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सारण : कुपोषण के खिलाफ़ जंग में पोषण पुनर्वास केंद्र दे रहा अहम योगदान



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·एनआरसी सेंटर में सुजीत व सोनाली को मिला जीवन दान
·सुपोषित समाज के निर्माण में आशा कार्यकर्ताओं योगदान अहम


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छपरा। जिले के कुपोषित बच्चों को बेहतर देखभाल प्रदान करने की चुनौती में कमी आई है। इसमें जिले का पोषण पुनर्वास केंद्र अहम योगदान दे रहा है। कुपोषित बच्चों को 14 दिन से 1 माह तक की बेहतर देखभाल एवं गुणवत्तापूर्ण चिकित्सकीय सेवा प्रदान कर स्वस्थ समाज निर्माण में पोषण पुनर्वास केंद्र सहयोग प्रदान कर रहा है। साथ ही अति-कुपोषित बच्चों के लिए यह संजीवीनी भी साबित हो रहा है।   
  

केस स्टडी: 1

रिविलगंज प्रखंड के मुबारकपुर गाँव के निवासी संजीत कुमार के 45 दिन के बेटे सुजीत को पोषण पुनर्वास केंद्र में नया जीवन मिला है। गृह भ्रमण के दौरान मुबारकपुर गाँव की आशा आशा देवी ने संजीत की जाँच कर उसे अति-कुपोषित पाया। सुजीत कुमार के पिता को बिना देर किए जिले के पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती करने की सलाह दी। उसे 19 अगस्त को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया गया। 

सुजीत को मिला नया जीवन: 

पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती के समय सुजीत का वजन मात्र 1.80 ग्राम था। पोषण पुनर्वास केंद्र के चिकित्सकों के अनुसार 4 अगस्त को वजन बढ़ कर 2.16 किलोग्राम हो गया केवल 16 दिनों में  300 ग्राम वजन की बढ़ोतरी हो गई। वही चिकित्सकों ने बताया अगर समय पर सुजीत कुमार को नहीं लाया जाता तो गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न हो सकती थी। चिकित्सक की देख-रेख में सुजीत कुमार  का ईलाज शुरू किया गया। सेहत में सुधार देखते हुए 5 अगस्त को हीं सुजीत कुमार  को घर भेजा गया। बेहतर देखभाल के कारण सुजीत  को नया जीवन दान मिला। 

केस स्टडी: 2

जिले के तरैया प्रखंड के नारायणपुर गांव निवासी रविंद्र साह की पत्नी शोभा देवी ने बताया उनकी दो साल का बेटी सोनाली उम्र के हिसाब से बहुत कमजोर थी। गांव की आशा कार्यकर्ता बबीता देवी एक दिन उनके घर आयी और बच्ची का वजन व स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह दी। जिसके बाद बच्ची का जांच कराया गया तो बच्ची कुपोषित पायी गयी। जिसे तुरंत जिले के एनआरसी केंद्र में भर्ती कराया गया। जहां पर उसका बेहतर इलाज व देखभाल किया गया। भर्ती होने के समय उसका वजन- 6.69 किलोग्राम था। चार दिनों में उसका वजन बढ़कर लगभग 7 किलोग्राम हो गया। शोभा देवी ने बताया कि सही वक़्त आशा की सलाह एवं पोषण पुनर्वास केंद्र में उपलब्ध सुविधा ने मेरी बिटियां को किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या से बचा लिया। आज वह पूर्णता स्वस्थ है। किसी के बच्चे में कोई भी गंभीर समस्या हो तो उसे नजरंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में बच्चे को पोषण पुनर्वास केंद्र जरूर लाना चाहिए।  

15 प्रतिशत वजन में इजाफा जरूरी:


 सिविल सर्जन डॉ. माधवेश्वर झा ने बताया कि  पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चे को 14 दिनों के लिए रखा जाता है। डाक्टर की सलाह के मुताबिक ही डाइट दी जाती है। अगर यहां रखा गया कोई बच्चा 14 दिन में कुपोषण से मुक्त नहीं हो पाता है तो वैसे बच्चों को एक माह तक भी यहां रखे जाने का प्रावधान है। भर्ती हुए बच्चे के वजन में न्यूनतम 15 प्रतिशत की वृद्धि के बाद ही यहाँ से डिस्चार्ज किया जाता है। 

एनआरसी में बच्चे की भर्ती के मानक:

 बच्चे को एनआरसी में भर्ती करने के लिए कुछ मानक निर्धारित किए गए हैं। 6 माह से अधिक एवं 59 माह तक के ऐसे बच्चे जिनकी लंबाई के आधार पर वजन-3 एसडी (स्टैंडर्ड डेविएशन) से कम हो, बच्चे की मिड अपरआर्म का माप 11.5 सेंटीमीटर से कम हो या दोनों पैरों में पिटिंग एडीमा होने पर उन्हें यहाँ भर्ती किया जाता है।

माताओं को मिलता है दैनिक भत्ता: बच्चे के साथ एनआरसी में रहरही माँ या अभिभावक को दैनिक भत्ते के रूप में प्रतिदिन 150 रूपये दिए जाते हैं। साथ ही दोनों टाइम का खाना भी मिलता है। इलाज के बाद फालोअप के लिए पुनः बच्चे को लाने पर भी दैनिक भत्ता देने का प्रावधान है। 

पोषण पुनर्वास केंद्र पर दी जाने वाली सेवाएं : 


·      रेफर किए गए बच्चों की पुन:जांच कर अति-कुपोषित की पहचान करना
·      बच्चे के पोषण का ख़्याल रखना 
·      बच्चों के पोषण पर अभिभावकों को सलाह प्रदान करना 
·      भर्ती किए गये कुपोषित बच्चों की 24 घंटे उचित देखभाल करना  
·      पोषण पुनर्वास केंद्र में डिस्चार्ज के बाद हर 15 दिन में 2 माह तक 4 बार फॉलोअप करना

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