंग दृश्य रहता है जो व्रतियो व दर्शनार्थीयो के लिए आकर्षण का केंद्र रहता है।यहाॅ के सप्तऋषि श्री श्री 1008 श्री ऋषि दास जी महाराज, सप्तऋषि श्री श्री1008 श्री नारायण दास जी महाराज, सप्तऋषि श्री श्री 1008 श्री श्लोक दास जी महाराज ,सप्तऋषि श्री श्री 1008 श्री रामदास जी महाराज, सप्तऋषि श्री श्री 1008 श्री जुगेश्वर दास जी महाराज, सप्तऋषि श्री श्री 1008 श्री सीता राम दास जी महाराज, सप्तऋषि श्री श्री 1008 श्री जयराम दास जी महाराज,सप्तऋषि श्री श्री 1008 श्री महाबीर दास जी महाराज ने इस स्थल को तपो भूमि के रूप मे विख्यात बनाने हेतु अपने संपूर्ण जीवन अर्पित कर दिया। वर्तमान सूर्यमंदिर धाम के पूजेरी श्री श्री 108 श्री मनोहर दास जी महाराज व सहायक महंथ श्री श्री 108 विष्णु दास जी महाराज उर्फ फलाहारी बाबा इस तपो भूमि को अपनी तपस्या व भक्ति से सिंचित कर रहे है।
स्थानीय थाना क्षेत्र के बैरिया पंचायत के खुगनी गांव के निवासी गुड्डू गिरी को दहेज लेने और पत्नी को धमकाने के जुर्म में गिरफ्तार किया गया हैं। वर्तमान पूजेरियो द्वारा इस धाम को देदीप्यमान बनाये रखने हेतु तपस्या व उपासना जारी है। दिनों दिन इस धाम की महता बढती जा रही है। जिससे यह स्थल बीसवी सदी के उतरार्ध से प्रसिद्धि पा लिया है। इस ऐतिहासिक स्थल पर स्थापित सूर्य मंदिर का उदय यूॅ ही नही हुआ इसके लिए अयोध्या, मथुरा, वृंदावन, द्वारका, राॅची, फतेहा, जलंधर, मथुरा, जनकपुर, असम, के प्रधान महंथो से सूर्य मंदिर धाम की स्थापना के सभी मंत्र ग्रहण करने के बाद इस तपो भूमि पर सूर्य मंदिर स्थापित हुआ।सूर्य मंदिर का नौकुडी महा यज्ञ आरंभ होने के दिन विधिवत उद्धाटन तत्कालीन सारण जिला समाहर्ता(जिलाधिकारी )व्यास जी,पुलिस कप्तान (एस पी सारण) सी आर कसावन,कार्यपालक डंडाधिकारी जे प्रसाद ने 26 अप्रैल 1990 को की इस अवसर पर छपरा के वरिष्ठ अधिवक्ता ललित कुमार,मंदिर के संस्थापक प्रधान पूजेरियो के अलावे भारत के कोने-कोने से आये तफस्वी संत समाज व आस-पास के हजारो सेवक समाज व भक्त उपस्थित थे।यद्यपि राम जानकी तथा शिव मंदिर का इतिहास हजारों वर्ष पूराणा है ।जिसकी जानकारी जुटाने का कोई साक्ष्य उपलब्ध नही है 15 अगस्त 1947 मे आजादी प्राप्ति के बाद से इस स्थल का पुनर उद्धार व विकास कार्य शुरू हुआ तब से आज तक यहाॅ तीन मंदिर दो, यज्ञशाला, एक धर्शाला ,बृहद गौशाला,कोसी कुण्य सूर्य जल कुण्ड, पक्का घाट,कुॅआ का पक्कीकरण व जगत निर्माण,सूर्य मंदिर परिस की घेराबंदि हेतु चारो दिशाओ से पीलर निर्माण,जलाशय टंकी निर्माण, चबुतरा निर्माण सूर्य कुण्ड का चहारदिवारी निर्माण आदि कार्य हुआ।ये सभी बडे कार्य चंदा एकत्र कर जनसहयोग से किया गया सरकारी स्तर पर सीर्फ यात्री शिविर (धर्मशाला) का निर्माण हुआ धर्मशाला गरखा के पूर्व विधायक ज्ञानचंद माझी ने किया।वर्तमान मे यहा स्थानीय सांसद मद से हाई मास्क लाईट लगाने का कार्य चल रहा है।इसके अलावे वर्तमान सांसद राजीव प्रता रूढी ने 2019 के लोक सभा चुनाव के पूर्व इस स्थल का नीरीक्षण किया और परिसर के चारो तरफ घुमने के बाद सारण के इस अमूल्य धरोहर की प्रशंसा की । उन्होने इस स्थल को पर्यटन केन्द्र के रूप मे विकसित करने का आश्वासन मंदिर पर उपस्थित सैकडो भक्तो व कमिटी के सदस्यो बीच दिया और कहा कि लोक सभा निर्वाचन 2019 के बाद विकास कार्य आरंभ होगा। लेकिन इस स्थल पर अभी तक उनके मद से विकास कार्य आरंभ नही हुआ।
स्थानीय थाना क्षेत्र के बैरिया पंचायत के खुगनी गांव के निवासी गुड्डू गिरी को दहेज लेने और पत्नी को धमकाने के जुर्म में गिरफ्तार किया गया हैं।
स्थानीय थाना क्षेत्र के बैरिया पंचायत के खुगनी गांव के निवासी गुड्डू गिरी को दहेज लेने और पत्नी को धमकाने के जुर्म में गिरफ्तार किया गया हैं। खरना का प्रसाद व अर्घ्य अर्पित करने के लिए यहीं प्रसाद बनाते है। व्रति व उनके परिजन सूर्य मन्दिर परिसर मे रहकर छठ व्रत करते है और भगवान सूर्य के मंदिर मे पूजा अर्चन कर कथा श्रवण करते है। सारण की धरती पर स्थित इस सुविख्यात सूर्यमंदिर धाम पर पधारकर विहंगम दृश्यावलोकन करने की इच्छा सबों के मन मे बनी रहती है पूरी और औरंगा वाद के देव सूर्य मंदिर जैसा यहाॅ छठ पूजा के दिन विहंग दृश्य रहता है जो व्रतियो व दर्शनार्थीयो के लिए आकर्षण का केंद्र रहता है।यहाॅ के सप्तऋषि श्री श्री 1008 श्री ऋषि दास जी महाराज, सप्तऋषि श्री श्री1008 श्री नारायण दास जी महाराज, सप्तऋषि श्री श्री 1008 श्री श्लोक दास जी महाराज ,सप्तऋषि श्री श्री 1008 श्री रामदास जी महाराज, सप्तऋषि श्री श्री 1008 श्री जुगेश्वर दास जी महाराज, सप्तऋषि श्री श्री 1008 श्री सीता राम दास जी महाराज, सप्तऋषि श्री श्री 1008 श्री जयराम दास जी महाराज,सप्तऋषि श्री श्री 1008 श्री महाबीर दास जी महाराज ने इस स्थल को तपो भूमि के रूप मे विख्यात बनाने हेतु अपने संपूर्ण जीवन अर्पित कर दिया। वर्तमान सूर्यमंदिर धाम के पूजेरी श्री श्री 108 श्री मनोहर दास जी महाराज व सहायक महंथ श्री श्री 108 विष्णु दास जी महाराज उर्फ फलाहारी बाबा इस तपो भूमि को अपनी तपस्या व भक्ति से सिंचित कर रहे है।
स्थानीय थाना क्षेत्र के बैरिया पंचायत के खुगनी गांव के निवासी गुड्डू गिरी को दहेज लेने और पत्नी को धमकाने के जुर्म में गिरफ्तार किया गया हैं। वर्तमान पूजेरियो द्वारा इस धाम को देदीप्यमान बनाये रखने हेतु तपस्या व उपासना जारी है। दिनों दिन इस धाम की महता बढती जा रही है। जिससे यह स्थल बीसवी सदी के उतरार्ध से प्रसिद्धि पा लिया है। इस ऐतिहासिक स्थल पर स्थापित सूर्य मंदिर का उदय यूॅ ही नही हुआ इसके लिए अयोध्या, मथुरा, वृंदावन, द्वारका, राॅची, फतेहा, जलंधर, मथुरा, जनकपुर, असम, के प्रधान महंथो से सूर्य मंदिर धाम की स्थापना के सभी मंत्र ग्रहण करने के बाद इस तपो भूमि पर सूर्य मंदिर स्थापित हुआ।सूर्य मंदिर का नौकुडी महा यज्ञ आरंभ होने के दिन विधिवत उद्धाटन तत्कालीन सारण जिला समाहर्ता(जिलाधिकारी )व्यास जी,पुलिस कप्तान (एस पी सारण) सी आर कसावन,कार्यपालक डंडाधिकारी जे प्रसाद ने 26 अप्रैल 1990 को की इस अवसर पर छपरा के वरिष्ठ अधिवक्ता ललित कुमार,मंदिर के संस्थापक प्रधान पूजेरियो के अलावे भारत के कोने-कोने से आये तफस्वी संत समाज व आस-पास के हजारो सेवक समाज व भक्त उपस्थित थे।यद्यपि राम जानकी तथा शिव मंदिर का इतिहास हजारों वर्ष पूराणा है ।जिसकी जानकारी जुटाने का कोई साक्ष्य उपलब्ध नही है 15 अगस्त 1947 मे आजादी प्राप्ति के बाद से इस स्थल का पुनर उद्धार व विकास कार्य शुरू हुआ तब से आज तक यहाॅ तीन मंदिर दो, यज्ञशाला, एक धर्शाला ,बृहद गौशाला,कोसी कुण्य सूर्य जल कुण्ड, पक्का घाट,कुॅआ का पक्कीकरण व जगत निर्माण,सूर्य मंदिर परिस की घेराबंदि हेतु चारो दिशाओ से पीलर निर्माण,जलाशय टंकी निर्माण, चबुतरा निर्माण सूर्य कुण्ड का चहारदिवारी निर्माण आदि कार्य हुआ।ये सभी बडे कार्य चंदा एकत्र कर जनसहयोग से किया गया सरकारी स्तर पर सीर्फ यात्री शिविर (धर्मशाला) का निर्माण हुआ धर्मशाला गरखा के पूर्व विधायक ज्ञानचंद माझी ने किया।वर्तमान मे यहा स्थानीय सांसद मद से हाई मास्क लाईट लगाने का कार्य चल रहा है।इसके अलावे वर्तमान सांसद राजीव प्रता रूढी ने 2019 के लोक सभा चुनाव के पूर्व इस स्थल का नीरीक्षण किया और परिसर के चारो तरफ घुमने के बाद सारण के इस अमूल्य धरोहर की प्रशंसा की । उन्होने इस स्थल को पर्यटन केन्द्र के रूप मे विकसित करने का आश्वासन मंदिर पर उपस्थित सैकडो भक्तो व कमिटी के सदस्यो बीच दिया और कहा कि लोक सभा निर्वाचन 2019 के बाद विकास कार्य आरंभ होगा। लेकिन इस स्थल पर अभी तक उनके मद से विकास कार्य आरंभ नही हुआ।
यह पावन स्थल सैकडो तपस्वियों व मंदिर के भक्तो के श्रम व दान से अभिसिंचित है जिनकी आत्मायें इस स्थल को भारत के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होते देखने की सपना सजाये है बहुत भक्त व तपस्वी संतो तो स्वर्ग सीधार गये लेकिन अभी तक इस ऐतिहासिक स्थल को विकसित करने हेतु पर्यटन मंत्रालय के तरफ से कोई कार्य हुआ न स्थानीय जन प्रतिनिधि के मद से ही विधिवत कार्य शुरू हुआ।संसार को प्रकाशित करने वाले भगवान सूर्य धाम को विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल बनाने का कार्य पता नही कब शुरू होगा।इस स्थल के चारो तरफ मिट्टी के बाॅध से घेरावंदी की गई है जिसके चलते भी यह स्थल असुरक्षित है यहा दो बार मंदिर मे चोरी हो चुका है जबतक चारो तरफ पक्का बाउंड्री नही होता और गेट नही लगता तबतक यह स्थल असुरक्षित है।

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