सारण : सदर सीडीपीओ ने जन-सहयोग से बदल दी 10 आंगनबाड़ी केंद्रों की तस्वीर
• मॉडल केंद्र के रूप में किया गया विकसित
• मिल रही है पहले से बेहतर सुविधा
• आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिल रही प्रेरणा
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छपरा। संसाधनों की कमी बेहतर परिणाम प्राप्त करने में बाधक मानी जाती है। लेकिन यदि समाज में कुछ बेहतर करने की ललक हो तो संसाधनों की कमी बाधक नहीं होती। सुनियोजित प्रयास एवं लोगों की सहभागिता के सहारे छपरा सदर सीडीपीओ कुमारी उर्वशी ने इसे सच कर दिखाया है। इन्होने स्थानीय लोगों व सेवानिवृत कर्मियों के साथ मिलकर शहर के दस आंगनबाड़ी केंद्रों की तस्वीर बदल दी है। जिले के दस आंगनबाड़ी केंद्रों को मॉडल केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। सरकार सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों के आंगनबाड़ी केंद्रों को मॉडल बनाने के लिए राशि मुहैया करा रही है। लेकिन इन्होने अपने काफी मेहनत व स्थानीय लोगों के सहयोग से हीं दस आंगनबाड़ी केंद्रों को मॉडल बना दिया है। इनके द्वारा किये गये कार्यों की स्थानीय लोगों व पदाधिकारियों ने काफी सराहना की है।
इस तरह हुआ कार्य:
आंगनबाड़ी केंद्रों को मॉडल केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए वहां स्थानीय लोग, पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक, सेवानिवृत कर्मी जैसे-शिक्षक, प्रोफेसर, सैनिक व अन्य के साथ बैठक की गयी। जिसमें लोगों के साथ बच्चों के बेहतर भविष्य के बारे में चर्चा की गयी और निर्णय लिया गया कि आंगनबाड़ी केंद्र को मॉडल के रूप में विकसित किया जाये। जिसमें सभी स्थानीय लोगों ने आर्थिक सहयोग कर आंगनबाड़ी केंद्रों को मॉडल बना दिया।
इन केंद्रों को बनाया गया मॉडल केंद्र:
• आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-90 तेलपा
• आंगनबाड़ी केंद्र संख्या- 29 काशी बाजार
• आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-8 ब्रहम्पुर
• आंगनबाड़ी केंद्र संख्या- 1 ब्रहम्पुर
• आंगनबाड़ी केंद्र संख्या- 44 डफाली टोला
• आंगनबाड़ी केंद्र संख्या- 80 मौना चौक
• आंगनबाड़ी केंद्र संख्या- 13 मासूमगंज
• आंगनबाड़ी केंद्र संख्या- 125 दौलतगंज
• आंगनबाड़ी केंद्र संख्या- 178 पुलिस लाइन
• आंगनबाड़ी केंद्र संख्या- 75 करीमचक
मॉडल केंद्र पर क्या हुआ बदलाव:
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मॉडल केंद्र के रूप में विकसित आंगनबाड़ी केंद्रों पर पहले से बहुत कुछ बदल चुका है। दीवारों को पेंटिंग के माध्यम से आकर्षक रूप में सजाया गया है। बच्चों की बैठने के लिए बेंच-चेयर की सुविधा, शुद्ध पानी, शौचालय, खेलने के लिए झुला आदि की सुविधा मुहैया करायी गयी है। दीवारों पर स्लोगन, छोटा भीम, मोटू-पतलू जैसे आकर्षक पेंटिंग बनायी गयी है। जो बच्चों को खुब भा रहा है। वहीं बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जा रही है।
अभिभावकों में बढ़ी रूचि:
जिस आंगनबाड़ी केंद्र को मॉडल बनाया गया है। वहां बच्चों की संख्या में वृद्धि हुई है। इसके लिए अभिभावकों में रूचि बढ़ी है। वह अपने-अपने बच्चों को रेगूलर आंगनबाड़ी केंद्रों पर पढ़ने के लिए भेजते हैं। यहां पर बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ साफ-सफाई, पौष्टिक आहार, स्वास्थ्य आदि के बारे में भी जानकारी दी जाती है। वहीं बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्रतिदिन पौष्टिक आहार भी दी जाती है।
आईसीडीएस के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी वंदना पांडेय ने बताया की आईसीडीएस और स्थानीय लोगों के सहयोग से यह कार्य किया गया है। इस तरह के कार्य होते रहना चाहिए। बाकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी इससे प्रेरणा लेना चाहिए। ताकि एक बेहतर समाज का विकास किया जा सके।
सदर सीडीपीओ कुमारी उर्वशी ने बताया कि स्थानीय लोगों के सहयोग से हीं यह कार्य संभव हो पाया है। मुझे डीएम सर से प्रेरणा मिली। जिसके बाद वहां के लोगों से मिलकर बैठक की गयी। वहां के स्थानीय लोगों ने इस कार्य को सफल बनाने में काफी सहयोग किया है। मुझे खुशी है कि मेरे प्रयास से बदलाव हो रहा है। आगे भी इस तरह की कार्य करती रहुंगी।


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